आईएनएस कुलिश

चर्चा में क्यों?  

  • आईएनएस कुलिश भारतीय नौसेना की पूर्वी बेड़े की परिचालन तैनाती के तहत 12 सितंबर 2026 को कंबोडिया के रीम नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना व रॉयल कंबोडियन नौसेना के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना तथा दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को बढ़ावा देना है। 

आईएनएस कुलिश के बारे में 

  • आईएनएस कुलिश भारतीय नौसेना का एक कोरा श्रेणी का युद्धपोत  है। 
  • ‘कुलिश’ संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ वज्र या वज्रास्त्र (थंडरबोल्ट) होता है। 
  • इस युद्धपोत का निर्माण वर्ष 1995 से 2001 के बीच किया गया और वर्ष 2001 में इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। 

निर्माण एवं डिजाइन

  • आईएनएस कुलिश का डिजाइन और निर्माण भारत में ही किया गया है। 
  • इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा विकसित किया गया है। 
  • यह भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को दर्शाने वाले प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्मों में शामिल है। 

प्रमुख विशेषताएँ 

  • मुख्य हथियार: जहाज की प्रमुख मारक क्षमता रूसी मूल की केएच-35 पोत-रोधी क्रूज मिसाइल से आती है। यह समुद्र में शत्रु के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए उपयोग की जाती है। 
  • उन्नत सेंसर एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ: आईएनएस कुलिश आधुनिक निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से लैस है, जिससे यह समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से संचालन कर सकता है। 
  • परिचालन क्षमता: यह जहाज बिना दोबारा ईंधन या रसद की आपूर्ति के लगभग 2,500 समुद्री मील तक की दूरी तय कर सकता है। इससे इसे अपेक्षाकृत लंबी दूरी के समुद्री अभियानों में उपयोग किया जा सकता है। 
  • विस्थापन क्षमता: इसका विस्थापन लगभग 1,500 टन है।
  • इंजन एवं गति: इसमें दो डीजल इंजन लगाए गए हैं, जो इसे अधिकतम लगभग 25 नॉट की गति प्रदान करते हैं। 
  • हेलीकॉप्टर संचालन: जहाज पर चेतक हेलीकॉप्टर के संचालन की क्षमता है। इससे निगरानी, खोज एवं बचाव तथा अन्य समुद्री अभियानों में इसकी परिचालन उपयोगिता बढ़ जाती है। 
  • हथियार प्रणाली: जहाज विभिन्न आधुनिक हथियार प्रणालियों से सुसज्जित है। इनमें समुद्र से समुद्र में मार करने वाली मिसाइलें, लंबी दूरी की तोपें तथा आत्मरक्षा के लिए समुद्र से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं। 

सामरिक महत्त्व 

  • आईएनएस कुलिश भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता, तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी को मजबूत करने में योगदान देता है। 
  • इसकी मिसाइल क्षमता, उन्नत सेंसर, हेलीकॉप्टर संचालन और लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता इसे बहु-भूमिका वाले समुद्री अभियानों के लिए उपयोगी बनाती है।  
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