संदर्भ
भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता के बीच स्वच्छ, सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय घरेलू ईंधन की उपलब्धता सतत विकास की महत्वपूर्ण शर्त है। इस संदर्भ में पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस का विस्तार केवल ऊर्जा क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण, शहरी अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक दक्षता से जुड़ा व्यापक विकासात्मक मुद्दा है। 18 अगस्त 2026 तक देश में लगभग 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध होना इस दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है।
सिटी गैस वितरण नेटवर्क का महत्व
- घरों तक पाइप से प्राकृतिक गैस पहुँचाने के लिए सिटी गैस वितरण नेटवर्क विकसित किया जाता है। इसमें पाइपलाइन तथा उससे जुड़ी अन्य सुविधाएँ शामिल होती हैं, जिनके माध्यम से घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जाती है। इन नेटवर्कों का विकास पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड द्वारा अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है।
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड ने देश के मुख्य भू-भाग को कवर करते हुए 309 भौगोलिक क्षेत्रों में संस्थाओं को अधिकृत किया है। इससे स्पष्ट है कि प्राकृतिक गैस को भारत की भावी ऊर्जा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन ईंधन के रूप में देखा जा रहा है।
पीएनजी के विस्तार से लाभ
पीएनजी के विस्तार से अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं -
- स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: पारंपरिक ठोस ईंधनों की तुलना में प्राकृतिक गैस अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है।
- शहरी जीवन में सुविधा: सिलेंडर की बुकिंग, भंडारण और वितरण पर निर्भरता कम होती है।
- ऊर्जा सुरक्षा: ऊर्जा स्रोतों में विविधता आती है तथा आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।
- आर्थिक दक्षता: मीटर आधारित भुगतान के कारण उपभोक्ता अपनी वास्तविक खपत के अनुसार भुगतान करते हैं।
- आधुनिक अवसंरचना: पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार सुव्यवस्थित शहरी विकास को गति देता है।
नई प्रोत्साहन योजना का महत्व
- 18 अगस्त 2026 को घरेलू पीएनजी कनेक्शनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की गई, जो 1 सितंबर 2026 से लागू हुई। इसका प्रमुख उद्देश्य निष्क्रिय अथवा बिना बिल वाले घरेलू कनेक्शनों को सक्रिय करना तथा नए क्षेत्रों में पाइप से प्राकृतिक गैस के नेटवर्क का विस्तार करना है।
- योजना के अंतर्गत प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र के लिए घरेलू कनेक्शनों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई है। निर्धारित सीमा से अधिक बिल वाले घरेलू कनेक्शन जोड़ने पर पात्र सिटी गैस वितरण संस्था को प्रत्येक अतिरिक्त कनेक्शन के लिए 200 मानक घन मीटर गैस का अतिरिक्त आवंटन मिलता है।
- यह अतिरिक्त गैस घरेलू स्तर पर उत्पादित प्रशासित मूल्य व्यवस्था वाली गैस होगी, जिसकी कीमत अपेक्षाकृत कम होती है। इससे सिटी गैस वितरण संस्थाओं को महंगी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के स्थान पर सस्ती गैस का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
आर्थिक प्रभाव
इस व्यवस्था का आर्थिक प्रभाव इस प्रकार समझा जा सकता है -
- अतिरिक्त सस्ती गैस → महंगी गैस पर निर्भरता में कमी → गैस लागत में कमी → निवेश की शीघ्र वसूली → घरेलू कनेक्शनों के विस्तार को प्रोत्साहन।
- यदि घरेलू कनेक्शन पर किए गए पूंजीगत निवेश की वसूली अवधि लगभग दस वर्ष से घटकर करीब तीन वर्ष हो जाती है, तो कंपनियों के लिए अधिकाधिक घरों तक पाइप से गैस पहुँचाना आर्थिक रूप से आकर्षक हो जाएगा।
- इस प्रकार यह योजना सरकार के सामाजिक उद्देश्य को कंपनियों के व्यावसायिक हितों से जोड़ती है। यह प्रत्यक्ष सब्सिडी के बजाय प्रोत्साहन आधारित नीति का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
परिवारों के लिए पीएनजी के प्रमुख लाभ
पाइप से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति परिवारों के जीवन में सुविधा, सुरक्षा और आर्थिक बचत ला सकती है।
- सुरक्षा: गैस कम दबाव पर भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से आती है। इससे गैस सिलेंडर के भंडारण और बार-बार संभालने की आवश्यकता कम होती है।
- दैनिक सुविधा: सिलेंडर की बुकिंग, जमा राशि और सिलेंडर बदलने की समस्या समाप्त होती है। चौबीसों घंटे गैस की उपलब्धता घरेलू जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती है।
- किफायती उपयोग: मीटर के आधार पर भुगतान होने से उपभोक्ता केवल उतनी गैस के लिए भुगतान करते हैं, जितनी वास्तव में उपयोग की गई है।
- पर्यावरणीय लाभ: प्राकृतिक गैस पारंपरिक ठोस ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ रूप से जलती है। इससे घरेलू वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सहायता मिल सकती है।
- विश्वसनीय आपूर्ति: पाइपलाइन आधारित निरंतर आपूर्ति विशेष रूप से महानगरों, ऊँची इमारतों तथा घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों के लिए उपयोगी है।
पीएनजी विस्तार की चुनौतियाँ
हालाँकि पीएनजी में व्यापक संभावनाएँ हैं, फिर भी इसके सार्वभौमिक विस्तार के सामने कई चुनौतियाँ हैं -
- उच्च प्रारंभिक निवेश: पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने और प्रत्येक घर को कनेक्शन देने के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होती है।
- कम आबादी वाले क्षेत्रों में आर्थिक व्यवहार्यता: ग्रामीण तथा दूरदराज क्षेत्रों में प्रति कनेक्शन अवसंरचना लागत अधिक हो सकती है।
- प्राकृतिक गैस की उपलब्धता: भारत की प्राकृतिक गैस आवश्यकता का एक हिस्सा आयात से पूरा होता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों का प्रभाव पड़ सकता है।
- राज्यों में करों का अंतर: प्राकृतिक गैस पर अलग-अलग राज्यों में मूल्य वर्धित कर की दर अलग होने से उपभोक्ता कीमतों में अंतर पैदा होता है।
- सुरक्षा और रखरखाव: विस्तृत भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के लिए मजबूत सुरक्षा मानक, नियमित निरीक्षण और समयबद्ध रखरखाव आवश्यक है।
- जीवाश्म ईंधन की प्रकृति: प्राकृतिक गैस को दीर्घकालिक समाधान के बजाय स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण के लिए एक संक्रमणकालीन ईंधन मानना अधिक उचित होगा।
पीएनजी विस्तार के लिए सरकारी पहल
पीएनजी विस्तार को केवल वित्तीय प्रोत्साहन से नहीं, बल्कि नियामकीय और प्रशासनिक सुधारों से भी गति दी जा रही है।
- त्वरित नियामकीय मंजूरी: वर्ष 2026 के प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद वितरण संबंधी आदेश के तहत पाइपलाइन मार्गाधिकार के लिए त्वरित मंजूरी व्यवस्था तथा एकरूप शुल्क व्यवस्था लागू की गई है। इससे पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया सरल हो सकती है।
- प्राकृतिक गैस पर कम मूल्य वर्धित कर: राज्यों को प्राकृतिक गैस पर मूल्य वर्धित कर को 5 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के लिए पाइप से मिलने वाली गैस अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है।
- राष्ट्रीय पीएनजी अभियान 2.0: 1 जनवरी से 30 जून 2026 तक देशव्यापी अभियान के माध्यम से घरेलू पीएनजी कनेक्शनों की गति बढ़ाने का प्रयास किया गया।
- एकीकृत पीएनजी पंजीकरण पोर्टल: एकल-खिड़की डिजिटल मंच विकसित किया जा रहा है, जिससे नए कनेक्शन के लिए आवेदन करना तथा उसकी स्थिति की निगरानी करना आसान और तेज हो सकेगा।
आगे की राह
भारत को पीएनजी विस्तार को व्यापक ऊर्जा संक्रमण और ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति से जोड़ना चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं -
- कम गैस-घनत्व वाले क्षेत्रों में लक्षित वित्तीय सहायता अथवा व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण दिया जा सकता है।
- पाइपलाइन नेटवर्क को भविष्य में जैव-सीएनजी और हरित हाइड्रोजन जैसी कम-कार्बन गैसों के साथ जोड़ने की तैयारी करनी चाहिए।
- घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन बढ़ाकर आयातित द्रवीकृत प्राकृतिक गैस पर अत्यधिक निर्भरता कम करनी चाहिए।
- राज्यों के साथ समन्वय कर प्राकृतिक गैस पर कर व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाना चाहिए।
- पाइपलाइन सुरक्षा, रिसाव की निगरानी और उपभोक्ता संरक्षण के लिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
- पीएनजी विस्तार को बिजली, स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी अन्य पहलों का पूरक बनाया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- घरेलू पीएनजी का विस्तार भारत के लिए स्वच्छ घरेलू ऊर्जा, बेहतर जीवन-स्तर, ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई प्रोत्साहन योजना की विशेषता यह है कि यह सरकार के राष्ट्रीय लक्ष्य को सिटी गैस वितरण संस्थाओं के आर्थिक प्रोत्साहन से जोड़ती है।
- हालाँकि प्राकृतिक गैस स्वयं जीवाश्म ईंधन है, फिर भी स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के वर्तमान चरण में यह पारंपरिक प्रदूषणकारी ईंधनों की तुलना में एक उपयोगी संक्रमणकालीन विकल्प हो सकती है। अतः भारत की दीर्घकालिक नीति का लक्ष्य केवल “हर घर गैस” नहीं, बल्कि “हर घर सुरक्षित, सस्ती, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा” होना चाहिए।
- इस प्रकार पाइप से प्राकृतिक गैस की पहुँच बढ़ाना सतत विकास, ऊर्जा न्याय, बेहतर जीवन-स्तर और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।