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अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस

चर्चा में क्यों ? 

डेटा गोपनीयता दिवस (Data Privacy Day) प्रतिवर्ष 28 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है।

प्रमुख बिन्दु:

  • यह दिवस डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता की सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। 
  • इसे डेटा संरक्षण दिवस के नाम से भी जाना जाता है। 
  • इसकी शुरुआत 2006 में यूरोप की कन्वेंशन 108 पर हस्ताक्षर की स्मृति में हुई थी, जो डेटा संरक्षण पर दुनिया की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।

भारत में डेटा गोपनीयता का महत्व:

  • भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी डिजिटलीकृत अर्थव्यवस्था है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नागरिकों के दैनिक जीवन में अभिन्न भूमिका निभाते हैं।
  • डेटा गोपनीयता नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और संरक्षण करती है।
  • यह डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर विश्वास बढ़ाकर शासन और सेवा वितरण को सुरक्षित बनाती है।
  • मजबूत डेटा सुरक्षा उपाय साइबर खतरों, डेटा दुरुपयोग और धोखाधड़ी को रोकने में मदद करते हैं।

भारत का डिजिटल परिदृश्य और गोपनीयता:

  • भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) सेवा वितरण, वित्तीय लेनदेन और नागरिक भागीदारी के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हुई है।
  • आधार: विश्वसनीय डिजिटल पहचान प्रणाली।
  • UPI: डिजिटल भुगतान के माध्यम से वित्तीय लेनदेन में क्रांति।
  • मायगॉव और ई-संजीवनी: नागरिक भागीदारी और स्वास्थ्य सेवा में व्यापक पहुंच।

  • सांख्यिकी:
    • 101.7 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड ग्राहक (सितंबर 2025 तक)।
    • मोबाइल डेटा की लागत 0.10 डॉलर प्रति GB।
    • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पहचान सत्यापन, भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा और शिकायत निवारण में योगदान देते हैं।

डाटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा उपाय:

  • भारत सरकार ने डिजिटल अवसंरचना और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
    1. सीईआरटी-इन: राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नोडल एजेंसी।
    2. I4C: राष्ट्रीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र।
    3. एनसीआरपी और CFCFRMS: नागरिक वित्तीय धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्लेटफ़ॉर्म।
    4. सीएफएमसी: रीयल-टाइम साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र।
    5. डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म प्रवर्तन: अवैध और धोखाधड़ी से जुड़े खातों की पहचान।
    6. साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएँ: डेटा उल्लंघन विश्लेषण और साक्ष्य संरक्षण।
    7. साइबर क्षमता निर्माण: साइबर कमांडो प्रोग्राम, साईट्रेन डिजिटल लर्निंग और CSPAI कार्यक्रम।
    8. राष्ट्रीय जागरूकता अभियान: नागरिक केंद्रित साइबर स्वच्छता और मैलवेयर विश्लेषण।
  • बजट 2025-26: साइबर सुरक्षा हेतु ₹782 करोड़ आवंटित।

कानूनी ढांचा: डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत नींव:

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
    • ई-गवर्नेंस, डिजिटल वाणिज्य और साइबर सुरक्षा का कानूनी आधार।
    • डिजिटल हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को कानूनी मान्यता।
    • साइबर विवादों के लिए न्यायनिर्णय और अपीलीय निकाय।
  • सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021
    • मध्यस्थों (इंटरनेट सेवा प्रदाता, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म आदि) के लिए उचित सावधानी और शिकायत निवारण तंत्र।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023

    • व्यक्तिगत डेटा के वैध और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित।
    • नागरिकों को डेटा प्रिंसिपल के रूप में अधिकार प्रदान।
    • भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड: अनुपालन, उल्लंघन जांच और सुधारात्मक कार्रवाई।

DPDP अधिनियम के प्रमुख अधिकार:

  • सहमति देने/अस्वीकृत करने का अधिकार
  • डेटा उपयोग की जानकारी का अधिकार
  • डेटा तक पहुंच और सुधार का अधिकार
  • डेटा अद्यतन और मिटाने का अधिकार
  • अन्य व्यक्ति को नामांकित करने का अधिकार
  • 90 दिनों में अनिवार्य प्रतिक्रिया
  • उल्लंघन सूचना, संपर्क सूत्र और बच्चों/दिव्यांगों के लिए विशेष सुरक्षा

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025:

  • DPDP अधिनियम का कार्यान्वयन।
  • नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह डेटा सुरक्षा तंत्र।
  • नवाचार और गोपनीयता का संतुलन।

निष्कर्ष:

  • डेटा गोपनीयता दिवस यह याद दिलाता है कि विश्वास, सुरक्षा और गोपनीयता भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं।
  • डिजिटल नवाचार सुरक्षित, नैतिक और जवाबदेह होना चाहिए।
  • साइबर सुरक्षा, संस्थागत क्षमता निर्माण और नागरिक जागरूकता लगातार मजबूत होती रहनी चाहिए।
  • डेटा गोपनीयता सरकार, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।
  • सशक्त, सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल भारत का निर्माण तभी संभव है जब व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
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