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भारत में धन शोधन से संबंधित मुद्दे

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन व इसे रोकना)

संदर्भ

धन शोधन (Money Laundering) वित्तीय समग्रता को कमजोर करने के साथ ही संगठित अपराध को बढ़ावा देता है और आतंकवाद को वित्तपोषित करता है। भारत सीमा पार लेनदेन, डिजिटल भुगतान के दुरुपयोग और फर्जी कंपनी नेटवर्क के कारण धन शोधन की बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहा है।

क्या है धन शोधन 

  • धन शोधन बैंकिंग चैनलों या वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से अवैध आय को वैध धन के रूप में छिपाने की प्रक्रिया है।
  • इसके लिए शेल कंपनियाँ, व्यापार-आधारित लॉन्ड्रिंग, हवाला, रियल एस्टेट में निवेश, क्रिप्टोकरेंसी का दुरुपयोग आदि का प्रयोग किया जाता है।

भारत में धनशोधन से निपटने के लिए कानूनी ढाँचा

  • भारत में धन शोधन से निपटने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act: PMLA), 2002 एक मुख्य कानून है।
  • उद्देश्य : धन शोधन को रोकना, अपराध से अर्जित आय को जब्त करना
  • नोडल एजेंसी : प्रवर्तन निदेशालय (ED)

अन्य प्रासंगिक कानून

  • बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988
  • काला धन (अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति) अधिनियम, 2015
  • भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018
  • फेमा, 1999: विदेशी मुद्रा लेनदेन को नियंत्रित करता है।

धन-शोधन निवारण के सुदृढ़ीकरण के उपाय

वर्ष 2019 पी.एम.एल.ए. में संशोधन

  • अपराध की आय की परिभाषा को व्यापक किया गया। 
  • ‘धन शोधन’ का दायरा प्रत्यक्ष लाभ से आगे बढ़कर अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त संपत्ति तक विस्तारित
  • ई.डी. की तलाशी, ज़ब्ती एवं कुर्की की शक्तियों में वृद्धि
  • कुछ मामलों में ई.डी. के लिए सबूत प्रस्तुत करने का बोझ कम किया गया।
  • वैश्विक मानकों के साथ एकीकरण, जैसे- वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के मानदंडों के साथ संरेखण

चुनौतियाँ

  • अतिरिक्त पहुँच से संबंधित चिंताएँ : आलोचकों का आरोप है कि पी.एम.एल.ए. का उपयोग मूल उद्देश्य से परे किया जा रहा है जिसमें ऐसे अपराध भी शामिल हैं जो प्रत्यक्ष रूप से धन शोधन से जुड़े नहीं हैं।
  • उचित प्रक्रिया संबंधी मुद्दे : ई.डी. के कामकाज में सीमित पारदर्शिता तथा पी.एम.एल.ए. के तहत सबूत का भार अभियुक्त पर डालने से संवैधानिक चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • सीमा पार जटिलता : इसमें कई क्षेत्राधिकार, गोपनीयता कानून और कर-मुक्त क्षेत्र शामिल हैं।
  • प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग : क्रिप्टो, डार्कनेट लेनदेन का पता लगाना मुश्किल।

आगे की राह

  • संस्थागत सुधार : अंतर-एजेंसी समन्वय (ईडी, वित्तीय आसूचना इकाई, सी.बी.आई., आर.बी.आई., सेबी) को मज़बूत करना
  • न्यायिक सुरक्षा उपाय : प्रवर्तन शक्तियों और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन
  • वैश्विक सहयोग : पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों को मज़बूत करना
  • प्रौद्योगिकी एकीकरण : लेनदेन का पता लगाने के लिए एआई एवं ब्लॉकचेन विश्लेषण का उपयोग करना
  • जन जागरूकता : व्यवसायों, पेशेवरों एवं नागरिकों को अनुपालन आवश्यकताओं के बारे में शिक्षित करना
  • न्यायिक एवं प्रक्रियात्मक सुधार : लंबी जाँच से बचने के लिए पी.एम.एल.ए. के तहत मुकदमों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तथा नागरिक स्वतंत्रता के साथ प्रवर्तन को संतुलित करने के लिए सुरक्षा उपाय
  • डिजिटल संपत्तियों का विनियमन : क्रिप्टो एक्सचेंजों एवं उच्च-मूल्य वाले डिजिटल हस्तांतरणों के लिए अनिवार्य के.वाई.सी.
  • क्षमता निर्माण : ई.डी., पुलिस एवं अभियोजकों के लिए फोरेंसिक अकाउंटिंग और साइबर फोरेंसिक में विशेष प्रशिक्षण

निष्कर्ष 

धन शोधन से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण, जैसे- मजबूत घरेलू कानून, प्रौद्योगिकी-सक्षम पहचान, मजबूत वैश्विक सहयोग और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता की आवश्यकता है ताकि आर्थिक सुरक्षा व कानून का शासन दोनों सुनिश्चित हो सकें।

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