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जेलिफ़िश ब्लूम्स

हाल ही में, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम समुद्र तट पर जहरीली जेलीफ़िश के प्रस्फुटन (Jellyfish Bloom) की घटना देखी गई थी। जेलीफ़िश की इस प्रजाति का नाम पेलागिया नोक्टिलुका (Pelagia noctiluca) है।

पेलागिया नोक्टिलुका के बारे में

  • यह एक विषैली जेलीफ़िश प्रजाति है, जिसे माउव स्टिंगर या पर्पल-स्ट्रिप्ड जेलीफ़िश के रूप में भी जाना जाता है।
  • अन्य जेलीफ़िश प्रजातियों के विपरीत इसमें न केवल टेंटिकल्स (Tentacles) पर बल्कि बेल (Bell) पर भी डंक होते हैं। इसका डंक दर्दनाक होता है और जानलेवा हो सकता है। इसकी डंक से दस्त, अत्यधिक दर्द, उल्टी एवं एनाफिलेक्टिक शॉक जैसी बीमारी का कारण हो सकती है।
  • एनाफिलेक्टिक शॉक एक गंभीर एलर्जी समस्या है जो तेजी से विकसित होकर मृत्यु का कारण बन सकती है। 
  • इनमें जैव-प्रदीप्ति (Bioluminescence) का भी गुण होता हैं अर्थात ये अंधकार में प्रकाश उत्पन्न करने की क्षमता रखती हैं।
  • ये जेलीफ़िश सामान्यतः उष्णकटिबंधीय एवं उच्च तापमान वाले समुद्री क्षेत्रों में पायी जाती हैं हालाँकि, यह भारत के पूर्वी तट पर दुर्लभ रूप से मिलती है। 

जेलिफ़िश ब्लूम्स (प्रस्फुटन)

जेलिफ़िश ब्लूम्स की घटना तब होती है जब प्रजातियों की संख्या में कम समय में ही नाटकीय रूप से अत्यधिक वृद्धि हो जाती है। प्राय: इसका कारण उच्च प्रजनन दर होता है। समुद्री तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप जेलीफ़िश ब्लूम्स की घटनाएं बार-बार होती हैं।

जेलिफ़िश ब्लूम्स का प्रभाव

  • विषैली जेलिफ़िश के प्रस्फुटन से मत्स्यन उद्योग को बड़े पैमाने पर नुकसान होता है और पर्यटन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
  • हाल ही में, थाईलैंड के फुकेत में पेलागिया नोक्टिलुका के प्रस्फुटन के बाद सुरक्षा चेतावनी जारी की गई थी। 
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