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ओबीसी उप-वर्गीकरण पर न्यायमूर्ति रोहिणी पैनल की रिपोर्ट

प्रारंभिक परीक्षा – रोहिणी आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन, पेपर-2

संदर्भ-

  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जाति के उप-वर्गीकरण के लिए गठित न्यायमूर्ति जी. रोहिणी की अध्यक्षता वाले आयोग ने 31 जुलाई 2023 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी।

मुख्य बिंदु-

  • दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय आयोग की नियुक्ति 2 अक्टूबर, 2017 को की गई थी, जिसके  कार्यकाल में 14 बार विस्तार हुआ।
  • चार सदस्यीय आयोग के अन्य सदस्य हैं- (1) डॉ. जे.के. बजाज, निदेशक, नीति अध्ययन केंद्र, नई दिल्ली (2) निदेशक, भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण, कोलकाता (पदेन सदस्य) (3) रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त, भारत (पदेन सदस्य)
  • आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी रोहिणी ओबीसी समुदाय से हैं।
  • आयोग का गठन  संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत किया गया था।

आयोग का कार्य-

  • आयोग को यह जांचने के लिए कहा गया था कि ओबीसी को प्राप्त  आरक्षण और अन्य लाभ किस हद तक कुछ प्रमुख जाति समूहों के बीच केंद्रित हैं। 
  • इसके आधार पर, आयोग को केंद्रीय ओबीसी सूची में लगभग 2,600 से अधिक जाति समूहों के विभाजन का सुझाव देने का काम सौंपा गया था ताकि इन लाभों को समान रूप से पुनर्वितरित किया जा सके।
  • आयोग को ऐसी विकृतियों को भी  पहचानना था, जिसमें कुछ जातियों ने ओबीसी के लिए 27% कोटा के तहत उपलब्ध लाभों के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था । इसके अतिरिक्त सुधारात्मक कार्रवाइयों पर सुझाव देने का काम सौंपा गया था। 

आयोग के उद्देश्य-

  • केंद्रीय सूची में ओबीसी की व्यापक श्रेणी में शामिल जातियों या समुदायों के बीच आरक्षण के लाभों के असमान वितरण की सीमा की जांच करे।
  • ऐसे ओबीसी के भीतर उप-वर्गीकरण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तंत्र और मानदंड बनाने पर कार्य करे।
  • ओबीसी की केंद्रीय सूची में संबंधित जातियों या समुदायों या उप-जातियों की पहचान करने और उन्हें उनकी संबंधित उप-श्रेणियों में वर्गीकृत करने का कार्य शुरू करे।
  • ओबीसी की केंद्रीय सूची में विभिन्न प्रविष्टियों का अध्ययन करना और किसी भी दोहराव, अस्पष्टता, विसंगतियों और वर्तनी या प्रतिलेखन की त्रुटियों में सुधार की सिफारिश करना।

आयोग के सुझाव-

  • हालाँकि आयोग के रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
  • सूत्रों के अनुसार, आयोग ने जाति समूहों को व्यापक श्रेणियों में विभाजित करने का सुझाव दिया है, जिसमें प्रमुख जातियों (लाभों तक सबसे अधिक पहुंच के साथ) को 27% आरक्षण का सबसे छोटा हिस्सा मिलेगा और ऐतिहासिक रूप से पिछड़े जाति समूहों को सबसे बड़ा हिस्सा मिलेगा। 
  • ओबीसी जाति समूहों को उप-वर्गीकृत करने की सिफारिशों के अलावा, आयोग ने ओबीसी सूची में प्रविष्टियों की सूक्ष्मता से जांच करने और जातियों की सूची को तर्कसंगत बनाने के लिए प्रविष्टियों की वर्तनी में चूक और सुधार का सुझाव देने की भी सिफारिश की।

ओबीसी के उप-वर्गीकरण की आवश्यकता -

  • ओबीसी को केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में 27% आरक्षण मिलता है।
  • ओबीसी की केंद्रीय सूची में 2,600 से अधिक प्रविष्टियाँ हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक धारणा ने जड़ें जमा ली हैं कि उनमें से केवल कुछ समृद्ध समुदायों को आरक्षण से लाभ हुआ है।
  • इसलिए आरक्षण के लाभों का "समान वितरण" सुनिश्चित करने के लिए ओबीसी का "उप-वर्गीकरण"  27% कोटा के अंतर्गत होना  आवश्यक है।
  • अगस्त 2020 में सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उप-वर्गीकरण बहस में हस्तक्षेप किया और फैसला सुनाया कि 2005 के 'ई वी चिन्नैया बनाम राज्य सरकार' का पुनरावलोकन किया जाना चाहिए।
  • 'चिन्नैया' ने माना था कि इन सूचियों में अन्य की तुलना में अधिक पिछड़ी जातियों या जनजातियों के लाभ के लिए एससी और एसटी के लिए आरक्षण के भीतर कोई विशेष उप-आरक्षण पेश नहीं किया जा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के 2020 के  फैसले को बड़ी बेंच में चुनौती दी गई, जिसने  'पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह' मामले में 2006 के पंजाब कानून की वैधता की जांच की थी, जिसने एससी के भीतर उप-वर्गीकरण बनाया था और आरक्षण की मांग की थी। 

समीक्षा-

  • सर्वप्रथम वर्ष 2015 में ‘राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग’ (NCBC) ने ओबीसी को अत्यंत पिछड़े वर्गों, अधिक पिछड़े वर्गों और पिछड़े वर्गों जैसी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किये जाने की सिफारिश की थी।
  • ओबीसी के अपेक्षाकृत पिछड़े समुदायों की यह शिकायत रहती है कि अपेक्षाकृत अच्छी आर्थिक और शैक्षिक स्थिति वाले ओबीसी समूह अधिकांश वंचित समुदायों के आरक्षण का लाभ हड़प लेते हैं। 
  • कई लोगों का मानना है कि उप-समूहीकरण से घटक समूहों के बीच आरक्षित लाभों का समान वितरण हो सकेगा।
  • 2018 में रोहिणी आयोग ने पिछले पांच वर्षों में ओबीसी कोटा के तहत 1.3 लाख केंद्र सरकार की नौकरियों और पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालयों, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और एम्स सहित केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी प्रवेश के आंकड़ों का विश्लेषण किया।
  • विशलेषण में 983 ओबीसी समुदायों, जो कुल ओबीसी का 37% हैं, का नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में शून्य प्रतिनिधित्व पाया गया और 994 ओबीसी उप-जातियों का भर्तियों और प्रवेशों में केवल 2.68% प्रतिनिधित्व था। हालाँकि, अद्यतन जनसंख्या डेटा की अनुपस्थिति के कारण इस  विश्लेषण की अपनी सीमा थी।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- ओबीसी उप-वर्गीकरण पर गठित न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए ।

  1. इसका गठन 2 अक्टूबर 2020 को किया गया था
  2. आयोग का गठन  संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत किया गया था।

नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए।

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर - (d)

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न –

प्रश्न- क्या आप इस बात से सहमत हैं कि ओबीसी को प्राप्त आरक्षण से केवल कुछ विशेष जातियां ही लाभान्वित होती हैं? इस संदर्भ में रोहिणी आयोग का मूल्यांकन करें।

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