कच्चातिवु द्वीप

तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर, केंद्र सरकार से कच्चातिवु द्वीप समझौते पर पुनर्विचार कर उसे श्रीलंका से वापस लेने का आग्रह किया है।

कच्चातिवु द्वीप के बारे में 

  • अवस्थिति :  कच्चातिवु द्वीप पाक जलडमरू के मध्य में एक छोटा सा द्वीप है, जो बंगाल की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
    • यह श्रीलंका के नेदुन्तीवु और भारत के रामेश्वरम के बीच स्थित एक निर्जन क्षेत्र है
  • निर्माण : 14वीं शताब्दी में ज्वालामुखी विस्फोट के द्वारा। 
  • इतिहास : 
    • प्रारंभ में, इस द्वीप पर श्रीलंका के जाफना साम्राज्य का नियंत्रण था। 
    • 17वीं शताब्दी में यह मदुरई के राजा रामनाद के अधीन आ गया। 
    • ब्रिटिश राज के दौरान यह मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा बन गया। 
    • लेकिन वर्ष 1921 में भारत और श्रीलंका दोनों देशों के द्वारा मछली पकड़ने की सीमा निर्धारित करने के कारण यह क्षेत्र विवाद का विषय बन गया।

कच्चातिवु द्वीप प्रस्ताव संबंधी मुद्दा  

पृष्ठभूमि

  • 28 जून 1974 को हस्ताक्षरित कच्चातिवु द्वीप समझौते के तहत भारत द्वारा यह द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया था।
  • हालांकि तब से यह केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच भी एक विवाद का विषय बना रहा।
    • तमिलनाडु सरकार द्वारा यह कहा जाता रहा है कि इस संदर्भ में राज्य सरकार से कोई विमर्श नहीं किया गया।
  • तमिलनाडु विधानसभा द्वारा वर्ष 1991, 2013 और 2014 में भी पहले ऐसे प्रस्ताव पारित कर कच्चातिवु को पुनः प्राप्त करने की मांग की जा चुकी है।

कच्चातिवु को वापस लेने की मांग का कारण  

  • विदेश मंत्री द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार श्रीलंकाई नौसेना द्वारा औसतन प्रतिदिन दो मछुआरों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
    • वर्ष 2024 में लगभग 530 मछुआरों को पकड़ा गया था।
    • वर्ष 2021 से मार्च 2025 तक श्रीलंकाई नौसेना द्वारा 1,383 मछुआरों को पकड़ा गया है।
  • ऐसे में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा यह प्रस्ताव राज्य के मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की रक्षा के लिए स्थायी समाधान के रूप में पारित किया गया है।
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