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बिजली कटौती और भंडारण संकट से जूझता भारत का ऊर्जा परिवर्तन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा आयोजित इंडिया एनर्जी ट्रांजिशन समिट में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने स्वीकार किया कि नवीकरणीय क्षमता का विस्तार प्रणाली की उसे समाहित करने की क्षमता से कहीं तेज हो रहा है। परिणामस्वरूप कई राज्यों में स्थानीय स्तर पर बिजली कटौती हो रही है।

CEA

प्रमुख बिन्दु

 1. नवीकरणीय ऊर्जा में कटौती (Curtailment)

  • 2025 में रिकॉर्ड सौर क्षमता जोड़ी गई।
  • फिर भी 2.3 TWh सौर ऊर्जा की कटौती (मई-दिसंबर 2025)।
  • कारण: मांग में धीमी वृद्धि और ग्रिड संतुलन की समस्या।

2. कोयला संयंत्रों की सीमित लचीलापन

  • कोयला संयंत्र न्यूनतम तकनीकी लोड से नीचे नहीं चल सकते।
  • दिन में अधिक सौर उत्पादन के समय संतुलन कठिन।

3. पारेषण अवसंरचना में देरी

  • कई राज्यों में नई परियोजनाओं को अस्थायी नेटवर्क पहुंच।
  • ट्रांसमिशन लाइनें समय पर पूरी नहीं हो रहीं।
  • परियोजनाओं को 48% तक उत्पादन घटाने के निर्देश।

4. निवेश पर असर

  • परियोजना डेवलपर्स को वित्तीय नुकसान।
  • निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

5. ऊर्जा भंडारण की तात्कालिक आवश्यकता

  • 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य।
  • पंप्ड हाइड्रो और बैटरी स्टोरेज को प्राथमिकता।
  • ग्रिड स्थिरता और 24x7 स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति के लिए जरूरी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI)

FICCI

  • फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) भारत का एक प्रमुख उद्योग एवं व्यापारिक संगठन (Industry Association) है। 
  • यह सरकार और उद्योग जगत के बीच सेतु का कार्य करता है तथा नीतिगत मुद्दों पर सुझाव देता है।

स्थापना एवं पृष्ठभूमि

  • स्थापना: 1927
  • प्रेरणा: महात्मा गांधी के सुझाव पर
  • संस्थापक: घनश्यामदास बिड़ला और पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • FICCI स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय उद्योगपतियों के हितों की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था।

उद्देश्य

  • उद्योग और व्यापार के हितों का संरक्षण
  • सरकार को नीतिगत सुझाव देना
  • निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना
  • वैश्विक व्यापार सहयोग को प्रोत्साहित करना

प्रमुख कार्य

  • विभिन्न क्षेत्रों (ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, MSME आदि) पर रिपोर्ट तैयार करना
  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करना
  • उद्योग-सरकार संवाद मंच उपलब्ध कराना
  • विदेशी निवेश आकर्षित करने हेतु व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजना

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के बारे में

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक (Statutory) निकाय है। इसका गठन विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत किया गया है। यह देश में बिजली क्षेत्र की तकनीकी योजना, समन्वय और मानकीकरण का प्रमुख संस्थान है।

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स्थापना व मुख्यालय

  • स्थापना: मूल रूप से 1951 (Electricity Supply Act, 1948 के तहत), वर्तमान स्वरूप: 2003 अधिनियम के तहत
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • प्रशासनिक मंत्रालय: विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार

प्रमुख कार्य

राष्ट्रीय विद्युत योजना  

  • उत्पादन, पारेषण और वितरण के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करना।
  • मांग-आपूर्ति का आकलन।

तकनीकी मानक निर्धारण

  • बिजली संयंत्रों और ग्रिड के लिए तकनीकी मानक तय करना।
  • ग्रिड स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।

ऊर्जा आंकड़े और डेटा

  • देश के बिजली क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक आँकड़े जारी करना।
  • क्षमता, उत्पादन, मांग आदि पर रिपोर्ट प्रकाशित करना।

ग्रिड समन्वय

  • राज्यों और केंद्र के बीच विद्युत प्रणाली का समन्वय।
  • राष्ट्रीय ग्रिड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।

नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण

  • सौर और पवन ऊर्जा को ग्रिड में समाहित करने की योजना बनाना।
  • ऊर्जा भंडारण और लचीले संचालन पर सुझाव देना।

निष्कर्ष

भारत में स्वच्छ ऊर्जा विस्तार ऐतिहासिक स्तर पर है, लेकिन ग्रिड तैयारी, पारेषण विस्तार और भंडारण क्षमता के बिना यह वृद्धि टिकाऊ नहीं हो पाएगी। इसी कारण यह विषय नीति-निर्माताओं, उद्योग और निवेशकों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।

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