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देश की पहली सौर-सह-भंडारण परियोजना

संदर्भ

  • हाल ही में केंद्रीय रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर (पूर्व छावनी क्षेत्र) में लगभग 850 एकड़ रक्षा भूमि पर 250 मेगावाट (MW) की सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

सौर-सह-भंडारण परियोजना के बारे में  

  • यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और रक्षा मंत्रालय की खाली पड़ी जमीनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 
  • यह परियोजना रक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई अपने तरह की पहली अनूठी पहल है, जिसमें सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) को भी एकीकृत किया जाएगा। 

मुख्य विशेषताएं :

  • विशाल क्षमता : 250 मेगावाट क्षमता के साथ यह रक्षा भूमि पर स्थापित होने वाली देश की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में से एक होगी।
  • बैटरी स्टोरेज (BESS) सपोर्ट : बिजली उत्पादन के साथ-साथ इसमें आधुनिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम भी होगा, ताकि जरूरत के समय निर्बाध बिजली की आपूर्ति की जा सके। 
  • जमीन का सदुपयोग : इसके लिए सीतापुर के पूर्व छावनी क्षेत्र की लगभग 850 एकड़ खाली पड़ी रक्षा भूमि का उपयोग किया जाएगा।
  • लागत में कमी : इस परियोजना से रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए पारंपरिक ग्रिड बिजली की खरीद पर होने वाले खर्च में भारी कटौती होगी, जिससे सरकारी खजाने को बड़ी बचत मिलेगी।

पारंपरिक निर्भरता से मुक्ति और सतत विकास :

  • यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों (जैसे कोयला आधारित बिजली) पर निर्भरता कम करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। 
  • रक्षा बलों के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। 
  • वर्तमान सरकार यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता के बेहतरीन संगम को दर्शाता है।

एनटीपीसी (NTPC) द्वारा क्रियान्वयन :

  • इस परियोजना का क्रियान्वयन देश की दिग्गज ऊर्जा कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Ltd.) को सौंपी गई है। एनटीपीसी एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (Competitive Bidding) के माध्यम से इस परियोजना को कार्यान्वित कर रही है, ताकि रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए सबसे अनुकूल ऊर्जा मूल्य निर्धारण और अधिकतम बचत सुनिश्चित की जा सके। 

परियोजना के लिए समन्वय :

  • परियोजना को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कई विभाग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके सफल संचालन के लिए निम्नलिखित विभागों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र तैयार किया गया है:
    • रक्षा मंत्रालय (सेना) का एकीकृत मुख्यालय
    • रक्षा संपदा महानिदेशालय (DGDE)
    • एनटीपीसी (NTPC) 

भविष्य के लिए एक बेंचमार्क 

  • सीतापुर की यह सौर ऊर्जा परियोजना रक्षा भूमि पर स्थापित देश की सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में से एक के रूप में उभरेगी। 
  • यह न केवल भारतीय सेना की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य में रक्षा क्षेत्र में आने वाली सौर-सह-भंडारण (Solar-cum-Storage) परियोजनाओं के लिए एक नए मानक (बेंचमार्क) के रूप में भी काम करेगी।
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