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दक्षिण अफ़्रीकी सीमा शुल्क संघ

चर्चा में क्यों?

भारत और पांच सदस्यीय दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन - एसएसीयू) ने हाल ही में तरजीही व्यापार समझौते (प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट - पीटीए) के लिए बातचीत शुरू करने हेतु संदर्भ शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) पर हस्ताक्षर किए हैं। वस्तुतः दोनों पक्षों का लक्ष्य इन व्यापार वार्ताओं को एक वर्ष के भीतर पूरा करना है।   

दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ के बारे में 

  • दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) अफ्रीकी देशों का एक क्षेत्रीय आर्थिक संगठन है। 
  • इसे दुनिया का सबसे पुराना सीमा शुल्क संघ माना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1910 में हुई थी। 

सदस्य देश:

एसएसीयू में पांच देश शामिल हैं - 

  • दक्षिण अफ्रीका
  • नामीबिया
  • बोत्सवाना
  • लेसोथो
  • इस्वातिनी (स्वाज़ीलैंड)

एसएसीयू का सचिवालय: 

  • एसएसीयू का सचिवालय (सेक्रेटेरिएट) नामीबिया की राजधानी विंडहोक में स्थित है।

एसएसीयू की प्रमुख विशेषताएं: 

  • एसएसीयू के पांचों सदस्य देश साझा बाहरी शुल्क (कॉमन एक्सटर्नल टैरिफ - सीईटी) व्यवस्था का पालन करते हैं। इसके तहत सदस्य देश गैर-सदस्य देशों से आने वाली वस्तुओं पर एक समान बाहरी शुल्क व्यवस्था लागू करते हैं।  
  • सदस्य देश सीमा शुल्क राजस्व साझा करते हैं तथा व्यापार से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी नीतियों और निर्णय प्रक्रिया में समन्वय करते हैं। 
  • एसएसीयू की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके सदस्य देश एक साझा सीमा शुल्क क्षेत्र (सिंगल कस्टम्स टेरिटरी) के रूप में कार्य करते हैं। इसके कारण सदस्य देशों के बीच वस्तुओं की आवाजाही अपेक्षाकृत मुक्त रहती है और आपसी व्यापार पर शुल्क तथा अन्य बाधाओं को समाप्त या कम किया जाता है। वहीं, एसएसीयू के बाहर के देशों से आयातित वस्तुओं पर साझा बाहरी शुल्क (सीईटी) लागू होता है।  

दक्षिण अफ्रीका की प्रमुख भूमिका 

  • एसएसीयू के भीतर दक्षिण अफ्रीका की आर्थिक भूमिका सबसे बड़ी है। समूह के कुल आर्थिक उत्पादन में दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी लगभग 91 प्रतिशत है। 
  • भारत के लिए भी दक्षिण अफ्रीका एसएसीयू के भीतर सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए भारत और एसएसीयू के बीच प्रस्तावित पीटीए में दक्षिण अफ्रीका की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी। 
  • समझौता होने पर दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं के व्यापार में शुल्क संबंधी रियायतें बढ़ सकती हैं और बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है। 

एसएसीयू और दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय 

  • एसएसीयू के सभी पांच सदस्य देश दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय (सदर्न अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी-एसएडीसी) के भी सदस्य हैं। 
  • एसएडीसी में एसएसीयू के पांच देशों के अलावा अंगोला, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मलावी, मोज़ाम्बिक, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं। 
  • इसके अतिरिक्त मॉरीशस, सेशेल्स, कोमोरोस और मेडागास्कर जैसे द्वीपीय देश भी एसएडीसी का हिस्सा हैं।  

भारत के लिए महत्व 

  • भारत और एसएसीयू के बीच प्रस्तावित तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) भारत की अफ्रीका-केंद्रित व्यापार रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे भारतीय कंपनियों को दक्षिणी अफ्रीकी बाजारों में बेहतर पहुंच मिल सकती है और दोनों पक्षों के बीच व्यापार तथा निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
  • एसएसीयू की साझा सीमा शुल्क व्यवस्था को देखते हुए यह समझौता भारत के लिए केवल पांच देशों तक सीमित व्यापारिक अवसरों के बजाय दक्षिणी अफ्रीकी क्षेत्र में व्यापक आर्थिक पहुंच मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। 
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