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स्यूडोकैप्रिटर्मिस नोवस (Pseudocapritermes novus)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में पश्चिम बंगाल के घने जंगलों में शोधकर्ताओं ने मिट्टी में निवास करने वाली दीमक की एक नई प्रजाति की पहचान की है, जिसे स्यूडोकैप्रिटर्मिस नोवस (Pseudocapritermes novus) नाम दिया गया है।  

स्यूडोकैप्रिटर्मिस नोवस के बारे में  

  • यह दीमक की एक नवीन प्रजाति है, जो मिट्टी में जीवनयापन करती है।  
  • इसकी खोज पश्चिम बंगाल स्थित चपरामारी वन्यजीव अभयारण्य में किए गए एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान हुई।  
  • यह सामान्य रूप से पाए जाने वाले विनाशकारी दीमकों से भिन्न प्रकृति की है। 
  • यह मिट्टी और ह्यूमस पर आधारित आहार ग्रहण करने वाली दीमक है, जो पारिस्थितिकी तंत्र में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। 
  • इसे किसी भी पर्यावरण तंत्र में मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।  
  • इस खोज के साथ भारत में दर्ज स्यूडोकैप्रिटर्मिस (Pseudocapritermes) प्रजातियों की संख्या बढ़कर पाँच हो गई है। 

स्यूडोकैप्रिटर्मिस नोवस (Pseudocapritermes novus) की प्रमुख विशेषताएँ 

  • यह प्रजाति अपनी निकट संबंधी दीमकों से मुख्यतः अपने मुख के भागों और शरीर संरचना की विशिष्ट बनावट के कारण अलग पहचानी जाती है।  
  • अपने समूह की अन्य दीमकों की तरह, इसमें विषम (asymmetrical) और स्नैपिंग प्रकार के जबड़े पाए जाते हैं, जिनका उपयोग यह रक्षा करने तथा ध्वनि उत्पन्न कर चेतावनी देने के लिए करती है।  
  • इसकी निकटतम प्रजाति पी. भूटानीन्सिस (P. bhutanensis) की तुलना में इसका बायाँ जबड़ा अधिक मुड़ा हुआ होता है और उसका सिरा थोड़ा अंदर की ओर झुका हुआ पाया जाता है।  
  • इसके मुख के निचले भाग (postmentum) में अधिक गोल, उभरा हुआ तथा अपेक्षाकृत लंबा और चौड़ा ढांचा देखा गया है। 
  • इसके आगे वाले पैरों में मजबूत और स्पष्ट काँटे (spurs) मौजूद होते हैं। 
  • वहीं दूसरी करीबी प्रजाति पी. टिकादारी (P. tikadari) की तुलना में इसका सिर अधिक चौड़ा होता है।
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