संदर्भ
- हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 95,962 करोड़ रुपये के अंतरिम आवंटन को मंजूरी दी है।
- इस आवंटन में राज्य सरकारों का अंशदान शामिल नहीं है। योजना के तहत अधिकांश राज्यों को केंद्र द्वारा दी गई राशि के अतिरिक्त 40 प्रतिशत योगदान देना होगा। केंद्र और राज्यों के संयुक्त योगदान से इस योजना का कुल परिव्यय लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
फंड वितरण और राज्यों का हिस्सा
ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अंतरिम आवंटन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दी गई राशि निम्नलिखित है :
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राज्य / क्षेत्र
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आवंटित राशि (करोड़ रुपये में)
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उत्तर प्रदेश (सबसे अधिक)
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₹9,721.48
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पश्चिम बंगाल
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₹8,508.00
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आंध्र प्रदेश
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₹7,707.21
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तमिलनाडु
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₹7,585.49
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राजस्थान
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₹7,581.87
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बिहार
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₹6,715.83
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सभी राज्यों का कुल आवंटन
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₹92,550.17
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केंद्र शासित प्रदेश (UTs)
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₹1,291.52
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केंद्रीय प्रशासन और सामाजिक ऑडिट
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₹1,850.62
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कुल अंतरिम बजट
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₹95,692.31
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नया वितरण फॉर्मूला और उद्देश्य
- यह आवंटन व्यापक रूप से उन राशियों के अनुरूप है जो पिछले वित्तीय वर्षों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत राज्यों को उपलब्ध कराई जाती रही हैं। हालांकि, नए कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों में रोजगार सृजन और आजीविका समर्थन की पहुँच को और अधिक व्यापक बनाना है।
- इस दिशा में मसौदा नियमों में राज्यों के लिए केंद्रीय आवंटन तय करने हेतु 16वें वित्त आयोग के क्षैतिज हस्तांतरण (हॉरिजॉन्टल ट्रांसफर) सूत्र को अपनाने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि, फंड वितरण का अंतिम फार्मूला अभी तय होना बाकी है और इसके 1 जुलाई को अधिसूचित होने की संभावना है। अंतिम सूत्र लागू होने के बाद विभिन्न राज्यों के हिस्से में बदलाव देखने को मिल सकता है।
राज्यों की तैयारियां: 4 राज्य अभी भी पीछे
- इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए देश के 26 राज्यों ने सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
- हालांकि, 4 राज्य- झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम अभी अपनी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटे हैं। इन राज्यों के प्रतिनिधियों ने बैठक में शामिल होकर केंद्र को भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही अपनी तैयारियां पूरी कर लेंगे।
कार्यान्वयन से पहले राज्यों को करने होंगे ये जरूरी काम:
- योजना से जुड़े स्थानीय नियम और दिशा-निर्देश तैयार करना।
- सभी लाभार्थियों का ई-केवाईसी (e-KYC) वेरिफिकेशन पूरा करना।
- स्थानीय कृषि चक्र (खेती के सीजन) के आधार पर काम पर रोक लगाने की अवधि (प्रतिबंध अवधि) तय करना।
- जिला और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों व कर्मचारियों का क्षमता निर्माण (ट्रेनिंग) करना।
विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका मिशन के लिए गारंटी (ग्रामीण) के बारे में
- विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 मनरेगा (MGNREGA) का स्थान लेते हुए एक नया वैधानिक ढांचा स्थापित करता है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 की दीर्घकालिक परिकल्पना के अनुरूप बनाना है।
प्रमुख बिंदु:
- विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025, मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप नया वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
- ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार गारंटी को बढ़ाकर प्रति वर्ष 125 दिन कर दिया गया है, जिससे आय सुरक्षा और मजबूत होगी।
- मजदूरी आधारित रोजगार को चार प्राथमिक क्षेत्रों में टिकाऊ ग्रामीण अवसंरचना निर्माण से जोड़ा गया है।
- विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (Viksit Gram Panchayat Plans) के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना निर्माण को सशक्त किया गया है तथा इसे विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत किया गया है।
- मानक-आधारित (Normative) वित्तपोषण और केंद्र प्रायोजित संरचना अपनाने से पूर्वानुमेयता, जवाबदेही तथा केंद्र-राज्य साझेदारी में सुधार होगा।
125 दिनों की रोजगार गारंटी:
- यह अधिनियम प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की गारंटी प्रदान करता है, बशर्ते उस परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध हों।
- यह व्यवस्था पूर्व की 100-दिवसीय रोजगार गारंटी की तुलना में आय सुरक्षा को और मजबूत बनाती है। साथ ही, कृषि क्षेत्र में बुवाई और कटाई के व्यस्त मौसम के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुल 60 दिनों की ‘नो-वर्क अवधि’ निर्धारित की गई है।
- इसके बावजूद श्रमिकों को शेष 305 दिनों के भीतर 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती रहेगी, जिससे किसानों और श्रमिकों दोनों के हितों की रक्षा होगी।
- दैनिक मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा अथवा किसी भी स्थिति में कार्य संपन्न होने की तिथि से पंद्रह दिनों (एक पखवाड़े) के भीतर कर दिया जाएगा।
अवसंरचना विकास से जुड़ा रोजगार:
- इस अधिनियम के अंतर्गत रोजगार सृजन को अवसंरचना विकास के साथ एकीकृत किया गया है। इसके लिए चार प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है -
- जल सुरक्षा से संबंधित कार्य।
- मुख्य ग्रामीण अवसंरचना (Core Rural Infrastructure) का विकास।
- आजीविका-संबंधी अवसंरचना का निर्माण।
- चरम मौसमीय घटनाओं (Extreme Weather Events) के प्रभावों को कम करने हेतु विशेष कार्य।