भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य यात्रा में कल एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के अजमेर से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। यह केवल एक मेडिकल अभियान नहीं, बल्कि भारत की बेटियों को कैंसर मुक्त भविष्य देने का एक "मिशन मोड" संकल्प है।
एक गंभीर चुनौती और वैज्ञानिक समाधान
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे घातक कैंसर है। हर साल 1.20 लाख से अधिक नए मामले और लगभग 80,000 मौतें हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या इसे रोका जा सकता था?
- सर्वाइकल कैंसर के 80% से अधिक मामलों के लिए एचपीवी टाइप 16 और 18 जिम्मेदार हैं। टीकाकरण के माध्यम से इन वायरस को शरीर में घर करने से पहले ही रोका जा सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर के बारे में
- सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से, जिसे गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) कहा जाता है, की कोशिकाओं में विकसित होता है।
- भारत में महिलाओं में होने वाला यह दूसरा सबसे आम कैंसर है, लेकिन राहत की बात यह है कि यह दुनिया के सबसे आसानी से रोके जा सकने वाले और शुरुआती पहचान होने पर पूरी तरह ठीक होने वाले कैंसरों में से एक है।
मुख्य कारण: HPV संक्रमण
- सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99% मामले 'ह्यूमन पैपिलोमा वायरस' (HPV) के उच्च-जोखिम वाले प्रकारों (विशेषकर Type 16 और 18) के कारण होते हैं।
- जब यह वायरस शरीर में लंबे समय तक बना रहता है, तो यह धीरे-धीरे गर्भाशय ग्रीवा की सामान्य कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदलना शुरू कर देता है।
- यह प्रक्रिया रातों-रात नहीं होती; संक्रमण से कैंसर बनने में आमतौर पर 15 से 20 साल का समय लगता है।
रोकथाम
- 9 से 14 वर्ष की उम्र में HPV वैक्सीन लगवाना सबसे प्रभावी है। यह संक्रमण होने से पहले ही शरीर में एंटीबॉडी बना देता है।
- 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को नियमित पैप स्मीयर (Pap Smear) या HPV DNA टेस्ट करवाना चाहिए। इससे कैंसर बनने से पहले की स्थिति (Pre-cancerous lesions) का पता चल जाता है।
- स्वस्थ जीवनशैली व्यक्तिगत स्वच्छता (Hygiene), सुरक्षित शारीरिक संबंध और धूम्रपान से परहेज करना जोखिम को कम करता है।
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ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम के बारे में
- इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य देशभर की 14 वर्ष की लगभग 1.15 करोड़ लड़कियों को सुरक्षित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत गार्डासिल (GARDASIL) वैक्सीन का उपयोग किया जाएगा, जो एक क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन है।
- यह न केवल सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण बनने वाले एचपीवी टाइप 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि टाइप 6 और 11 से होने वाले संक्रमणों को रोकने में भी सक्षम है।
- आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए, सरकार यह वैक्सीन सभी निर्धारित सरकारी केंद्रों पर पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध करा रही है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैक्सीन संबंधित कैंसर को रोकने में 93% से 100% तक असरदार पाई गई है। टीकाकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया गया है।
- यह पूरी तरह ऐच्छिक होगा और टीका लगाने से पहले माता-पिता या अभिभावक की सूचित सहमति अनिवार्य रूप से ली जाएगी, ताकि हर परिवार विश्वास के साथ इस स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को अपना सके।
सुरक्षा और सुलभता का कवच
सरकार ने इस अभियान को हर घर तक पहुँचाने के लिए एक सुदृढ़ ढांचा तैयार किया है:
- मिशन मोड क्रियान्वयन: अगले तीन महीनों तक यह अभियान विशेष सक्रियता के साथ चलेगा, जिसके बाद इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा।
- उपलब्धता: आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में टीके उपलब्ध होंगे।
- कोल्ड चेन मैनेजमेंट: टीकों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 24×7 कोल्ड चेन पॉइंट सुनिश्चित किए गए हैं।
- विशेषज्ञ निगरानी: प्रत्येक सत्र प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख में होगा ताकि किसी भी रेयर एडवर्स इवेंट (AEFI) का तुरंत प्रबंधन किया जा सके।
वैश्विक मानकों पर खरा भारत
- भारत अब उन 160 देशों की कतार में खड़ा है जिन्होंने एचपीवी वैक्सीन को अपने राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनाया है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह (NTAGI) के मार्गदर्शन में, भारत ने सिंगल-डोज़ शेड्यूल को अपनाया है, जो सुरक्षा में टू-डोज़ के बराबर और वितरण में अधिक किफायती है।