New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

16वां वित्त आयोग: शहरी शासन सुधारों को नई मजबूती

चर्चा में क्यों?

भारत में शहरी आबादी लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि 2031 तक देश की लगभग 41% आबादी शहरों में निवास करेगी। ऐसे में शहरी बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, जलापूर्ति, परिवहन और आवास जैसी सेवाओं पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। 16वें वित्त आयोग ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शहरी स्थानीय सरकारों के लिए अनुदान में उल्लेखनीय वृद्धि की सिफारिश की है, जिससे शहरी शासन को वित्तीय आधार मिल सके।

16th-finance-commission

16वां वित्त आयोग: प्रमुख सिफारिशें

केंद्र-राज्य कर बंटवारा

  • केंद्र के विभाज्य कर पूल का 41% हिस्सा राज्यों को दिया जाएगा।
  • यह प्रतिशत 15वें वित्त आयोग की सिफारिश के समान है।
  • उपकर (Cess) और अधिभार (Surcharge) को विभाज्य पूल में शामिल नहीं किया गया है।

राज्यों के बीच वितरण का नया फॉर्मूला

मापदंड

भार (%)

आय अंतर (Income Distance)

42.5%

जनसंख्या (2011)

17.5%

जनसांख्यिकीय प्रदर्शन

10%

क्षेत्रफल

10%

वन क्षेत्र

10%

सकल घरेलू उत्पाद में योगदान

10%

कर एवं राजकोषीय प्रयास

समाप्त

शहरी स्थानीय निकायों को ऐतिहासिक बढ़ावा

  • 16वें वित्त आयोग ने शहरी निकायों के लिए अनुदान का हिस्सा बढ़ाकर 45% कर दिया है।

तुलना देखें:

वित्त आयोग

शहरी स्थानीय निकायों के लिए अनुदान (%)

13वां वित्त आयोग

26%

15वां वित्त आयोग

36%

16वां वित्त आयोग

45%

कुल आवंटन:

  • ₹3.56 लाख करोड़ शहरी स्थानीय निकायों के लिए अनुशंसित
  • 15वें आयोग की तुलना में दोगुने से अधिक
  • यह राशि शहरों में आधारभूत संरचना, डिजिटल प्रशासन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होगी।

राज्यों में असमान वितरण क्यों?

  • आवंटन जनसंख्या आधारित फॉर्मूले पर निर्भर करता है, इसलिए परिणाम राज्यों में अलग-अलग रहे:
  • केरल: 400% से अधिक वृद्धि
  • महाराष्ट्र: 300% से अधिक वृद्धि
  • ओडिशा: 13% वृद्धि
  • बिहार: 8% कमी
  • यह अंतर शहरीकरण दर, आर्थिक योगदान और जनसंख्या प्रवृत्तियों पर आधारित है।

बढ़ते शहरीकरण की चुनौती

  • 2011 की जनगणना के अनुसार 31% भारतीय शहरी क्षेत्रों में रहते हैं।
  • हालांकि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह आंकड़ा अधिक बताया गया है, जिससे नीति निर्माण में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

असंगत आंकड़े:

  • संसाधन आवंटन को प्रभावित करते हैं
  • शहरी निकायों की दीर्घकालिक योजना को कमजोर करते हैं
  • इसलिए 16वें वित्त आयोग का बढ़ा हुआ वित्तीय प्रावधान भविष्य के लिए “सुरक्षा कवच” की तरह देखा जा रहा है।

वित्तीय सुरक्षा कवच क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यदि आगामी जनगणना में शहरीकरण दर 48% तक पहुंचती है, तो पहले की तुलना में अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने से शहरी सरकारें आर्थिक रूप से असुरक्षित नहीं रहेंगी।
  • यह कदम भारत के विकास मॉडल को ग्रामीण-केन्द्रित से शहरी-संतुलित दिशा में ले जाने का संकेत देता है।

निष्कर्ष

16वें वित्त आयोग की सिफारिशें केवल कर बंटवारे का तकनीकी दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि यह भारत के भविष्य के शहरी ढांचे की नींव मजबूत करने का प्रयास है। हालांकि राज्यों के बीच असमानता और डेटा संबंधी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, फिर भी यह रिपोर्ट शहरी शासन सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X