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अवॉइडेंट/रिस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर कारण एवं उत्पत्ति के कारक, आयु समूह एवं प्रसार, शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव और निदान

  • अवॉइडेंट/रिस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर (ARFID) एक गंभीर और चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्राप्त खान-पान विकार है, जिसमें व्यक्ति भोजन की मात्रा और प्रकार को इस हद तक सीमित कर देता है कि उसके शारीरिक स्वास्थ्य और विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है। 
  • यह केवल साधारण “चुनिंदा खाने” की आदत नहीं है, बल्कि एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति भोजन से संबंधित भय, संवेदनशीलता या अरुचि के कारण पर्याप्त पोषण नहीं ले पाता।

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अन्य खाने के विकारों से अंतर

  • अवॉइडेंट/रिस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर (ARFID) को अन्य प्रमुख खाने के विकारों जैसे Anorexia Nervosa और Bulimia Nervosa से अलग समझना आवश्यक है।
  • इन विकारों में व्यक्ति का ध्यान शरीर की छवि, मोटापे का भय या वजन घटाने की तीव्र इच्छा पर केंद्रित होता है, जबकि ARFID में ऐसा नहीं होता। 
  • अवॉइडेंट/रिस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर (ARFID) से पीड़ित व्यक्ति भोजन इसलिए नहीं टालता क्योंकि वह पतला दिखना चाहता है, बल्कि इसलिए क्योंकि उसे भोजन की बनावट, गंध, रंग, स्वाद या खाने के दौरान घुटन/उल्टी का डर होता है।

कारण एवं उत्पत्ति के कारक

  • अवॉइडेंट/रिस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर (ARFID)  के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और जैविक कारण हो सकते हैं। 
  • कुछ व्यक्तियों में भोजन की बनावट (जैसे कुरकुरा, चिपचिपा या मुलायम) के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता होती है। 
  • कुछ लोग केवल विशेष रंगों या सीमित प्रकार के खाद्य पदार्थों को ही स्वीकार करते हैं। 
  • कई मामलों में पहले कभी भोजन के दौरान घुटन या उल्टी का अनुभव हुआ हो, तो उसके कारण स्थायी भय विकसित हो सकता है। 
  • इसके अतिरिक्त, भूख का संकेत कम महसूस होना भी एक कारण हो सकता है। 
  • शोध से यह भी संकेत मिलता है कि आनुवंशिक प्रवृत्ति की भूमिका हो सकती है, क्योंकि यह विकार कभी-कभी परिवारों में देखा जाता है।

आयु समूह एवं प्रसार

  • यह विकार सामान्यतः शैशवावस्था या प्रारंभिक बचपन में विकसित होता है, किंतु यदि समय पर उपचार न मिले तो यह किशोरावस्था और वयस्कता तक बना रह सकता है। 
  • बच्चों में यह लड़कों में अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है। कई बार माता-पिता इसे सामान्य पिकी ईटिंग समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।

सह-रुग्ण स्थितियाँ (Comorbidities)

  • ARFID से पीड़ित व्यक्तियों में अन्य मानसिक या तंत्रिका-विकास संबंधी विकार भी साथ में पाए जा सकते हैं। 
  • इनमें चिंता विकार प्रमुख हैं। इसके अलावा ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से भी इसका संबंध देखा गया है। 
  • कुछ मामलों में बौद्धिक या विकासात्मक अक्षमताएँ भी सह-स्थित हो सकती हैं, जिससे भोजन संबंधी व्यवहार और अधिक जटिल हो जाता है।

शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव

  • ARFID का सबसे गंभीर प्रभाव यह है कि व्यक्ति पर्याप्त कैलोरी और पोषक तत्वों का सेवन नहीं कर पाता। बच्चों में इससे वजन बढ़ने में रुकावट, वजन में कमी तथा लंबाई की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। 
  • वयस्कों में कमजोरी, थकान, विटामिन एवं खनिज की कमी, हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। 
  • लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह स्थिति जीवन के लिए भी खतरा बन सकती है। 
  • साथ ही, सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों या सामाजिक आयोजनों में भोजन से बचने लगता है।

निदान

ARFID का निदान मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है। यदि व्यक्ति लगातार भोजन से बचता है, उसके कारण वजन या विकास प्रभावित होता है, पोषण की कमी उत्पन्न होती है, और यह समस्या किसी अन्य चिकित्सकीय कारण से नहीं समझाई जा सकती, तो ARFID का निदान किया जाता है।

उपचार एवं प्रबंधन

  • ARFID का मुख्य उपचार संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (Cognitive Behavioral Therapy – CBT) है, जिसमें व्यक्ति के भोजन से जुड़े भय और नकारात्मक विचारों को धीरे-धीरे बदलने का प्रयास किया जाता है।
  • इसके अंतर्गत क्रमिक रूप से नए खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल कराया जाता है। 
  • पोषण विशेषज्ञ की सहायता से संतुलित आहार योजना बनाई जाती है।
  • बच्चों में परिवार आधारित चिकित्सा विशेष रूप से प्रभावी होती है। यदि साथ में चिंता, ADHD या अन्य विकार मौजूद हों, तो उनका भी उपचार किया जाता है।
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