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खोनमोह के जीवाश्म 

चर्चा में क्यों 

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार उत्खनन गतिविधियों के कारण जम्मू एवं कश्मीर के खोनमोह में पाए जाने वाले जीवाश्म नष्ट हो रहे हैं।

प्रमुख बिंदु

  • वर्तमान में इस क्षेत्र के जीवाश्मों को सीमेंट कारखानों के कारण नुकसान हो रहा है।  इस क्षेत्र में कुल नौ सीमेंट कारखाने स्थापित हैं।
  • इस क्षेत्र के जीवाश्मों के संरक्षण हेतु पर्यावरण नीति समूह (Environment Planning Group: EPG) द्वारा जीवाश्म पार्क की स्थापना का प्रयास किया जा रहा है। 
  • विदित है कि वर्ष 2018 में अमेरिका में पेन डिक्सी फॉसिल पार्क और ई.पी.जी. के मध्य जीवाश्म पार्क की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया थे। इस समझौते के अनुसार पार्क में एक संग्रहालय होगा जहाँ जीवाश्मों का प्रदर्शन किया जायेगा। 

खोनमोह 

  • यह केंद्रशासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर में श्रीनगर ज़िले में ज़बरवान पहाड़ी के ढाल पर स्थित है। ज़बरवान पहाड़ी पीर पंजाल एवं महान हिमालयी शृंखला के मध्य एक उप-पर्वत शृंखला है।
  • हिमालयी भूविज्ञान केंद्र के अनुसार, ज़ीवान-खोनमोह बेल्ट (Zeewan-Khonmoh Belt) के जीवाश्म तब बने थे जब कश्मीर टेथिस सागर के नीचे डूबा हुआ था। 
  • मूँगे, छोटे अकशेरुकी, पौधे और सरीसृपों जैसे स्तनपायी, जिसे थेरेपिड्स के रूप में जाना जाता है, गुर्युल घाटी में पर्मियन-ट्राइसिक युग (Permian-Triassic Age) के दौरान प्रमुख रूप से उपलब्ध थे।
  • इस क्षेत्र में लाखों वर्ष पुराने समुद्री जीवन के जीवाश्म पाए गए हैं। ऐसा अनुमान है कि खोनमोह की गुर्युल घाटी में 252 मिलियन वर्ष पूर्व सबसे बड़ी सामूहिक विलुप्ति की घटना हुई थी, जिसे ‘ग्रेट डाइंग’ के रूप में भी जाना जाता है। इस घटना ने 70 से 90% तक वनस्पति और जीवों को विलुप्त कर दिया था। 
  • इस क्षेत्र के ट्राइसिक युग के जीवश्मों को पहली बार 1800 के दशक के अंत में भारतीय सिविल सेवक सर वाल्टर लॉरेंस द्वारा खोजा गया था।
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