New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

फर्जी कानून डिग्रियों और वकीलों के ऑनलाइन आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अदालतों में वकालत कर रहे कथित फर्जी कानून डिग्री धारकों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह मुद्दा दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) पदनाम से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।

फर्जी कानून डिग्रियों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

सूर्य कांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने टिप्पणी की कि “काले कोर्ट पहनने वाले हजारों लोग संदिग्ध हैं” और उनकी कानून की डिग्रियों की सत्यता पर गंभीर सवाल हैं।

सीजेआई ने कहा:“मुझे उनकी कानून की डिग्रियों की वास्तविकता पर गंभीर संदेह है।”

इन्होंने यह भी कहा कि वे उपयुक्त मामले की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि इस विषय पर विशेष रूप से दिल्ली के कुछ वकीलों से जुड़े मामलों में Central Bureau of Investigation (CBI) जांच का आदेश दिया जा सके।

वकीलों के सोशल मीडिया आचरण पर आपत्ति

  • सुप्रीम कोर्ट ने कुछ वकीलों द्वारा फेसबुक, यूट्यूब आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की जा रही गतिविधियों पर भी चिंता जताई।
  • सीजेआई ने कहा:-“वे फेसबुक, यूट्यूब आदि पर जो पोस्ट कर रहे हैं, क्या उन्हें लगता है कि हम नहीं देख रहे हैं?”
  • न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित अधिवक्ता संजय दुबे द्वारा कथित रूप से सोशल मीडिया पर प्रयुक्त भाषा पर भी आपत्ति जताई।
  • सीजेआई ने कहा:“लोगों को समझने दीजिए कि आप फेसबुक पर कैसी भाषा का उपयोग कर रहे हैं। मैं आपको दिखाऊँगा कि पेशे में अनुशासन क्या होता है।”

सक्रियता (Activism) और संस्थानों पर हमलों को लेकर टिप्पणी

  • सीजेआई ने उन बेरोजगार युवाओं की भी आलोचना की, जो उनके अनुसार पेशेवर करियर बनाने के बजाय सक्रियता और ऑनलाइन आलोचना की ओर बढ़ जाते हैं।
  • उन्होंने कहा कि कुछ लोग “मीडिया”, “सोशल मीडिया”, “आरटीआई कार्यकर्ता” या अन्य प्रकार के कार्यकर्ता बनकर संस्थाओं और व्यक्तियों को निशाना बनाते हैं।
  • उन्होंने टिप्पणी की:“समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं, और आप भी उनसे हाथ मिलाना चाहते हैं?”
  • बाद में स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणी कथित रूप से फर्जी डिग्रियों के आधार पर पेशे में प्रवेश करने वालों के संदर्भ में थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम पर बहस

  • न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi ने प्रश्न उठाया कि क्या वरिष्ठ अधिवक्ता का पदनाम अब न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के अवसर के बजाय प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता जा रहा है।
  • याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पदनाम से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया।
  • हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने इसे वापस ले लिया।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया अध्यक्ष का दावा: 35–40% अधिवक्ता फर्जी हो सकते हैं

  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने दावा किया कि लगभग 35–40% अधिवक्ताओं की डिग्रियाँ फर्जी हो सकती हैं
  • उन्होंने कहा :-“बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस बात से अवगत है कि अदालत परिसरों में काला कोट और बैंड पहनने वाले लगभग 35–40 प्रतिशत लोग फर्जी हैं।”

इनके अनुसार :-

  • कई लोगों ने कथित रूप से फर्जी डिग्रियाँ तैयार करवाईं या खरीदीं। 
  • इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वे अदालतों में वकालत कर रहे हैं। 
  • डिग्री सत्यापन प्रक्रिया के दौरान लगभग 40% अधिवक्ताओं ने सत्यापन प्रपत्र नहीं भरे, जिससे उन पर संदेह उत्पन्न हुआ। 

उन्होंने कहा कि इस तथ्य की जानकारी मुख्य न्यायाधीश को भी दी जा चुकी है।

“कॉकरोच” टिप्पणी पर स्पष्टीकरण

  • बीसीआई अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सीजेआई की “कॉकरोच” संबंधी टिप्पणी का आशय उन लोगों से था जो फर्जी डिग्रियों के आधार पर पेशे में प्रवेश कर रहे हैं।
  • उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी उन लोगों के संदर्भ में थी जो फर्जी डिग्रियाँ प्राप्त कर काला कोट और बैंड पहनकर अदालतों में उपस्थित होते हैं।

उभरते प्रमुख मुद्दे

  1. कानून डिग्रियों की प्रामाणिकताफर्जी डिग्रियों और न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्न। 
  2. सत्यापन तंत्र की आवश्यकता डिग्री सत्यापन और संभावित जांच की मांग। 
  3. पेशेवर नैतिकता वकीलों के सोशल मीडिया व्यवहार और अनुशासन पर बहस। 
  4. वरिष्ठ अधिवक्ता पदनाम प्रतिष्ठा बनाम न्याय व्यवस्था में योगदान का प्रश्न। 
  5. संस्थागत विश्वास – न्याय वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR