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भारत-साइप्रस द्विपक्षीय संबंध

संदर्भ  

  • भारत और साइप्रस के बीच हाल ही में हुए राजनयिक घटनाक्रमों ने दोनों देशों के संबंधों को एक नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है।   साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान रक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी) को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी।   

ऐतिहासिक और कूटनीतिक पृष्ठभूमि 

भारत और साइप्रस के बीच आपसी समझ और विश्वास की नींव काफी पुरानी और मजबूत रही है : 

  • राजनयिक शुरुआत : दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध वर्ष 1962 में स्थापित हुए थे, जो 1960 में साइप्रस को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से मिली आजादी के ठीक बाद की बात है। 
  • साझा मूल्य और मित्रता : दोनों ही राष्ट्रों ने औपनिवेशिक काल का दर्द झेला था और बाद में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के शुरुआती दौर में सक्रिय भूमिका निभाई। साइप्रस के पहले राष्ट्रपति, आर्कबिशप मकारियोस और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच गहरी व्यक्तिगत मित्रता ने इन संबंधों को और प्रगाढ़ किया। 
  • क्षेत्रीय संप्रभुता का समर्थन : भारत ने हमेशा साइप्रस की एकता और अखंडता का पक्ष लिया है। विशेष रूप से 1974 में उत्तरी साइप्रस पर तुर्की के सैन्य आक्रमण के बाद पैदा हुए विवाद में भारत ने खुलकर साइप्रस का साथ दिया। 

रणनीतिक और कूटनीतिक सहयोग 

वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुले हैं :

  • यूरोपीय संघ (EU) में प्रवेश : वर्ष 2004 से यूरोपीय संघ का हिस्सा होने के कारण साइप्रस, भारत के लिए इस पूरे महाद्वीप में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक पहुँच बनाने का एक बहुत मजबूत माध्यम साबित हो रहा है।  
  • वैश्विक मंचों पर सहयोग : संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देश एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का हमेशा पुरजोर समर्थन किया है। 

आर्थिक साझेदारी और भारतीय प्रवासी 

  • व्यापार का दायरा : वित्तीय वर्ष 2024-25 (अप्रैल से मार्च) के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 140.47 मिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।  
  • विदेशी निवेश का जरिया : भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में साइप्रस शीर्ष 10 देशों की सूची में शामिल है। वैश्विक स्तर के निवेशक भारतीय बाजारों में पूँजी लगाने के लिए साइप्रस के मार्ग का काफी उपयोग करते हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से साइप्रस की यह भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है। 
  • भारतीय समुदाय : अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, साइप्रस में लगभग 15,500 भारतीय नागरिक रह रहे हैं। यह प्रवासी समुदाय मुख्य रूप से मर्चेंट नेवी (शिपिंग), आईटी, वित्तीय तकनीक (फिनटेक), कृषि, शिक्षा और घरेलू कामगारों के रूप में साइप्रस की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है।   

राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की यात्रा के मुख्य आकर्षण 

साइप्रस की वर्तमान यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता के बीच हुई यह यात्रा कई मायनों में गेम-चेंजर साबित हुई है। इसके प्रमुख परिणाम निम्नलिखित क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं: 

रक्षा और सुरक्षा रोडमैप 

  • औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साइप्रस डिफेंस एंड स्पेस इंडस्ट्रीज क्लस्टर और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। 
  • साइप्रस ने भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र से आधुनिक उपकरण खरीदने की इच्छा जताई है, जिससे भारत के रक्षा निर्यात को नया बाजार मिलेगा। 
  • दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और आदान-प्रदान बढ़ाने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और नई तकनीकों के लिए एक साइबर सुरक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति बनी। 

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख

  • दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति को दोहराया और सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। 
  • इस खतरे से निपटने के लिए आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) के गठन हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 

निवेश और कनेक्टिविटी 

  • अगले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच होने वाले आपसी निवेश को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
  • भारतीय कंपनियों के लिए साइप्रस के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर), ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में निवेश की नई राहें खुली हैं।
  • दोनों देशों के बीच सीधे व्यापार और लोगों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए जल्द ही सीधी हवाई उड़ानें शुरू की जाएंगी। 

आईएमईईसी (IMEEC) परियोजना में साइप्रस की भूमिका 

भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC) इस कूटनीतिक वार्ता का सबसे मुख्य केंद्र बिंदु रहा :

  • फ्रेंड्स ऑफ आईएमईईसी : साइप्रस ने यूरोपीय संघ के भीतर इस परियोजना को गति देने के लिए फ्रेंड्स ऑफ आईएमईईसी नामक समूह का गठन किया है।  
  • वैश्विक संकटों (जैसे अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव) के कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को देखते हुए, साइप्रस ने अपने बंदरगाहों के माध्यम से ट्रांसशिपमेंट (माल के हस्तांतरण) की सुविधाएं देने का प्रस्ताव रखा है। 
  • दोनों देशों ने इस दिशा में एक द्विपक्षीय कनेक्टिविटी संवाद स्थापित करने पर भी चर्चा की, ताकि पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में स्थिरता और व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके।
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