हाल ही में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत Office of the Registrar General of India (ORGI) द्वारा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 जारी की गई। यह रिपोर्ट भारत के जन्म, मृत्यु, प्रजनन दर तथा अन्य जनसांख्यिकीय संकेतकों का वार्षिक आकलन प्रस्तुत करती है और इसे विश्व के सबसे बड़े जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों में से एक माना जाता है।
प्रजनन (Fertility) से संबंधित रुझान
- भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) वर्ष 2024 में 1.9 पर स्थिर रही, जो लगातार पाँचवें वर्ष प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level Fertility) से नीचे बनी हुई है। प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन दर वह स्थिति होती है जिसमें जनसंख्या का आकार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थिर बना रहता है और इसे सामान्यतः प्रति महिला 2.1 जन्म माना जाता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कुल प्रजनन दर 2.1 पर स्थिर रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 1.5 रही। उल्लेखनीय है कि शहरी क्षेत्रों में प्रजनन दर वर्ष 2005 के बाद से लगातार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे बनी हुई है।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सकल जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR) वर्ष 2023 के 18.4 प्रति हजार जनसंख्या से घटकर वर्ष 2024 में 18.3 प्रति हजार जनसंख्या हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म दर 20.3 से घटकर 20.2 तथा शहरी क्षेत्रों में 14.9 से घटकर 14.7 दर्ज की गई।
मृत्यु (Mortality) से संबंधित रुझान
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सकल मृत्यु दर (Crude Death Rate – CDR) वर्ष 2024 में 6.4 प्रति हजार जनसंख्या पर स्थिर रही। हालांकि यह दर कोविड-पूर्व स्तर से अभी भी अधिक बनी हुई है। वर्ष 2019 और 2020 में यह दर 6 प्रति हजार थी, जबकि कोविड-19 महामारी के चरम वर्ष 2021 में यह बढ़कर 7.5 प्रति हजार हो गई थी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर 6.8 पर स्थिर रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.7 से घटकर 5.6 हो गई।
- शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate – IMR) वर्ष 2023 के 25 प्रति हजार जीवित जन्म से घटकर वर्ष 2024 में 24 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई। पिछले पाँच वर्षों में इसमें 6 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। केरल में देश की सबसे कम शिशु मृत्यु दर 8 प्रति हजार जीवित जन्म दर्ज की गई।
- शिशु मृत्यु दर से तात्पर्य किसी विशिष्ट अवधि में जन्मे बच्चों के एक वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मृत्यु की संभावना से है और इसे प्रति 1000 जीवित जन्म के आधार पर व्यक्त किया जाता है।
- इसी प्रकार, पाँच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (Under-Five Mortality Rate – U5MR) वर्ष 2024 में 28 प्रति हजार जीवित जन्म रही। यह किसी बच्चे के पाँच वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मृत्यु की संभावना को दर्शाती है।
जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार
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रिपोर्ट के अनुसार, जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth – SRB) में हल्का सुधार देखा गया है। वर्ष 2022–24 की अवधि में यह बढ़कर 918 लड़कियाँ प्रति 1000 लड़के हो गया, जबकि इससे पूर्व अवधि (2021–23) में यह इससे एक अंक कम था।
मृत्यु के कारणों से जुड़ी प्रमुख चिंताएँ
- रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मोटर वाहन दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का अनुपात बढ़कर 2.9 प्रतिशत से 3.2 प्रतिशत हो गया है। वहीं आत्महत्या से होने वाली मौतों का अनुपात 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 2.8 प्रतिशत हो गया।
- इसके अतिरिक्त, गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) से होने वाली मौतों का अनुपात 56.7 प्रतिशत से बढ़कर 60.1 प्रतिशत हो गया है। इनमें हृदय एवं रक्तवाहिका रोग (Cardiovascular Diseases) मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं और इनसे होने वाली मौतों का हिस्सा 31 प्रतिशत से बढ़कर 32.1 प्रतिशत हो गया।
- हालाँकि श्वसन संक्रमणों से होने वाली मौतों का अनुपात घटकर 5.7 प्रतिशत (2022–24) हो गया है, फिर भी यह महामारी-पूर्व स्तर से अधिक बना हुआ है। वर्ष 2017–19 में यह अनुपात 3.6 प्रतिशत था।
निष्कर्ष
- SRS Statistical Report 2024 भारत में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) को दर्शाती है।
- रिपोर्ट बताती है कि देश में प्रजनन दर लगातार घट रही है और जनसंख्या वृद्धि धीमी हो रही है, जबकि मृत्यु दर अभी भी कोविड-पूर्व स्तर तक नहीं लौट सकी है। साथ ही, गैर-संचारी रोगों, सड़क दुर्घटनाओं और आत्महत्या से होने वाली बढ़ती मौतें भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रही हैं।