प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रातिस्लावा यात्रा भारत-स्लोवाकिया संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई है। वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्लोवाकिया के गठन के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। इस अवसर पर दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी (Comprehensive Partnership) के स्तर तक उन्नत करने का निर्णय लिया, जो आपसी विश्वास, साझा हितों और दीर्घकालिक सहयोग की नई दिशा को दर्शाता है।
स्लोवाकिया में भारतीय समुदाय अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। लगभग 5,000 से 7,000 भारतीय वहाँ निवास करते हैं और सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, शिक्षा तथा व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत–स्लोवाकिया संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक ले जाना रही। यह निर्णय दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, साझा प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक सहयोग की आकांक्षा को प्रतिबिंबित करता है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत आधार मिलेगा।
यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन पर बल दिया। यह पहल रणनीतिक विश्वास को और मजबूत करेगी तथा रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगी।
दोनों देशों ने ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश और व्यापार बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही स्लोवाकिया ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र कार्यान्वयन का समर्थन किया।
डिजिटल प्रौद्योगिकी पर हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में इंडिया चेयर की स्थापना तथा अंतरिक्ष एवं नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएँ भी इस साझेदारी को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेंगी।
श्रम प्रवासन संबंधी समझौता भारतीय कामगारों के लिए नए अवसर खोलेगा और स्लोवाकिया की श्रम आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करेगा। इसके अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा समझौते की दिशा में हुई प्रगति प्रवासी श्रमिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगी।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर बल दिया। आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह के गठन तथा संयुक्त राष्ट्र में व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद सम्मेलन (CCIT) को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। दोनों देशों ने आतंकवाद के प्रति दोहरे मानदंडों का भी विरोध किया।
भारत और स्लोवाकिया ने बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। स्लोवाकिया ने एक बार फिर भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन दोहराया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है। व्यापक साझेदारी की स्थापना से रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, श्रम, आतंकवाद-रोधी सहयोग और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ और अधिक मजबूत हुई हैं। यह विकास न केवल भारत-स्लोवाकिया संबंधों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भारत और यूरोप के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को भी नई गति प्रदान करेगा।
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