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झारखंड के चार पारंपरिक उत्पादों को जीआई (GI) टैग

संदर्भ  

  • हाल ही में झारखंड के चार पारंपरिक उत्पाद- भागैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा आभूषण और बांस शिल्प को भौगोलिक संकेत (Geographical Indication - GI) टैग प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि राज्य की पारंपरिक कला और कारीगर समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  

जीआई (GI) टैग क्या है ? 

  • भौगोलिक संकेत (GI) टैग एक आधिकारिक बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) चिन्ह है, जो उन उत्पादों को दिया जाता है जिनका संबंध किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से होता है। 
  • इन उत्पादों की गुणवत्ता, विशेषताएँ या प्रतिष्ठा उस स्थान की भौगोलिक पहचान से जुड़ी होती हैं। 
  • भारत में जीआई टैग का पंजीकरण वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत किया जाता है।  

जीआई टैग की प्रमुख विशेषताएँ:

  • नकल पर कानूनी रोक : यह टैग संबंधित उत्पाद के नाम और पहचान की अनधिकृत नकल, दुरुपयोग या फर्जी उत्पादन को रोकता है, विशेषकर निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के बाहर।
  • गुणवत्ता और प्रामाणिकता का आश्वासन : यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद पारंपरिक विधियों से निर्मित है और उसकी मूल पहचान एवं गुणवत्ता बनी रहे। 
  • आजीविका और समुदाय का सशक्तिकरण : इससे स्थानीय कारीगरों एवं उत्पादकों की आय में वृद्धि होती है तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार में पहचान मिलती है। 
  • वैश्विक ब्रांडिंग और निर्यात में वृद्धि : यह ग्रामीण पर्यटन, निर्यात अवसरों और अंतरराष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देता है, साथ ही सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी सहायक होता है। 

झारखंड के जीआई टैग प्राप्त प्रमुख उत्पाद

1. भागैया सिल्क और कुचाई सिल्क

  • ये झारखंड की पारंपरिक रेशमी वस्त्र शैलियाँ हैं, जिनमें प्राकृतिक सुनहरी आभा और टिकाऊपन पाया जाता है।  
  • इन्हें मुख्यतः वन्य टसर रेशम से तैयार किया जाता है तथा पारंपरिक हाथ से धागा निकालने की तकनीक का उपयोग किया जाता है। 

2. मुंडा आभूषण

  • ये मुंडा जनजाति के पारंपरिक हस्तनिर्मित आभूषण हैं, जिनमें ज्यामितीय आकृतियों और प्रकृति-प्रेरित डिजाइनों का समावेश होता है। 
  • इनका सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व भी होता है।

3. झारखंड बांस शिल्प 

  • यह स्थानीय बांस से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प है, जिसमें टोकरियाँ, चटाई, उपयोगी वस्तुएँ और सजावटी सामग्री शामिल होती हैं। 
  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। 
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