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लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC):- भूमिका, महत्त्व एवं हालिया घटनाक्रम

हाल ही में पुनर्गठित लोक लेखा समिति (PAC) 2026-27 की पहली बैठक समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में समिति द्वारा कुछ विषयों को स्वप्रेरणा (Suo Motu) से परीक्षण हेतु लेने को लेकर मतभेद सामने आए।

लोक लेखा समिति (PAC) के बारे में

  • लोक लेखा समिति भारत की सबसे पुरानी संसदीय समिति है, जिसकी स्थापना वर्ष 1921 में की गई थी। 
  • इसका गठन प्रतिवर्ष किया जाता है। 
  • समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लोकसभा के सदस्यों में से की जाती है। 
  • वर्ष 1967-68 में पहली बार लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के एक सदस्य को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। 
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारत सरकार की आय एवं व्यय का परीक्षण करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग कानूनी, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से किया जाए। 

लोक लेखा समिति (PAC) के कार्य

  • यह समिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की सरकारी व्यय से संबंधित लेखा-परीक्षण रिपोर्टों की जांच करती है। 
  • यह सुनिश्चित करती है कि संसद द्वारा स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप किया गया है। 
  • यह सरकारी व्यय में वित्तीय अनियमितताओं, राजकोषीय हानि, प्रक्रियागत उल्लंघनों तथा व्यय में अक्षमता की जांच करती है। 

समिति की संरचना

  • लोक लेखा समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं, जिनमें से 15 सदस्य लोकसभा तथा 7 सदस्य राज्यसभा से लिए जाते हैं। 
  • समिति का अध्यक्ष लोकसभा का सदस्य होता है और परंपरागत रूप से यह पद विपक्ष के सदस्य को दिया जाता है। 
  • समिति के सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। 
  • कोई भी मंत्री लोक लेखा समिति का सदस्य नहीं बन सकता। 

पुनर्गठित PAC की बैठक एवं हालिया विवाद

हाल ही में पुनर्गठित लोक लेखा समिति (PAC) 2026-27 की बैठक आयोजित हुई, जिसमें समिति द्वारा कुछ विषयों को स्वप्रेरणा (Suo Motu) से परीक्षण हेतु लेने पर मतभेद सामने आए।

  • समिति द्वारा विचारार्थ लिए गए विषयों में बैंकिंग, बीमा तथा ऊर्जा क्षेत्रों में नीतिगत सुधार शामिल थे। 
  • भाजपा सांसद ने समिति द्वारा इन विषयों को स्वयं परीक्षण हेतु लेने पर आपत्ति जताई। 
  • हालांकि समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने पूर्व उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व में मुरली मनोहर जोशी के कार्यकाल के दौरान भी समिति ने स्वप्रेरणा से विषयों को विचारार्थ लिया था। 
  • समिति अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किस विषय को परीक्षण हेतु लेना है, यह समिति का विशेषाधिकार (Prerogative) है। 
  • लोक लेखा समिति संसद की वह महत्वपूर्ण समिति है जो नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की जांच करती है तथा उसके आधार पर अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष प्रस्तुत करती है।
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