संदर्भ
हाल हुई में केंद्र सरकार ने अठारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध मामलों में ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की प्रणाली शुरूआत की है। गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने बताया कि ई-जीरो एफआईआर के तहत 12 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के बारे में
- ई-जीरो एफआईआर प्रणाली एक प्रौद्योगिकी-आधारित डिजिटल व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य बड़े मूल्य के साइबर वित्तीय अपराधों में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है।
- इस व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित शर्तें पूरी होने पर शिकायत स्वतः जीरो एफआईआर (Zero FIR) के रूप में दर्ज हो जाती है, जिससे त्वरित कानूनी कार्रवाई संभव हो सके।
प्रमुख विशेषताएँ:
- यदि किसी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में ₹10 लाख या उससे अधिक की राशि का नुकसान हुआ है और शिकायत 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज की जाती है, तो वह स्वतः जीरो एफआईआर में परिवर्तित हो जाती है।
- इस प्रणाली का उद्देश्य शिकायत दर्ज करने में होने वाली देरी को कम करना तथा समय रहते जांच प्रक्रिया प्रारंभ करना है।
कानूनी आधार:
- ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita–BNSS), 2023 की धारा 173 के अंतर्गत वैधानिक आधार प्राप्त है।
क्रियान्वयन एजेंसी:
- इस पहल का संचालन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre–I4C) द्वारा किया जा रहा है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
प्रणाली की कार्यप्रणाली:
- निर्धारित सीमा से अधिक वित्तीय नुकसान वाली साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होते ही संबंधित ई-क्राइम पुलिस स्टेशन में स्वतः जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है।
- इसके बाद शिकायतकर्ता के क्षेत्राधिकार के अनुसार यह जीरो एफआईआर संबंधित साइबर अपराध पुलिस स्टेशन को डिजिटल माध्यम से भेज दी जाती है।
- शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन जाकर आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करनी होती हैं, जिसके बाद जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया जाता है।
डिजिटल एकीकरण:
- ई-जीरो एफआईआर प्रणाली विभिन्न राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों के समन्वय पर आधारित है। इनमें प्रमुख हैं -
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) – भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित।
- क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) – राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा संचालित।
- इन दोनों प्रणालियों के एकीकरण से शिकायतों का रियल-टाइम प्रसंस्करण (Real-time Processing), स्वतः संबंधित पुलिस स्टेशन को प्रेषण (Auto-routing) तथा पूरे देश में साइबर अपराध मामलों के प्रभावी समन्वय (Nationwide Interoperability) को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
महत्त्व:
- ई-जीरो एफआईआर प्रणाली साइबर वित्तीय अपराधों में त्वरित कार्रवाई, डिजिटल समन्वय, पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी साइबर अपराध प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
- इससे शिकायत दर्ज करने में देरी कम होगी, जांच की गति बढ़ेगी और साइबर अपराधों से प्रभावित लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने में सहायता मिलेगी।