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Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026 Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026

तरलता कवरेज अनुपात

प्रारंभिक परीक्षा

(भारतीय अर्थव्यवस्था)

मुख्य परीक्षा

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना से संबंधित विषय)

संदर्भ 

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तरलता कवरेज अनुपात (Liquidity Coverage Ratio : LCR) के प्रबंधन पर नए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। 

तरलता कवरेज अनुपात (LCR) के बारे में 

  • LCR के तहत बैंकों को 30 दिनों में संभावित निकासी मांगों को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली अत्यधिक तरलीकृत संपत्तियों का बफर बनाए रखने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, अल्पकालिक सरकारी ऋण। 
  • LCR का उद्देश्य बाजार-व्यापी आघातों का पूर्वानुमान लगाना तथा यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय संस्थाएं उनसे निपटने में सक्षम हों। यह वित्तीय संकट के दौरान बैंकों को बचाने में सहायक एवं महत्वपूर्ण है। 
  • LCR को वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बेसल ।।। सुधारों के भाग के रूप में प्रस्तुत किया गया तथा जनवरी 2013 में बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति ने इसे अंतिम रूप दिया।

नए मसौदा दिशानिर्देशों से संबंधित प्रमुख बिंदु 

  • वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही में LCR 130% था। नए मानदंड लागू होने पर यह घटकर 113% से 116% हो जाएगा। 
  • बैंकों को इंटरनेट एवं मोबाइल बैंकिंग सुविधाओं वाले ग्राहकों के खुदरा जमा पर अतिरिक्त 5% रन-ऑफ फैक्टर आवंटित करना आवश्यक होगा।
  • यह बदलाव स्थिर जमा (Stable Deposits) के लिए रन-ऑफ फैक्टर को 10% और कम स्थिर जमा के लिए 15% तक वृद्धि करता है।
    • रन-ऑफ़ तब होता है जब व्यक्ति या व्यवसाय अप्रत्याशित रूप से अपनी जमा राशि निकाल लेते हैं।
  • नए प्रस्तावों के अनुसार, गैर-वित्तीय लघु व्यवसाय ग्राहकों से असुरक्षित थोक वित्तपोषण को खुदरा जमा के रूप में माना जाना चाहिए।

नए मसौदा दिशानिर्देशों का लागू होना 

  • इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य तरलता मानकों पर बेसल III फ्रेमवर्क को कठोर करना है। यह मसौदा 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होने की संभावना है।
  • इस प्रस्तावित मानदंड में भुगतान बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों एवं स्थानीय क्षेत्र के बैंकों को इसकी सीमा से बाहर रखा गया है।  

नए दिशानिर्देशों का प्रभाव 

  • नए मानदंडों से ऋण के वृद्धि में अल्पकालिक मंदी एवं शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) में कमी हो सकती है।
  • इससे बैंकों को जमा में होने वाली कमी की भरपाई के लिए और अधिक धन जुटाना होगा। 
    • हालांकि, दीर्घावधि में इन मानदंडों से बैंकों की लचीलापन बढ़ने की संभावना है।
  • ये बदलाव बैंकों के LCR को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेंगे और अनुमानत: 11 से 18% अंकों की संभावित कमी हो सकती है। इससे बैंकों की आय पर 4 से 11% तक प्रभाव पड़ सकता है। 
  • इसका प्रभाव निजी क्षेत्र के बैंकों पर अधिक पड़ने की संभावना है क्योंकि उन्हें नुकसान की भरपाई के लिए व्यावसायिक रणनीतियों में बदलाव करना होगा
  • आर.बी.आई. का नया नियम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब मार्च में बैंकों का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट अनुपात पांच वर्ष के उच्चतम 78% पर था। 
    • क्रेडिट-टू-डिपॉजिट अनुपात यह मापता है कि बैंक की कितनी जमा राशि ऋण के रूप में वितरित की गई है।
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