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महिला सुरक्षा के लिए ओडिशा सरकार के नए दिशा-निर्देश

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।) 

ओडिशा सरकार ने वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में रात्रि पाली (शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

मुख्य दिशानिर्देश

स्वैच्छिक सहमति 

नियोक्ता को रात्रि पाली में काम करने की इच्छुक महिला कर्मचारियों से लिखित सहमति लेनी होगी।

सुरक्षा उपाय

  • महिला कर्मचारियों को उनके आवास पर या उनके आस-पास लाने और छोड़ने के लिए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम वाली पर्याप्त परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध करानी होंगी। 
    • प्रतिष्ठान को रात्रि परिवहन वाहन के प्रत्येक चालक का बायोडाटा और पुलिस सत्यापन प्राप्त करना होगा, चाहे वह सीधे तौर पर कार्यरत हो या सेवा प्रदाता के माध्यम से।
    • आवागमन के दौरान अनुरक्षक/सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • परिसर में सी.सी.टी.वी. निगरानी और उचित प्रकाश व्यवस्था होनी चाहिए।
  • रात की पाली में किशोरियों को काम पर रखने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  • राज्य सरकार ने सभी प्रतिष्ठानों/संस्था के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य कर दिया है।

कार्यस्थल कल्याण

  • नियोक्ता को रात्रि पाली के दौरान अलग शौचालय की सुविधा, पर्याप्त विश्राम और चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करनी होगी।
  • प्रतिष्ठान में शिकायत निवारण प्रणाली की भी स्थापना की जनि चाहिए।
  • रात्रि पाली में काम करने वाली महिलाओं के वेतन या पदोन्नति में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

रिपोर्टिंग दायित्व

प्रतिष्ठानों को रात्रि पाली में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के बारे में श्रम आयुक्त को सूचित करना होगा और समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

दंड का प्रावधान 

दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर ओडिशा दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1956 की धारा 35 के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

मह्त्त्व

  • विकल्प के माध्यम से सशक्तीकरण : औपचारिक अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देते हुए उनकी  स्वतंत्रता और स्वायत्तता की रक्षा करता है।
  • सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ : व्यावसायिक सुरक्षा के सिद्धांतों के अनुरूप, विशेष रूप से आईटी, बीपीओ, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में।
  • श्रम कानून अनुपालन: संविधान के अनुच्छेद 42 (कार्य की न्यायसंगत और मानवीय परिस्थितियाँ) और अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान) के प्रवर्तन को दर्शाता है।
  • अन्य राज्यों के लिए मिसाल: प्रगतिशील श्रम प्रशासन के लिए एक उदाहरण स्थापित करता है और अन्य राज्यों को प्रभावित कर सकता है।
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