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महादाई नदी जल विवाद

(प्रारंभिक परीक्षा : भारत का प्राकृतिक भूगोल)

चर्चा में क्यों 

हाल ही में, कर्नाटक में महादाई नदी पर निर्मित कालसा-बंदूरी नाला परियोजना को केंद्र सरकार से मंज़ूरी मिल गई है, जिस पर गोवा सरकार ने आपत्ति दर्ज की है।  

प्रमुख बिंदु

  • इस परियोजना का उद्देश्य कर्नाटक के बेलगावी, धारवाड़, बागलकोट और गडग ज़िलों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना है। 
  • इस परियोजना पर गोवा के विरोध का मुख्य कारण इसकी आबादी का नदी के प्राकृतिक मार्ग पर निर्भर होना है। नदी के मार्ग को मोड़े जाने से संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के प्रभावित होने की भी संभावना है। 
  • गोवा के अनुसार नदी में खारे जल के प्रवेश से राज्य के मैंग्रोव और हरित क्षेत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, जिससे पारिस्थितिक संतुलन भी बिगड़ सकता है।

कालसा-बंदूरी नाला परियोजना 

  • इस परियोजना से नदी के जल को कृष्णा की एक सहायक नदी मालप्रभा के बेसिन में प्रवाहित किया जाएगा। 
  • इसके तहत महादाई की सहायक नदियों- कालसा और बंदूरी पर बैराज बनाए जाने हैं ताकि नदी के जल को कर्नाटक के सूखा प्रभावित ज़िलों की ओर मोड़ा जा सकें। 
  • इस परियोजना को पहली बार 1980 के दशक की शुरुआत में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के बीच विवाद के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका था। 

kalsa-banduri-nala-project

महादाई जल विवाद अधिकरण

  • इस नदी के जल बंटवारे पर बढ़ते विवाद को देखते हुए वर्ष 2010 में महादाई जल विवाद अधिकरण का गठन किया गया। 
  • अधिकरण ने वर्ष 2018 में महादाई नदी बेसिन से कर्नाटक को 13.42 टी.एम.सी. फीट (Thousand Million Cubic Feet), महाराष्ट्र को 1.33 टी.एम.सी. फीट और गोवा को 24 टी.एम.सी. फीट जल प्रदान किया था।  

महादाई नदी  

  • इसे मांडवी नदी के नाम से भी जाना जाता है। यह नदी कर्नाटक के बेलगावी ज़िले में भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य से निकलती है और गोवा में बहते हुए अरब सागर में मिल जाती है।   
  • पश्चिमी घाट की यह नदी 111 किलोमीटर तक प्रवाहित होती है जिसका दो-तिहाई से अधिक हिस्सा गोवा में है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,032 वर्ग किलोमीटर है।
  • यह नदी गोवा में मीठे जल का एक प्रमुख स्रोत है क्योंकि गोवा की 11 प्रमुख नदियों में से अधिकांश में खारा जल पाया जाता है। 

भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य

  • इस अभयारण्य की बारीपदा गुफाओं (Baripada Caves) में संकटग्रस्त और स्थानिक चमगादड़ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें रॉटन फ्री-टेल्ड बैट (Wroughton's Free-Tailed Bat) प्रमुख हैं। भारत में यह एकमात्र अभयारण्य है जहाँ चमगादड़ की यह प्रजाति पाई जाती है।
  • इस अभयारण्य में थोबाल्ड टॉम्ब बैट (Theobald's Tomb Bat) नामक चमगादड़ की प्रजाति पाई जाती है, जो पश्चिम बंगाल में भी मिलती है।
  • यहाँ वायनाड लाफिंगथ्रश (Wayanad Laughingthrush), द ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल (The Great Indian Hornbill), नीलगिरी वुड पिजन (Nilgiri Wood Pigeon) और व्हाइट-बेल्ड ब्लू फ्लाईकैचर (White-Bellied Blue Flycatcher) जैसी अन्य स्थानिक एवं संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियां भी मिलती हैं।
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