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मलई पंडारम जनजाति

चर्चा में क्यों 

हालिया एक अध्ययन से पता चला है कि मलईपंडारम के बीच पारंपरिक ज्ञान का ह्रास हो रहा है, जिससे उनकी सांस्कृतिक धरोहर और प्रथाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है।

मलई पंडारम जनजाति के बारे में 

  • परिचय : यह केरल की एक अनुसूचित जनजाति है। यह जनजाति अपनी पारंपरिक अर्ध-खानाबदोश जीवनशैली के लिए जानी जाती है, जिसमें शिकार व संग्रहण शामिल हैं।
  • निवास क्षेत्र :  मलई पंडारम (Malai Pandaram) जनजाति मुख्यत: केरल राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में, विशेष रूप से कोल्लम व पट्टनमथिट्टा जिलों के सबरीमाला पहाड़ी जंगलों में निवास करती है। यह पश्चिमी घाट का हिस्सा है। 
    • ये प्रवास के कारण पलक्कड़ और अचेनकोविल व पम्पा नदी घाटियों जैसे अन्य क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं। ये तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी पाए जाते हैं। 
    • इनको हिल पंडारम, माला पंडारम या मलाई पंडारम भी कहते हैं। 
  • आजीविका : मलई पंडारम जनजाति का जीवन जंगलों पर निर्भर है। वे शिकार, वन्य फल व बहुत छोटे पैमाने पर कृषि करते हैं। वे मुख्य रूप से पोन्नमपोवु, बिलिम्बी, लोबान, अदरक, जंगली काली मिर्च, इलायची एवं शहद बेचते हैं।
  • भाषा : उनकी भाषा मलयालम एवं तमिल दोनों भाषाओं का मिश्रण है।

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