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आर्कटिक समुद्री बर्फ का पिघलना 

प्रारंभिक परीक्षा - आर्कटिक
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 - पर्यावरण प्रदूषण

संदर्भ 

  • हाल ही में, नेचर पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया कि आने वाले दशकों में आर्कटिक से समुद्री बर्फ समाप्त हो जायेगी।

ICE

अध्ययन के महत्वपूर्ण बिंदु 

  • अध्ययन के अनुसार, दुनिया वर्ष 2050 से पहले अपनी पहली 'समुद्री-बर्फ-मुक्त गर्मी' देखेगी।
  • वैश्विक उत्सर्जन के कारण वर्ष 2081-2100 तक आर्कटिक बर्फ से मुक्त हो जायेगा तथा वैश्विक तापमान में 4.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि हो जायेगी।
  • अध्ययन के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन को तेजी से कम करके या किसी भी तरह के अन्य प्रयास द्वारा भी आर्कटिक समुद्री बर्फ को बचाया नहीं जा सकता।
  • आर्कटिक के गर्म होने के दौरान समुद्री बर्फ के कम होने से ध्रुवीय जेट धाराएँ भी कमजोर हो जाती हैं।
    • ध्रुवीय जेट धाराओं के कमजोर होने को यूरोप में बढ़ते तापमान और गर्मी की लहरों के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम भारत में बेमौसम बारिश से भी जोड़ा गया है।

आर्कटिक समुद्री बर्फ क्यों महत्वपूर्ण है?

ARCTIC

  • आर्कटिक समुद्री बर्फ, वैश्विक जलवायु तथा समुद्र के तापमान में वृद्धि और गिरावट को प्रभावित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाती है।
  • समुद्री बर्फ हल्के रंग की होती है यह पानी की तुलना में अधिक मात्रा में सूर्य के प्रकाश को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित करती है, जिससे  ध्रुवीय क्षेत्रों को ठंडा रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • समुद्री बर्फ, ऊपर की ठंडी हवा और नीचे के अपेक्षाकृत गर्म पानी के बीच एक अवरोध बनाकर हवा को ठंडा रखती है। 
    • समुद्री बर्फ की मात्रा घटने के कारण सौर ऊर्जा का अधिक अवशोषण होने लगता है, जिससे समुद्र के गर्म होने से समुद्री बर्फ और भी अधिक तेज गति से पिघलती है।
  • समुद्री बर्फ में परिवर्तन, ध्रुवीय भालू जैसे स्तनधारियों को प्रभावित कर सकता है, जो शिकार, प्रजनन और पलायन के लिए समुद्री बर्फ की उपस्थिति पर निर्भर हैं।
  • बर्फ का पिघलना, स्थानीय आर्कटिक आबादी की पारंपरिक निर्वाह शिकार जीवन शैली को भी प्रभावित कर सकता है।

आर्कटिक क्षेत्र

OCEAN

  • आर्कटिक क्षेत्र, पृथ्वी के सबसे उत्तरी भाग में स्थित एक ध्रुवीय क्षेत्र है।
  • यह आमतौर पर 66° 34' उत्तर अक्षांश के उत्तर में आर्कटिक सर्कल के ऊपर के क्षेत्र को संदर्भित करता है, इसके केंद्र में उत्तरी ध्रुव के साथ आर्कटिक महासागर शामिल है। 
  • आर्कटिक में आर्कटिक महासागर, निकटवर्ती समुद्र और अलास्का (संयुक्त राज्य अमेरिका), कनाडा, फिनलैंड, ग्रीनलैंड (डेनमार्क), आइसलैंड, नॉर्वे, रूस और स्वीडन के कुछ हिस्से शामिल हैं।
  • आर्कटिक क्षेत्र की भूमि में मौसमी रूप से अलग-अलग बर्फ के आवरण होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से वृक्ष रहित पर्माफ्रॉस्ट (स्थायी रूप से जमी हुई भूमिगत बर्फ) होती है। 
  • आर्कटिक क्षेत्र, पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के वायुमंडलीय, महासागरीय और जैव-भू-रासायनिक चक्रों को भी प्रभावित करता है।
  • आर्कटिक महासागर और इसके आस-पास का भूभाग वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ-साथ नीति निर्माताओं के लिए अत्यधिक रुचि और अनुसंधान का एक उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र रहा है। 
  • अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुमान के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में विश्व का लगभग 22% तेल और गैस का भंडार उपलब्ध है।
  • आर्कटिक क्षेत्र में कोयले, जिप्सम और हीरे के समृद्ध भंडार हैं तथा जस्ता, सीसा, प्लेसर गोल्ड और क्वार्ट्ज के भी पर्याप्त भंडार है। 
  • बढ़ते तापमान के कारण बर्फ का पिघलना, आर्कटिक को अगला भू-राजनीतिक आकर्षण का केंद्र बनाता है, जिसमें पर्यावरण, आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य हित शामिल हैं।
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