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मॉडल फ़ॉस्टर केयर दिशा-निर्देश, 2024

प्रारंभिक परीक्षा

(समसामयिक घटनाक्रम)

मुख्य परीक्षा

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ 

हाल ही में, सरकार द्वारा बदलती सामजिक परिस्थितियों के अनुकूल वर्ष 2016 के मॉडल फ़ॉस्टर केयर दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया है। 

पालन-पोषण व्यवस्था के बारे में

  • पालन-पोषण (Foster System) एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें बच्चा अस्थायी रूप से या तो विस्तारित परिवार (सगे-संबंधी) या असंबंधित व्यक्तियों (Adoptive Parents) के साथ रहता है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2024 तक गोवा, हरियाणा एवं लक्षद्वीप को छोड़कर अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 1,653 बच्चे पालक देखभाल में थे।

भारत में बच्चों के पालन-पोषण के लिए प्रमुख शर्तें

  • बच्चों की आयु छह वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • वे बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे हों।
  • उनके ‘अभिभावक अयोग्य’ (Unfit Guardians) हों।
  • ऐसे बच्चे जिन्हें ‘रखना/पालना मुश्किल है या विशेष आवश्यकता वाले बच्चे’ (hard to place or children having special needs) की श्रेणी में रखा गया है, उन्हें भी पालन-पोषण के लिए दिया जा सकता है।

मॉडल फ़ॉस्टर केयर दिशा-निर्देश 2024

  • MoWCD द्वारा वर्ष 2016 के मॉडल फ़ॉस्टर केयर दिशानिर्देशों को किशोर न्याय (बाल देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2021 और किशोर न्याय (बाल देखभाल एवं संरक्षण) मॉडल नियम, 2022 में परिवर्तन के अनुसार संशोधित किया गया है। 

प्रमुख संशोधन 

एकल व्यक्तियों को पालन-पोषण की अनुमति

  • संशोधित मॉडल फ़ॉस्टर केयर दिशा-निर्देशों ने अब विवाहित युगलों तक सीमित पालन-पोषण देखभाल के नियम को समाप्त करते हुए, अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा या कानूनी रूप से अलग रहने वाले 35 से 60 वर्ष की आयु के एकल व्यक्तियों को बच्चे का पालन-पोषण करने और दो वर्ष बाद (पहले यह सीमा 5 वर्ष थी) गोद लेने की अनुमति दे दी है। 
  • हालाँकि, जहाँ एकल महिला किसी भी लिंग के बच्चे का पालन-पोषण कर सकती है और अंततः उसे गोद ले सकती है, वहीं एकल पुरुष केवल पुरुष बच्चों के लिए ऐसा कर सकता है। 
  • इससे पहले वर्ष 2016 के मॉडल फ़ॉस्टर केयर दिशा-निर्देशों के तहत केवल विवाहित युगलों को (न कि एकल व्यक्तियों को), जिन्हें पुराने दस्तावेज़ों में ‘दोनों पति-पत्नी’ के रूप में संदर्भित किया जाता था, एक बच्चे का पालन-पोषण करने की अनुमति थी।

स्थिर वैवाहिक संबंध की अनिवार्यता 

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे विवाहित युगलों के मामले में जो पालन-पोषण करना चाहते हैं, ‘किसी भी बच्चे को दंपत्ति/पति/पत्नी को पालन-पोषण के लिए नहीं दिया जाएगा’ जब तक कि उनके बीच ‘दो वर्ष का स्थिर वैवाहिक संबंध न रहा हो। पहले, युगलों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं थी।

पालनकर्ता की आयु 

  • वर्ष 2016 के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि पति-पत्नी दोनों की आयु 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। 
  • संशोधित दिशा-निर्देश अधिक विशिष्ट हैं, 6 से 12 वर्ष और 12 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चे को पालने के लिए, ‘विवाहित युगलों की समग्र आयु’ न्यूनतम 70 वर्ष होनी चाहिए, जबकि एकल पालक माता-पिता की आयु न्यूनतम 35 वर्ष होनी चाहिए। 
  • यह भावी पालक माता-पिता के लिए अधिकतम आयु भी निर्दिष्ट करता है, 6 से 12 आयु वर्ग के बच्चे को पालने के लिए एकल व्यक्ति के लिए 55 वर्ष तक और 12 से 18 आयु वर्ग के बच्चे को पालने के लिए 60 वर्ष तक।

ऑनलाइन पोर्टल का प्रावधान

  • वर्ष 2024 के पालन-पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों में एक निर्दिष्ट ऑनलाइन पोर्टल का प्रावधान किया गया है।
  • पालक माता-पिता अब चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स इंफॉर्मेशन एंड गाइडेंस सिस्टम (CARINGS) नामक प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं और भावी पालक माता-पिता अपने दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं, ताकि जिला बाल संरक्षण इकाइयां उन तक पहुंच बना सकें।
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