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रुद्रगिरि पहाड़ी पर भित्ति चित्रकला

प्रारंभिक परीक्षा - समसामयिकी, कला और संस्कृति
मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन, पेपर-1

संदर्भ-

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित रुद्रगिरि पहाड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और  पुरातात्विक स्मारकों का साक्षी है।

मुख्य बिंदु-

  • यह स्थल ‘मेसोलिथिक काल’ के ‘प्रागैतिहासिक शैल चित्रों’ और 1300 ई. के काकतीय राजवंश के उत्कृष्ट कलाकृति का एक सुंदर आकर्षण प्रस्तुत करता है।
  • पूर्वी घाट के बीच स्थित रुद्रगिरि की तलहटी में पश्चिम की ओर पांच प्राकृतिक रूप से बने चट्टानी आश्रय स्थल हैं।
  • ये आश्रय स्थल लगभग 5000 ईसा पूर्व में ‘मेसोलिथिक युग’ के दौरान लोगों के रहने का काम करते थे और उस युग के चमकदार शैल चित्रों के साक्षी हैं।
  • पहाड़ी के दक्षिणी छोर पर दो प्राकृतिक गुफाएँ भी हैं,जो काकतीय साम्राज्य के असाधारण भित्तिचित्रों को प्रदर्शित करती हैं।

काकतीय कलात्मक विरासत-

  • ये गुफाएँ काकतीय काल की कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं।
  • हालांकि, इनमें से कई समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गई हैं, किंतु कुछ रेखाचित्र या कलाकृतियां वर्तमान में भी मौजूद हैं।
  • चीनी मिट्टी(white kaolin) और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त विभिन्न रंगों से चित्रित ये पेंटिंग महाकाव्य ‘रामायण’ के सुरम्य दृश्यों को दर्शाती हैं।
  • प्रकृति के प्रकोप के प्रभावों के बावजूद, ये चित्र 13वीं शताब्दी ई. के कलाकृत्तियों के अध्ययन में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

मनमोहक भित्ति चित्र-

    1. पहली गुफा पहाड़ी के दक्षिणी छोर से शुरू होता है।

  • इस गुफा में वानर भाइयों बाली और सुग्रीव के बीच गहन युद्ध को चित्रित करते हुए एक कथात्मक भित्तिचित्र प्रस्तुत किया गया है। दोनों आकृतियाँ युद्ध के मैदान में गदा लिए खड़ी हैं, उनके चेहरे पर दृढ़ संकल्प प्रदर्शित हो रहा है। राम, सुग्रीव के पीछे खड़े होकर बाली पर तीर चलाते हैं।

        हालाँकि समय ने इस सुरम्य दृश्य के रंगों को धूमिल कर दिया है, लेकिन अवशिष्ट रूपरेखाएँ उनकी उत्पत्ति और काल निर्धारण के लिए बहुमूल्य सामग्री प्रदान करती हैं।

     2. मध्य गुफा में हनुमान जी का एक भव्य रेखाचित्र शंख और अग्नि वेदी (यज्ञ वेदी) के पवित्र प्रतीकों के साथ चित्रित किया गया है। हनुमान जी को अपने दाहिने हाथ में संजीवनी पहाड़ को ले जाते हुए दिखाया गया है, जो लक्ष्मण के जीवन को बचाने के उनके मिशन का प्रतीक है।

  • महत्वपूर्ण बात यह है कि काकतीय कलाकारों द्वारा हनुमान जी की सुंदर आकृति को उसी चट्टान पर चित्रित किया गया है, जिस पर एक अद्वितीय 'अंजलि' मुद्रा में चित्र है, जो दिव्य भेंट में अपने हाथ जोड़ रहा है।

3. तीसरी गुफा में मेसोलिथिक युग के प्रागैतिहासिक शैलचित्र हैं।

  • उल्लेखनीय है कि, रामायण की कलाकृतियां न तो मध्यपाषाणकालीन चित्रों पर हावी होती हैं और न ही उनकी प्राकृतिक सुंदरता को कम करती हैं।
  • वर्तमान में पर्यटक दो अलग-अलग कालखंडों के प्राचीन चित्रों को देखकर आश्चर्यचकित हो सकते हैं और प्रयुक्त कलात्मक तकनीकों की सराहना कर सकते हैं।

तेलंगाना से संबंध-

1. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में ‘मंदिर सर्वेक्षण परियोजना’ (दक्षिणी क्षेत्र) के पूर्व अधीक्षक पुरातत्वविद् डी. कन्ना बाबू के अनुसार, रुद्रगिरि के शैल आश्रयों पर बने शानदार भित्तिचित्रों और तेलंगाना के वारंगल जिले के मुप्पावरम तथा पांडवुलागुट्टा में खोजे गए भित्तिचित्रों के बीच अद्भुत समानता है ।
2. इन समानताओं से पता चलता है कि ‘रुद्रगिरि में चित्रित रामायण के दृश्यों’ ने ‘मुप्पावरम की कलाकृतियों’ से प्रेरणा ली होगी।
3. इसके अलावा, मुप्पावरम मंदिर के संस्थापक और काकतीय राजवंश के गणपति देव महाराजा (1199-1262 ईस्वी) ने संभवतः रुद्रगिरि में पाए जाने वाली समृद्ध प्राचीन भित्ति विरासत को संरक्षण दिया था।
4. भावी पीढ़ियों के लाभ के लिए इस अद्वितीय भित्तिचित्र को संरक्षित करना महत्वपूर्ण है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- रुद्रगिरि पहाड़ी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

1. रुद्रगिरि की तलहटी में पश्चिम की ओर पांच प्राकृतिक रूप से बने चट्टानी आश्रय मिले हैं।

2. यहाँ प्रागैतिहासिक शैल चित्रों के साथ ही काकतीय काल के भी चित्र मिलते हैं।

3. रुद्रगिरि के शैल आश्रयों पर बने भित्तिचित्रों और मुप्पावरम तथा पांडवुलागुट्टा में खोजे गए भित्तिचित्रों के बीच अद्भुत समानता है ।

नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिए।

(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं

उत्तर- (c)

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न - रुद्रगिरि की गुफाएँ काकतीय काल की कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं। टिप्पणी कीजिए।

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