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बंगाल में 4 नये जैव विविधता विरासत स्थल

प्रारंभिक परीक्षा - जैव विविधता विरासत स्थल, जैव विविधता अधिनियम 2002
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्यन प्रश्नपत्र  3 - सरकारी नीतियाँ, पर्यावरण संरक्षण

संदर्भ 

  • हाल ही में, बंगाल सरकार द्वारा राज्य में 4 जैव विविधता विरासत स्थलों को अधिसूचित किया गया। 
  • चार नए स्थलों को अधिसूचित किये जाने के बाद अब बंगाल में कुल जैव विविधता विरासत स्थलों की संख्या 8 हो गयी है।

4 नये जैव विविधता विरासत स्थल

  • चार बलिडंगा (नादिया)
  • नमथिंग पोखरी (दार्जिलिंग)
  • अमखोई वुड फॉसिल पार्क ( बीरभूम)
  • स्टेट हॉर्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट स्टेशन (नादिया)

जैव विविधता विरासत स्थल

  • राज्य सरकार, जैविक विविधता अधिनियम 2002 की धारा 37 के तहत स्थानीय शासी निकायों के परामर्श से जैव विविधता विरासत स्थलों को अधिसूचित कर सकती है। 
  • इन्हें अद्वितीय और नाजुक पारिस्थितिक तंत्र माना जाता है जो समुद्री पारिस्थितिक तंत्र, तटीय और अंतर्देशीय जल या स्थलीय क्षेत्र हो सकते हैं। 
  • जैव विविधता विरासत स्थल के मानदंड  - 
    • समृद्ध जैव विविधता वाले समुद्री क्षेत्र।  
    • जंगली के साथ-साथ पालतू जानवरों की समृद्ध प्रजातियां या अंतर-विशिष्ट श्रेणियां। 
    • उच्च स्थानिकता।
    • दुर्लभ और खतरे वाली प्रजातियों की उपस्थिति। 
    • कीस्टोन प्रजातियां, विकासवादी महत्व की प्रजातियां। 
    • घरेलू/कृषि प्रजातियों या उनकी किस्मों के जंगली पूर्वज।
    • जीवाश्म बेड द्वारा दर्शाए गए जैविक घटकों की पूर्व-प्रतिष्ठा। 
    • सांस्कृतिक, नैतिक या सौंदर्यवादी मूल्य और सांस्कृतिक विविधता। 

जैव विविधता अधिनियम 2002

  • जैविक विविधता अधिनियम, 2002, केंद्र सरकार द्वारा जैव विविधता की रक्षा करने और पारंपरिक जैविक संसाधनों और ज्ञान के उपयोग द्वारा प्राप्त लाभों के उचित वितरण के लिए एक प्रणाली प्रदान करने के लिए पारित एक कानून है।
  • यह अधिनियम जैविक विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (CBD), 1992 के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए पारित किया गया था।   
  • अधिनियम के सामान्य उद्देश्यों में पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करना, बायोपाइरेसी को रोकना, सरकार की सहमति के बिना पेटेंट प्राप्त करने से व्यक्तियों को रोकना शामिल हैं।
  • इस अधिनियम में वाणिज्यिक या अनुसंधान उद्देश्यों के लिए या जैव-सर्वेक्षण और जैव-उपयोग के उद्देश्यों के लिए भारत में होने वाले जैविक संसाधनों और संबंधित ज्ञान का संरक्षण, उपयोग शामिल है। 
  • यह जैविक संसाधनों तक पहुंच और इस तरह की पहुंच और उपयोग से होने वाले लाभों को साझा करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।
  • अधिनियम के दायरे में भारतीय जैविक संसाधनों से संबंधित अनुसंधान परिणामों के हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के लिए आवेदन भी शामिल है।
  • इस अधिनियम के तहत किया गया कोई भी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है।
  • जैविक संसाधनों तक पहुंच को नियंत्रित करने के लिए कानून द्वारा त्रि-स्तरीय ढांचे की कल्पना की गई -
    • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए)
    • राज्य जैव विविधता बोर्ड (एसबीबी)
    • जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs) (स्थानीय स्तर पर)
  • इस अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित कार्यों को छूट प्रदान की गयी है -
    • भारतीय जैविक संसाधनों का सामान्य रूप से वस्तुओं के रूप में व्यापार।  
      • इस तरह की छूट केवल तब तक लागू होती है, जब तक कि जैविक संसाधनों का उपयोग वस्तुओं के रूप में किया जाता है, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं। 
  • भारतीय जैविक संसाधनों और संबंधित ज्ञान का पारंपरिक उपयोग। 
  • केंद्र सरकार के अनुमोदन से भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं में भारतीय जैविक संसाधनों का उपयोग।

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