नोथोब्रांचियस सिल्वेटिकस

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने केन्या में एक नए प्रकार की ‘किलिफ़िश’ की खोज की है जो केन्या के जंगल में स्थानिक है। 

किलिफिश के बारे में 

  • परिचय : किलिफ़िश अंडप्रजक (अंडा देने वाली) मछलियाँ हैं। वैश्विक स्तर पर इनकी लगभग 1,270 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • आहार : किलिफ़िश कीटभक्षी होती हैं जो मुख्यत: जलीय आर्थ्रोपोड्स जैसे कीट (मच्छर) लार्वा, जलीय क्रस्टेशियन और कीड़े खाती हैं।
  • आकार : ये सामान्यतया छोटे आकार की होती हैं।  
  • आवास : ये मुख्यत: विभिन्न प्रकार के ताजे जलीय वातावरण में रहती हैं जिनमें छोटे तालाब, नदियाँ एवं दलदल शामिल हैं। 
    • ये प्राय: ऐसे क्षेत्रों में रहती हैं जहां मौसमी जल उपलब्धता होती है।
  • विस्तार : ये मुख्यत: अमेरिका, दक्षिणी यूरोप, अफ़्रीका के अधिकांश भाग, मध्य-पूर्व व एशियाई क्षेत्रों में पाई जाती हैं। 

नई प्रजाति के बारे में 

  • खोज स्थल : वैज्ञानिकों की टीम ने इस मछली की खोज दक्षिण-पूर्वी तटीय केन्या में गोंगोनी वन के दलदलों में की।
    • गोंगोनी वन 7.09 मिलियन वर्ष से अधिक पुराना है जो केवल 8.2 वर्ग किमी. में विस्तृत है। यह जंगल दक्षिण अफ्रीका के पोंडोलैंड से लेकर दक्षिणी तटीय सोमालिया तक उत्तर में फैला हुआ है।
  • नाम : इसे नोथोब्रांचियस सिल्वेटिकस नाम दिया गया है जो लैटिन शब्द ‘जंगल से संबंधित’ से लिया गया है। 
    • यह जंगल में रहने वाली पहली ज्ञात स्थानिक किलिफ़िश भी है।
    • यह पहले से ही अति संकटग्रस्त है और विलुप्त हो सकती है।
  • संबंधित अध्ययन : इससे संबंधित अध्ययन ज़ूटाक्सा जर्नल में प्रकाशित हुआ।    
    • शारीरिक लक्षणों के साथ-साथ डी.एन.ए. अनुक्रमण से इसके एक नई प्रजाति होने की पुष्टि हुई।
    • यह पाया गया कि एन. सिल्वेटिकस वंश लगभग 7.09 मिलियन वर्ष पहले अपनी प्रजातियों से अलग हो गया था।
  • जोखिम : अत्यधिक प्रतिबंधित आवास के कारण इसे उच्च संरक्षण जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
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