हाल ही में दक्षिणी गोलार्ध की ग्रीष्म ऋतु (जनवरी 2026) के दौरान चैथम द्वीप समूह के आसपास समुद्र में फाइटोप्लांकटन की असामान्य वृद्धि (Bloom) दर्ज की गई। यह वृद्धि इतनी व्यापक थी कि इसे अंतरिक्ष से NOAA-20 उपग्रह के VIIRS सेंसर द्वारा स्पष्ट रूप से देखा गया। समुद्र की सतह पर हरे और नीले रंग के घुमावदार पैटर्न उभर आए, जो उच्च जैविक गतिविधि का संकेत देते हैं।
फाइटोप्लांकटन सूक्ष्म प्रकाश-संश्लेषी जीव होते हैं, जो समुद्री खाद्य श्रृंखला की आधारशिला माने जाते हैं। इनकी संख्या में अचानक वृद्धि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मत्स्य संसाधनों और वैश्विक कार्बन चक्र को भी प्रभावित करती है।

चैथम द्वीप समूह: भौगोलिक परिचय
चैथम द्वीप समूह दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह है। यह न्यूज़ीलैंड का सबसे पूर्वी क्षेत्र है तथा दक्षिण द्वीप से लगभग 800 किलोमीटर पूर्व स्थित है। यह लगभग 10 द्वीपों से मिलकर बना है, जिनमें से केवल दो द्वीपों पर स्थायी आबादी निवास करती है-चैथम द्वीप (सबसे बड़ा) और पिट द्वीप।
भौतिक संरचना
- द्वीप मुख्यतः ज्वालामुखीय उत्पत्ति के हैं।
- कुछ क्षेत्रों में चूना पत्थर (Limestone) की उपस्थिति यह संकेत देती है कि ये द्वीप कभी न्यूज़ीलैंड के भूभाग से जुड़े रहे होंगे।
- चैथम द्वीप का दक्षिणी भाग ऊँचे पठार और खड़ी चट्टानों से युक्त है, जबकि उत्तरी भाग में विस्तृत दलदली क्षेत्र, जलमार्ग तथा लंबे रेतीले समुद्र तट पाए जाते हैं।
विशेष तथ्य
- यह विश्व का पहला मानव-निर्मित समय क्षेत्र माना जाता है जहाँ प्रतिदिन सबसे पहले सूर्योदय देखा जाता है।
- मुख्य बस्ती: वेतांगी
- अन्य बस्तियाँ: ते वन, पोर्ट हुत, काइंगारोआ और ओवेंगा।
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
- सबसे पहले यहाँ मोरिओरी जनजाति के लोग बसे थे। उन्होंने इन द्वीपों को ‘रेकोहू’ नाम दिया, जिसका अर्थ है — धुंधला आकाश या धुंधला सूर्य बाद में यूरोपीय सील एवं व्हेल शिकारी यहाँ पहुँचे।
- इसके पश्चात न्यूज़ीलैंड से माओरी लोग आए, जिन्होंने द्वीपों का नाम ‘व्हारेकौरी’ रखा।
- आज भी मोरिओरी समुदाय के वंशज इन द्वीपों पर निवास करते हैं।
फाइटोप्लांकटन ब्लूम का वैज्ञानिक कारण
चैथम द्वीप समूह Chatham Rise नामक एक जलमग्न समुद्री पठार पर स्थित है।
चाथम राइज़ की भूमिका
- यह पठार न्यूज़ीलैंड के दक्षिण द्वीप से पूर्व दिशा में फैला एक अपेक्षाकृत उथला क्षेत्र है।
- इसके उत्तर और दक्षिण में गहरे महासागरीय क्षेत्र स्थित हैं।
- यहाँ दो प्रमुख समुद्री धाराएँ मिलती हैं:
- अंटार्कटिक क्षेत्र की ठंडी, पोषक तत्वों से समृद्ध धाराएँ, तथा
- उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की गर्म, पोषक तत्वों से अपेक्षाकृत गरीब धाराएँ।
इन धाराओं के मिश्रण से समुद्री जल में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है। ग्रीष्म ऋतु में लंबे दिन और अधिक सूर्य प्रकाश मिलने से प्रकाश-संश्लेषण की दर तेज़ हो जाती है, जिससे फाइटोप्लांकटन की तीव्र वृद्धि होती है।
पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व
1. समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार
फाइटोप्लांकटन प्राथमिक उत्पादक होते हैं और सम्पूर्ण समुद्री जैव तंत्र इन्हीं पर निर्भर करता है।
2. समृद्ध मत्स्य संसाधन
यह क्षेत्र अत्यंत उत्पादक मत्स्य क्षेत्र है, जहाँ प्रमुख प्रजातियाँ पाई जाती हैं:
- pāua (एबेलोन)
- रॉक लॉब्स्टर
- ब्लू कॉड
इनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण आय प्राप्त होती है।
3. उच्च जैव विविधता
- लगभग 5 प्रजातियों की सील
- 25 से अधिक व्हेल और डॉल्फ़िन प्रजातियाँ
यह क्षेत्र समुद्री स्तनधारियों का प्रमुख आवास स्थल है।
4. व्हेल स्ट्रैंडिंग का जोखिम
- यह क्षेत्र व्हेल और डॉल्फ़िन के सामूहिक रूप से तट पर फँसने (Stranding) का एक संवेदनशील क्षेत्र भी है।
- इसके संभावित कारणों में समुद्री भू-आकृति, जटिल धाराएँ और ध्वनि तरंगों का प्रभाव शामिल माना जाता है।