राजस्थान की बामनवास कंकर पंचायत ने रासायन-मुक्त और सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्थानीय उपलब्धि हासिल की है। यह राज्य की पहली पंचायत है जिसे पूरी तरह से ऑर्गेनिक प्रमाणित किया गया।
राजस्थान पंचायत ऑर्गेनिक शपथ
- कोटपुतली–बेहरोर जिले की सात बस्तियों से मिलकर बनी बामनवास कंकर पंचायत ने औपचारिक रूप से 100% ऑर्गेनिक खेती और पारिस्थितिक रूप से सुरक्षित पशुपालन अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
- इसके तहत कृषि और पशुपालन में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक एवं सिंथेटिक इनपुट्स का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
- रासायन-मुक्त खेती: सभी फसलें बिना सिंथेटिक उर्वरक या कीटनाशक के उगाई जाएँगी।
- पारिस्थितिक पशुपालन: पशुपालन को स्वास्थ्य एवं पर्यावरण मानकों के अनुरूप रखा जाएगा।
- सामुदायिक नेतृत्व: यह बदलाव पंचायत के सामूहिक निर्णयों से आया है, न कि ऊपर से थोपे गए आदेशों से।
- संस्थागत सहयोग: COFED (Cofarmin Federation of Organic Societies and Producer Companies) द्वारा प्रमाणन, डेटा संग्रह और बाज़ार तक पहुँच में मदद।
- बाज़ार से जुड़ाव: ऑर्गेनिक प्रमाणन किसानों को प्रीमियम बाज़ार तक पहुँच और इनपुट लागत में कमी की सुविधा प्रदान करता है।
महत्व
- मृदा एवं जल संरक्षण: मृदा की गिरती गुणवत्ता और भूजल स्तर में सुधार में सहायक
- किसान कल्याण: इनपुट लागत में कमी और बेहतर कीमतों के माध्यम से आय में वृद्धि
- सार्वजनिक स्वास्थ्य: किसानों और उपभोक्ताओं को हानिकारक रासायनिक उत्पादों से सुरक्षा
- जैव विविधता: मृदा के सूक्ष्मजीव और लाभकारी कीटों की संख्या में वृद्धि
वस्तुतः बामनवास कंकर पंचायत की यह पहल राजस्थान में रासायनिक-मुक्त और सतत कृषि की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है।