गोल्ड लोन पर आर.बी.आई. के नए दिशा निर्देश

(प्रारंभिक परीक्षा : समसामयिक घटनाक्रम)

संदर्भ

भारतीय रिज़र्व बैंक (आर.बी.आई.) ने गोल्ड लोन पर विनियामक फ्रेमवर्क के तहत नए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं।

नए विनयामक फ्रेमवर्क के बारे में

  • क्या है : यह फ्रेमवर्क सोने और चांदी के आभूषणों पर ऋण लेने वाले ग्राहकों के लिए ऋण लेने की प्रक्रिया को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर केंद्रित हैं।
  • उद्देश्य : सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक समान ढांचा तैयार करना, जिससे जोखिम कम हो और पारदर्शिता बनी रहे।
  • लागू : यह प्रस्तावित फ्रेमवर्क सभी प्रकार के ऋणदाता, बैंक, गैर-वित्तीय बैंकिंग कंपनी, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर लागू होता है। 
    • हालांकि, यह नए नियम केवल 1 जनवरी, 2026 तक लागू किए जाएंगे।

आवश्यकता

  • इस वर्ष फरवरी के अंत में सोने के आभूषणों के बदले दिए जाने वाले ऋण में 87% से ज़्यादा की बढ़ोत्तरी  हुई है जिसके कारण गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) में भी वृद्धि हुई है। 
    • RBI के आंकड़ों के अनुसार गोल्ड लोन में NPA पिछले एक साल में 28.58% बढ़ गया है और लोन बकाया 27.26% बढ़ गया है। 
  • इसके आलावा पिछले वर्ष रिजर्व बैंक द्वारा गोल्‍ड लोन की मौजूदा कार्यप्रणाली में ऋण के स्रोत, गोल्‍ड के वैल्‍यूएशन की प्रोसेस, पैसे के उपयोग की निगरानी, और लोन टू वैल्‍यू (LTV) के अनुपात आदि में भी अनेक खामियां पाई गई थी। 

फ्रेमवर्क में शामिल प्रावधान

  • सोने का मूल्यांकन : सोने की कीमत का मूल्यांकन 22 कैरेट सोने के आधार पर होगा।
    • इसके अलावा हॉलमार्क वाले सोने को प्राथमिकता दी जाएगी और उस पर ब्याज दरें और मार्जिन अलग होंगी।
  • सीमा और वजन पर नियम : एक व्यक्ति द्वारा गिरवी रखे जाने वाले सोने और चांदी के आभूषणों का कुल वजन 1 किलोग्राम से अधिक नहीं हो सकता।
    • सोने के सिक्कों की सीमा: 50 ग्राम
    • चांदी के सिक्कों की सीमा: 500 ग्राम
    • बैंक के अलावा किसी और संस्था द्वारा बेचे गए सिक्कों को गिरवी मान्यता नहीं दी जाएगी।
  • सोने की वैधता और उपयोग : ऋण तभी दिया जाएगा जब व्यक्ति के पास सोने का वैध स्वामित्व हो। रसीद नहीं होने पर भी उपयुक्त दस्तावेज की घोषणा देनी होगी।
  • लोन टू वैल्यू (LTV) का नियम : ऋण की राशि सोने की कुल कीमत के अधिकतम 75% तक ही दी जा सकेगी।
    • उदाहरण के लिए, अगर सोने की कीमत ₹10,000 है, तो अधिकतम लोन ₹7,500 होगा। यह सीमा पूरी ऋण अवधि में बनी रहनी चाहिए।
    • यदि किसी कारणवश ब्याज जोड़ने पर यह सीमा पार हो जाए, तो बैंक को उस पर 1% अतिरिक्त रिजर्व रखना होगा जब तक सीमा फिर से ठीक न हो जाए।
  • अन्य प्रावधान : आर.बी.आई. ने ऋणदाताओं को प्राथमिक सोना/चांदी या प्राथमिक सोना/चांदी द्वारा समर्थित वित्तीय परिसंपत्तियों जैसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ई.टी.एफ.) या म्यूचुअल फंड की इकाइयों के बदले कोई अग्रिम देने से रोक दिया है।

विनियमित संस्थाओं पर प्रभाव

  • इन बदलावों से उधारकर्ताओं की लचीलापन कम होने और एन.बी.एफ.सी. की ऋणों को निर्बाध रूप से नवीनीकृत/टॉप-अप करने की क्षमता कम होने की उम्मीद है।
  • इससे दस्तावेज़ीकरण, डी.एस.सी.आर. (ऋण सेवा कवरेज अनुपात) मानदंडों और निगरानी के कारण अनुपालन बोझ बढ़ेगा।
  • छोटी एन.बी.एफ.सी. जो तरलता के लिए पुनः प्रतिज्ञा पर निर्भर हैं, उन्हें फंडिंग की कमी का सामना करना पड़ेगा, जिससे संभावित बाजार समेकन हो सकता है।
  • बढ़ी हुई ब्याज दरों या शुल्कों के माध्यम से उच्च परिचालन लागत उधारकर्ताओं पर डाली जा सकती है।

उधारकर्ताओं पर प्रभाव

  • RBI के मसौदा निर्देशों से प्रकटीकरण और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है जो उधारकर्ताओं को उनके निर्णय लेने में मदद करेगी।
  • संभवतः समान मात्रा में स्वर्ण जमानत पर उधारकर्ताओं को दिए जाने वाले ऋण की मात्रा कम हो सकती है, या वैकल्पिक रूप से, उधारकर्ता को समान ऋण राशि के लिए, अन्य सभी चीजें समान रहने पर, अधिक मात्रा में स्वर्ण गिरवी रखने की आवश्यकता हो सकती है।
  • ऋणकर्ताओं को नवीकरण या टॉप-अप ऋण प्राप्त करने के लिए संपूर्ण अर्जित ब्याज की चुकौती की आवश्यकता का पालन करने के लिए अपने नकदी प्रवाह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने की भी आवश्यकता हो सकती है।
  • 75% एल.टी.वी. सीमा से वितरित ऋण राशि सीमित हो सकती है, जिसका प्रभाव संभवतः उन उधारकर्ताओं पर पड़ेगा जिन्हें बड़ी राशि की आवश्यकता है।
  • सोने को पुनः गिरवी रखने की व्यवस्था समाप्त करने से उधारकर्ताओं पर एक बार में ही पूरा ऋण चुकाने का दबाव पड़ेगा, जिससे संभवतः उधारकर्ताओं की तरलता प्रभावित होगी।
  • संपार्श्विक के रूप में वित्तीय सोने (जैसे स्वर्ण म्यूचुअल फंड और ई.टी.एफ.) पर प्रतिबंध से कुछ उधारकर्ताओं के लिए विकल्प सीमित हो सकते हैं।

निष्कर्ष

निष्कर्षत: ये मसौदा निर्देश सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव के चक्रों को प्रबंधित करने के लिए ऋण क्षेत्र को संरचनात्मक रूप से और मजबूत करेंगे तथा अपनाई जाने वाली प्रथाओं के संदर्भ में सभी विनियमन संस्थानों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराएंगे।

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