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चंद्रमा की सतह पर सोडियम

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास व अनुप्रयोग, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ)

संदर्भ 

हाल ही में, इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर सोडियम के वैश्विक वितरण की मैपिंग की है। यह मैपिंग एक्स-रे फ्लोरेसेंट स्पेक्ट्रा का उपयोग करके की गई है। इसके निष्कर्षों को ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • इसके लिये भारत के दूसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-2 से ले जाए गए क्लास (CLASS : Chandrayaan-2 Large Area Soft X-ray Spectrometer) उपकरण का प्रयोग किया गया।
  • एक्स-रे फ्लोरोसेंस का प्रयोग सामान्यत: गैर-विध्वंसकारी तरीके से पदार्थों की संरचना का अध्ययन करने के लिये किया जाता है।

अध्ययन का तरीका

  • जब सूर्य से सौर ज्वाला (Solar Flares) उत्पन्न होती है तो एक्स-रे विकिरण (X-ray Radiation) की एक बड़ी मात्रा चंद्रमा पर आपतित होती है, जिससे एक्स-रे फ्लोरेसेंट की शुरुआत होती है।
  • क्लास उपकरण चंद्रमा से आने वाली एक्स-रे फोटॉन की ऊर्जा को मापता है और इसकी कुल संख्या की गणना करता है।
  • फोटॉन की ऊर्जा किसी विशिष्ट परमाणु को इंगित करती है (जैसे- सोडियम परमाणु 1.04 keV का एक्स-रे फोटॉन उत्सर्जित करता है) तथा इसकी तीव्रता परमाणुओं की संख्या की उपस्थिति की एक माप है।

उपयोग

  • उल्लेखनीय है कि पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा में सोडियम जैसे वाष्पशील/अस्थिर तत्वों की काफी कमी है।
  • वर्तमान में चंद्रमा पर वाष्पशील तत्वों की मात्रा का उपयोग पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली के गठन का परीक्षण करने के लिये उपयोग किया जा सकता है।
  • सोडियम का उपयोग चंद्रमा के परिवर्तनशील इतिहास के अनुरेखक के रूप में किया जा सकता है। सोडियम का यह नया नक्शा सतह-बहिर्मंडल संबंध को समझने में सक्षम करेगा।

नए निष्कर्ष

  • इससे पूर्व अपोलो-11, लूना और चांग ई-5 जैसे चंद्र मिशन चंद्रमा की चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए थे। इनके माध्यम से चंद्रमा की चट्टानों में सोडियम की मात्रा का सटीक आकलन किया गया था।
  • नवीनतम निष्कर्ष यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ सोडियम परमाणुओं का एक पतला आवरण पाया जाता है जो चंद्रमा की चट्टानों में पाई जाने वाली मामूली मात्रा के अलावा दुर्बल रूप से चंद्रमा की सतह से बिंधा होता है।
  • सतह पर मौजूद ये सोडियम परमाणु तब मुक्त होते हैं जब उन्हें सौर पराबैंगनी विकिरण और सौर पवन आयनों से पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • पोटेशियम के अलावा सोडियम एकमात्र ऐसा तत्व है जिसे चंद्रमा के वातावरण (इसके बहिर्मंडल) में दूरबीनों से देखा जा सकता है।
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