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सोहराई पेंटिंग

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)

चर्चा में क्यों 

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कज़ान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को झारखंड की सोहराई पेंटिंग भेंट की। 

सोहराई पेंटिंग के बारे में 

  • झारखंड के हजारीबाग जिले की सोहराई पेंटिंग इस क्षेत्र की स्वदेशी कलात्मक परंपराओं का एक सुंदर प्रतिनिधित्व है।
  • सोहराई पेंटिंग को एक जिला एक उत्पाद (ODOP) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • इस पेंटिंग को भौगोलिक संकेत(GI Tag) भी प्रदान किया गया है।
  • इस पेंटिंग को बनाने में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इसमें कलाकार प्राय: जटिल डिजाइन बनाने के लिए टहनियों, चावल के भूसे या उंगलियों से बने ब्रश का उपयोग  करते हैं। 
  • इस पेंटिंग में पशु, पक्षी और प्रकृति का चित्रण आदिवासी संस्कृति में कृषि जीवन शैली और वन्य जीवन के प्रति श्रद्धा को प्रतिबिंबित करते हैं।   

इसे भी जानिए

  • इस सम्मेलन के दौरान ही उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को महाराष्ट्र की वारली पेंटिंग भेंट की गयी।  
  • वारली पेंटिंग एक आदिवासी कला है, जो मुख्य रूप से राज्य के दहानू, तलासरी और पालघर क्षेत्रों में रहने वाली वारली जनजाति द्वारा बनाई जाती है। 
  • यह अपनी सादगी और प्रकृति और दैनिक जीवन से गहरे जुड़ाव के लिए प्रसिद्ध है। यह आदिवासी कला भारत में सबसे पुरानी कलाओं में से एक है, जिसकी जड़ें लगभग 3000 ईसा पूर्व तक जाती हैं। 
  • यह कला पारंपरिक रूप से वारली महिलाओं द्वारा शादियों और फसल उत्सवों जैसे विशेष अवसरों के दौरान अपने मिट्टी के घरों की दीवारों पर बनाई जाती थी।
  •  इस कला को अपनी जीवन शैली, रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को एक दृश्य कहानी कहने के प्रारूप में प्रलेखित किया गया, जो किसी भी भाषा से परे था।
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