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भारत में मलेरिया की स्थिति

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास व प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विश्व मलेरिया रिपोर्ट, 2024 जारी की है।

विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2024 के प्रमुख निष्कर्ष

वैश्विक स्थिति 

  • वर्ष 2023 में दुनिया भर में मलेरिया के 263 मिलियन मामले और इससे 597,000 मौते होने का अनुमान है।
  • वैश्विक स्तर पर वर्ष 2023 में मलेरिया से प्रभावित (Affected) 83 देशों में से 29 देश वैश्विक मलेरिया के लगभग 95% मामलों और मलेरिया से होने वाली 96% मौतों के लिए ज़िम्मेदार थे।
    • नाइजीरिया (25.9%), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा, इथियोपिया और मोज़ाम्बिक दुनिया भर में मलेरिया के आधे से अधिक मामलों के लिए ज़िम्मेदार हैं।
    • वैश्विक स्तर पर मलेरिया से होने वाली मौतों में से आधे से अधिक मौतें 4 देशों में होती हैं : नाइजीरिया (30.9%), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, नाइजर और तंजानिया।
    • वर्ष 2022-2023 की अवधि में 4 देशों ने अपने मलेरिया के मामलों में कमी लाने में सफलता प्राप्त की है : बांग्लादेश (-9.2%), भारत (-9.6%), इंडोनेशिया (-5.7%) और नेपाल (-58.3%)
    • 3 देशों में मामलों में वृद्धि देखी गई है : दक्षिण कोरिया (+47.9%), थाईलैंड (+46.4%) और म्यांमार (+45.1%)

दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र

  • दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से वैश्विक स्तर पर मलेरिया के मामलों का लगभग 1.5% हिस्सा है और इस क्षेत्र में मलेरिया से होने वाली मौतों में 82.9% की कमी आई है, जो वर्ष 2000 में 35,000 से घटकर वर्ष 2023 में 6,000 हो गई है।
  • भारत और इंडोनेशिया दोनों मिलकर इस क्षेत्र में मलेरिया से होने वाली मौतों के लगभग 88% के लिए जिम्मेदार हैं।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में मलेरिया के मामले वर्ष 2000 में 22.8 मिलियन से घटकर वर्ष 2023 में 4 मिलियन (-82.4%) हो जाने का अनुमान है।

भारत की स्थिति

  • भारत वर्ष 2024 में आधिकारिक तौर पर उच्च बोझ से उच्च प्रभाव (HBHI) समूह से बाहर हो जाएगा। 
  • वर्ष 2022 और वर्ष 2023 के बीच भारत ने मलेरिया के मामलों में 9.6% की गिरावट दर्ज की।
  • भारत ने वर्ष 2000 से 2023 के बीच मलेरिया के मामले की घटनाओं में 87% की कमी हासिल की है और इससे जोखिमग्रस्त जनसंख्या की स्थिति प्रति 1000 पर 17.7 से घटकर 2.3 रह गई।

44 देश मलेरिया मुक्त घोषित

  • नवंबर 2024 तक 44 देशों को WHO ने मलेरिया-मुक्त प्रमाणित किया है और कई अन्य देश इस लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
    • जिन देशों में लगातार कम-से-कम 3 वर्षों तक मलेरिया का कोई भी मामला सामने नहीं आता है, वे मलेरिया मुक्त स्थिति के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमाणीकरण के लिए आवेदन के पात्र होते हैं।
  • मलेरिया से प्रभावित 83 देशों में से 25 देशों में अब वार्षिक स्तर पर मलेरिया के 10 से कम मामले सामने आते हैं, जो वर्ष 2000 में 4 देशों से अधिक है।

मलेरिया में कमी लाने के प्रयास

  • वर्ष 2016 में भारत ने मलेरिया उन्मूलन के लिए ‘2016-2030 राष्ट्रीय रूपरेखा’ को अपनाया।
    • यह रूपरेखा भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 18 देशों के नेताओं द्वारा वर्ष 2030 तक मलेरिया को समाप्त करने के लिए वर्ष 2014 में की गई क्षेत्रीय प्रतिज्ञा के अनुरूप थी।
  • भारत की प्रगति का श्रेय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, विशेषकर महिलाओं को जाता है, जो दूरदराज की आबादी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
    • सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि महिला मरीज़ स्वास्थ्य सेवा तक पहुँचने के लिए सामाजिक बाधाओं को पार कर सकें।
  • कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी और इनडोर अवशिष्ट छिड़काव (IRS) मलेरिया की रोकथाम में महत्वपूर्ण उपकरण रहे हैं।
  • वर्ष 2023 में भारत ने मलेरिया के मामलों को कम करने के लिए 1.1 मिलियन से अधिक कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी वितरित किए।
  • वर्ष 2018 में शुरू की गई WHO की हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट (HBHI) पहल ने वर्ष 2024 तक भारत में मलेरिया नियंत्रण का समर्थन किया। 

मलेरिया की रोकथाम के समक्ष प्रमुख चुनौतियां

  • वित्तपोषण की कमी : WHO ने कहा कि भविष्य की प्रगति के लिए वित्तपोषण एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
    • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में कुल वित्तपोषण अनुमानित 4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है जो वैश्विक तकनीकी रणनीति द्वारा निर्धारित 8.3 बिलियन डॉलर के वर्ष के फंडिंग लक्ष्य से बहुत कम है।
    • अपर्याप्त फंडिंग के कारण कीटनाशक उपचारित जाल, दवाइयों एवं अन्य जीवन रक्षक उपकरणों के कवरेज में बड़ी कमी आई है।
  • जैविक खतरें : मलेरिया प्रभावित देश कमजोर स्वास्थ्य प्रणालियों, कमजोर निगरानी तथा दवा एवं कीटनाशक प्रतिरोध जैसे बढ़ते जैविक खतरों से जूझ रहे हैं।
  • एनोफ़ेलीज़ स्टेफ़ेंसी : शहरी क्षेत्रों में मलेरिया प्रसार के लिए जिम्मेदार आक्रामक एनोफ़ेलीज़ स्टेफ़ेंसी मच्छर एक चुनौती बना हुआ है, जिसके मामले 8 अफ़्रीकी देशों में सामने आए हैं।
  • वैश्विक संघर्ष : कई क्षेत्रों में संघर्ष, हिंसा, प्राकृतिक आपदाएँ, जलवायु परिवर्तन एवं जनसंख्या विस्थापन के कारण मलेरिया के उच्च जोखिम वाले लोगों के समक्ष पहले से ही व्याप्त स्वास्थ्य असमानताएँ अधिक गंभीर हो गई हैं।
  • संवेदनशील वर्ग के लिए खतरा : मलेरिया से गर्भवती महिलाएँ एवं बालिकाएँ, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, मूल निवासी लोग, प्रवासी, दिव्यांग व्यक्ति और स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुंच वाले दूरदराज के क्षेत्रों के लोग प्रमुख रूप से प्रभावित होते हैं।

मलेरिया की रोकथाम के लिए सुझाव

  • निवेश की आवश्यकता : विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मजबूत डाटा प्रणालियों में निवेश का आह्वान किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य असमानताओं की निगरानी करने में सक्षम हो।
  • नवाचार : निष्पक्षता, लैंगिक समानता और मानवाधिकार मलेरिया-रोधी नवाचार के आधार होने चाहिए तथा रोग से सर्वाधिक प्रभावित लोगों को नए उपकरणों एवं तरीकों के डिजाइन व मूल्यांकन में शामिल किया जाना चाहिए।
  • वैक्सीन विकास : मलेरिया के खिलाफ़ एक सुरक्षित एवं प्रभावी वैक्सीन का विकास मलेरिया नियंत्रण, रोकथाम व उन्मूलन प्रयासों में महत्वपूर्ण होगा।

इसे भी जानिए!

मलेरिया के बारे में

  • मलेरिया प्लास्मोडियम (एक प्रकार का प्रोटोजोआ) से होने वाली बीमारी है जो मच्छरों द्वारा मनुष्यों में फैलती है।
    • यह बीमारी ज़्यादातर उष्णकटिबंधीय देशों में पाई जाती है।
    • इसका रोकथाम एवं उपचार संभव है।
    • यह व्यक्ति-से-व्यक्ति में नहीं फैलता है।

लक्षण 

  • हल्के लक्षणों में बुखार, ठंड लगना एवं सिरदर्द शामिल हैं।
  • गंभीर लक्षणों में थकान, भ्रम, दौरे एवं सांस लेने में कठिनाई शामिल है।

संवेदनशील वर्ग 

शिशुओं, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व लड़कियों, यात्रियों तथा एच.आई.वी. या एड्स से पीड़ित लोगों को गंभीर संक्रमण का अधिक खतरा होता है।

प्लास्मोडियम की प्रजातियाँ 

  • प्लास्मोडियम परजीवी की 5 ऐसी प्रजातियाँ हैं जो मनुष्यों में मलेरिया का कारण बनती हैं-
    • पी. फाल्सीपेरम (P. falciparum) सबसे घातक मलेरिया परजीवी है और अफ्रीकी महाद्वीप इससे सर्वाधिक प्रभावित है।
    • पी. विवैक्स (P. vivax) उप-सहारा अफ्रीका के बाहर अधिकांश देशों में प्रमुख मलेरिया परजीवी है।
    • मनुष्यों को संक्रमित कर सकने वाली अन्य 3 मलेरिया प्रजातियाँ हैं- पी. मलेरिया (P. malariae), पी. ओवेल (P. ovale) और पी. नोलेसी (P. knowlesi)।
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