असम में पक्षी विविधता पर सर्वेक्षण

(प्रारम्भिक परीक्षा, सामान्य अध्ययन 3: जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण।) 
  • सर्वेक्षण : असम के धेमाजी और लखीमपुर जिलों में फैले बोर्डोइबाम-बिलमुख पक्षी अभयारण्य (बीबीबीएस) में। 
  • प्रकाशित : जर्नल ऑफ थ्रेटन्ड टैक्सा में ।
  • सर्वेक्षण अवधि : अक्टूबर 2022 और मार्च 2024 के बीच बीबीबीएस में 154 दिनों में आयोजित किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर असम में 11.25 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर किया गया।

सर्वेक्षण के निष्कर्ष 

  • वर्ष 1997 में , बीबीबीएस में कुल 167 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। वर्ष 2022-2024 के सर्वेक्षण में केवल 47 प्रजातियाँ पाई गईं, जो 27 वर्षों में पक्षी प्रजातियों में लगभग 72% की गिरावट को दर्शाता है।
  • वर्ष 2018 के बाद से एवियन विविधता में नाटकीय गिरावट दर्ज की गई है।
  • वर्ष 2011 के एक सर्वेक्षण में 41 परिवारों में 133 पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया गया, जिसमें तब से लगातार गिरावट देखी गई है।
  • अप्रैल 2017 और मार्च 2018 के बीच एक अन्य सर्वेक्षण में पक्षियों की 120 प्रजातियाँ, मैक्रोफाइट्स की 133 प्रजातियाँ, मछलियों की 68 प्रजातियाँ और जलीय फ़र्न की 7 प्रजातियाँ दर्ज की गईं।

गिरावट के मुख्य कारण 

मानव-जनित गतिविधियाँ :

  • अत्यधिक मछली पकड़ना - अत्यधिक मछली पकड़ने से पक्षियों के लिए भोजन की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
  • अवैध शिकार-  पक्षियों की कुछ प्रजातियों को अवैध शिकार के लिए निशाना बनाया गया है, जिनमें छोटी सीटी बत्तख , फुलवस सीटी बत्तख , सफेद छाती वाली वॉटरहेन , भारतीय तालाब बगुला , पूर्वी धब्बेदार कबूतर और पीले पैर वाले हरे कबूतर शामिल हैं।
  • अण्डा संग्रहण- उपभोग या व्यापार के लिए पक्षियों के अण्डों का संग्रहण करने से पक्षियों की जनसंख्या में और कमी आती है तथा प्रजनन में बाधा उत्पन्न होती है।
  • कृषि कार्य- जल निकायों के पास कृषि उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनरी ने पक्षियों के शांतिपूर्ण वातावरण को बाधित किया है और उनके स्थानांतरण का कारक बना है। 
  • चारागाह भूमि के रूप में उपयोग-  अभयारण्य का उपयोग चारागाह भूमि के रूप में भी किया जाता है, जो पक्षियों के प्राकृतिक आवास को और अधिक बाधित करता है।

पर्यावरणीय प्रभाव :

  • आवास क्षरण - संयुक्त मानवजनित गतिविधियों के कारण आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण क्षरण हुआ है।
  • जल स्तर में गिरावट- आर्द्रभूमि आवासों के विनाश से जल स्तर में गिरावट आ सकती है, जिससे यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए कम अनुपयोगी हो जाएगी।
  • खाद्य श्रृंखला व्यवधान- जैव विविधता में गिरावट से खाद्य जाल प्रभावित होता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा होता है।
  • प्रवासी पक्षियों में कमी- आर्द्रभूमि क्षरण से प्रवासी पक्षियों की आबादी की वृद्धि की क्षमता बाधित होती है, जिसके परिणामस्वरूप मौसमी दौरे कम हो जाते हैं।
  • पोषक तत्वों के चक्र में धीमापन-  आर्द्रभूमि का क्षरण इस प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को और नुकसान पहुँच सकता है।
  • तत्काल संरक्षण की आवश्यकता : अध्ययन में पक्षी प्रजातियों में गिरावट को रोकने या कम से कम इसे धीमा करने के लिए बीबीबीएस में संरक्षण प्रयासों को तीव्र करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

असम की जैव विविधता

  • असम को भारत में सर्वाधिक जैव विविधता वाले राज्यों में से एक माना जाता है , जहां लगभग 950 पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें 17 स्थानिक प्रजातियां शामिल हैं, जो दुनिया में कहीं और नहीं पाई जाती हैं।
  • राज्य में 55 महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैवविविधता क्षेत्र (आईबीए) हैं , जो विभिन्न पक्षी प्रजातियों के लिए हॉटस्पॉट के रूप में कार्य करते हैं। 
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