संदर्भ
- हाल ही में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किया। शिकायत निवारण प्रणाली के आधुनिकीकरण की बदलती जरूरतों को पूरा करने हेतु, प्राधिकरण ने 7 मई 2026 को दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 के मसौदे पर एक परामर्श पत्र जारी किया, जिसमें क्रमशः 12 और 19 जून 2026 तक टिप्पणियां और प्रति-टिप्पणियां आमंत्रित की गईं।
संशोधित विनियमों की प्रमुख विशेषताएं
प्राप्त परामर्शों पर विचार करने के बाद प्राधिकरण ने संशोधन विनियमों को अंतिम रूप दे दिया है। इन संशोधनों के तहत किए गए प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं:
1. विनियमों की प्रयोज्यता का दायरा
- संशोधित विनियम उन इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे, जिनके ग्राहकों की संख्या पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक 10,000 से अधिक होगी। इसके साथ ही, पांच करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक वित्तीय कारोबार को प्रयोज्यता का वैकल्पिक आधार बनाने वाले मौजूदा प्रावधान को हटा दिया गया है। इससे विनियमों के लागू होने से संबंधित मानदंड अधिक सरल हो गए हैं।
2. शिकायत दर्ज कराने के लिए डिजिटल माध्यमों का विस्तार
- उपभोक्ताओं को अब शिकायत दर्ज कराने, अपील करने, सेवा अनुरोध प्रस्तुत करने और सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। पहले से उपलब्ध शिकायत केंद्र, वेबसाइट और वेब पोर्टल के अलावा, अब सेवा प्रदाताओं के मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी ये सभी सुविधाएं प्राप्त की जा सकेंगी। इससे उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों और अपीलों के लिए अधिक सुलभ विकल्प उपलब्ध होंगे।
3. शिकायत केंद्रों पर चौबीसों घंटे सहायता की सुविधा
- संशोधित प्रावधानों के अनुसार, सेवा प्रदाताओं को सप्ताह के सभी सातों दिन और चौबीसों घंटे उपभोक्ता सहायता उपलब्ध करानी होगी। वर्तमान में यह सुविधा प्रतिदिन केवल 16 घंटे तक सीमित है।
- उपभोक्ता सहायता के लिए ग्राहक सेवा प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, एआई एजेंटों, उपभोक्ता-केंद्रित तकनीकी समाधानों अथवा इनके संयोजन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, मानवीय सहायता की उपलब्धता प्रतिदिन न्यूनतम 16 घंटे सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, तकनीक आधारित सहायता प्रणालियों का संचालन उचित मानवीय निगरानी के तहत किया जाएगा। इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को किसी भी समय सहायता मिल सकेगी और सेवा प्रदाताओं के लिए शिकायत केंद्रों का संचालन भी अधिक सुविधाजनक होगा।
4. दिव्यांगजनों के लिए शिकायत निवारण सेवाओं की सुलभता
- प्रत्येक सेवा प्रदाता को अपने शिकायत केंद्र अथवा उपभोक्ता सहायता केंद्र में एक विशेष डेस्क या हेल्पलाइन स्थापित करनी होगी। यहां ऐसे कर्मचारी या सहायक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए, जो दिव्यांग उपभोक्ताओं की कॉल प्राप्त करने में सक्षम हों।
- इसके अतिरिक्त, सेवा प्रदाताओं को अपने मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट और वेब पोर्टल को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाना होगा। इसके लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित एक्सेसिबिलिटी संबंधी दिशा-निर्देशों और मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
5. अपील दायर करने की समय-सीमा में बदलाव
- शिकायत के निपटारे के बाद अपील प्रस्तुत करने की मौजूदा समय-सीमा 30 दिनों से घटाकर 15 दिन कर दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य उपभोक्ताओं को जल्द अपील करने का अवसर देना है, क्योंकि सामान्यतः वे शिकायत के समाधान से असंतुष्ट होने पर शीघ्र ही अपील करना चाहते हैं। वहीं, लंबी समय-सीमा बनाए रखने से सेवा प्रदाताओं पर अनुपालन का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
- अब उपभोक्ता ई-मेल, डाक, व्यक्तिगत रूप से या ग्राहक सेवा नंबर के माध्यम से अपील करने के मौजूदा विकल्पों के अलावा, मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट और वेब पोर्टल का उपयोग करके भी अपील दर्ज करा सकेंगे। इससे अपील प्रक्रिया अधिक आसान होगी और उनके निपटारे में तेजी आएगी।
6. अपीलीय प्राधिकरण की भूमिका और जवाबदेही में वृद्धि
- संशोधित विनियमों के तहत अपीलीय प्राधिकरण की संरचना और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया गया है। अब इसमें कम से कम एक ऐसा व्यक्ति होना अनिवार्य होगा, जो सेवा प्रदाता के प्रबंधन में नियमित कर्मचारी के रूप में कार्यरत हो और जिसे कम से कम पांच वर्ष का अनुभव प्राप्त हो।
- अपीलीय प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी कि वह प्राप्त अपील की जांच करे, शिकायत के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे और अपील प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपने अंतिम निर्णय से संबंधित सूचना उपभोक्ता को दे।
7. सलाहकार समिति के माध्यम से अपील निपटाने की व्यवस्था समाप्त
- अपीलों के मामलों का अधिक प्रभावी और निर्धारित समय-सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित करने के लिए सलाहकार समिति के माध्यम से अपीलों के निपटारे की पूर्व व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
8. ऑनलाइन फीडबैक सर्वेक्षण की शुरुआत
- उपभोक्ताओं को प्रदान की जाने वाली शिकायत निवारण सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए एक नई ऑनलाइन फीडबैक सर्वेक्षण व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक शिकायत या अपील का समाधान होने के बाद सेवा प्रदाता संबंधित उपभोक्ता से उसकी संतुष्टि के स्तर के बारे में फीडबैक प्राप्त करेगा।
- यह फीडबैक पांच अंकों के पैमाने पर लिया जाएगा, जिसमें पांच अंक 'पूरी तरह संतुष्ट' और एक अंक 'पूरी तरह असंतुष्ट' होने को दर्शाएगा। सेवा प्रदाताओं को इन सर्वेक्षणों से प्राप्त परिणामों को प्रत्येक तिमाही अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा।
9. वरिष्ठ प्रबंधन के समक्ष त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य
- शिकायतों और अपीलों के निपटारे की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए सेवा प्रदाताओं को प्रत्येक तिमाही एक रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट में शिकायतों एवं अपीलों के निपटारे की स्थिति के साथ-साथ फीडबैक सर्वेक्षण के परिणाम भी शामिल होंगे।
- यह रिपोर्ट सेवा प्रदाता के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अथवा निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इस प्रावधान का उद्देश्य शिकायत निवारण व्यवस्था की नियमित समीक्षा और उच्च प्रबंधन स्तर पर उसकी निगरानी सुनिश्चित करना है।
10. उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति का गठन
- संशोधित विनियमों में प्रत्येक सेवा प्रदाता के लिए उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति गठित करना अनिवार्य किया गया है। इस समिति का मुख्य कार्य सेवा प्रदाता की शिकायत निवारण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर नजर रखना और समय-समय पर उसकी समीक्षा करना होगा।
- समिति में सेवा प्रदाता के प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्राधिकरण के साथ पंजीकृत प्रत्येक उपभोक्ता संगठन से कम से कम एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा।
- इसके अलावा, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किसी सेवा प्रदाता के 10,000 से अधिक ग्राहक हैं, वहां के प्रतिनिधियों की समिति में भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। इस समिति की बैठक वर्ष में कम से कम एक बार आयोजित करना आवश्यक होगा, ताकि शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा की जा सके।
11. नियामक समीक्षा की नई व्यवस्था
- सेवा प्रदाताओं की शिकायत निवारण प्रणाली की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए संशोधित विनियमों में नियामक समीक्षा का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इसके तहत प्राधिकरण समय-समय पर सेवा प्रदाताओं की शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा कर सकेगा।
- इस समीक्षा के अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियां शामिल होंगी:
- सेवा प्रदाताओं के संबंधित रिकॉर्ड का ऑडिट और निरीक्षण करना।
- सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रस्तुत त्रैमासिक प्रदर्शन रिपोर्ट का ऑडिट एवं विश्लेषण करना।
- उपभोक्ताओं से प्राप्त फीडबैक के आधार पर शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करना।
12. नियमों का उल्लंघन करने पर आर्थिक दंड
- संशोधित विनियमों में आर्थिक दंड से संबंधित प्रावधान भी जोड़े गए हैं। यदि ऑडिट, निरीक्षण, विश्लेषण या नियामक समीक्षा के दौरान यह सामने आता है कि किसी शिकायत अथवा अपील का निपटारा विनियमों में निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए किया गया है, तो संबंधित सेवा प्रदाता पर आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा।
- इसके अलावा, निर्धारित समय पर त्रैमासिक प्रदर्शन रिपोर्ट जमा नहीं करने अथवा उसे विलंब से प्रस्तुत करने की स्थिति में भी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
निष्कर्ष
- इन संशोधनों का प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी, सुलभ और जवाबदेह बनाना है। नए प्रावधानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को बेहतर डिजिटल सुविधाएं, चौबीसों घंटे शिकायत केंद्रों तक पहुंच और दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल सहायता सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, शिकायतों और अपीलों को दर्ज कराने तथा उनके समयबद्ध निपटारे की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।