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आतंकवाद और नशीली दवाओं का गठजोड़(terrorism and drug nexus)

प्रारम्भिक परीक्षा: गोल्डन क्रीसेंट, गोल्डन ट्रायंगल।
मुख्य परीक्षा,सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र:3- आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

संदर्भ 

  • वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर नशीले पदार्थों का व्यापार खतरनाक रूप लेता जा रहा है। 
  • भारत भी व्यापक स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी की समस्या का सामना कर रहा है।  

नशीले पदार्थों का व्यापार क्या है?

  • नशीले पदार्थों का व्यापार से तात्पर्य अफीम, हेरोइन, कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी दवाओं के अवैध उत्पादन, वितरण और बिक्री से है।

भारत में नशीले पदार्थों के व्यापार का प्रसार 

  • भारत दुनिया के सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादन क्षेत्र गोल्डन क्रीसेंट तथा सबसे बड़े अफीम उपभोग क्षेत्र गोल्डन ट्रायंगल के मध्य में स्थित है।

drug-nexus

  • भारत अन्य देशों के लिए एक बड़ा बाजार और एक पारगमन मार्ग दोनों बनता जा रहा है।
  • ड्रग माफिया द्वारा इन दो क्षेत्रों से देश में ड्रग्स विशेष रूप से हेरोइन और मेथामफेटामाइन का व्यापक रूप से प्रसार कर रहें है। 
  • दुनिया में नशीली दवाओं की करीब 90 फीसदी मांग इन्हीं दोनों क्षेत्रों से पूरी की जा रही है। 

ड्रग्स की सप्लाई के लिए ड्रोन का इस्तेमाल

  • हाल ही में, पंजाब में सरहद पार ड्रग्स और हथियारों की सप्लाई के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की एक नई घटना सामने आई है।

कोकीन के लिए हॉट डेस्टिनेशन 

  • भारत आश्चर्यजनक रूप से कोकीन के लिए एक हॉट डेस्टिनेशन बन गया है, जिसे दक्षिण अमेरिकी ड्रग कार्टेल द्वारा नियंत्रित किया जाता है। 
  • हाल ही में हुई जांच से कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, हांगकांग और कई यूरोपीय देशों में स्थित NRI के साथ-साथ भारत में स्थानीय ड्रग डीलर्स और गैंगस्टर्स के साथ इन कार्टेलों के संबंध का पता चला है।

भारत में नशीले पदार्थों के व्यापार के संबंध में चिंता

  • यह एक ऐसी सामाजिक समस्या है, जो युवाओं और परिवारों को नुकसान पहुँचा रही है। 
  • भारत में नशीले पदार्थों  के अत्यधिक सेवन की वजह से व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। 
  • नशीले पदार्थों  के बिक्री से प्राप्त धन का उपयोग विध्वंसकारी गतिविधियों में किया जाता है ,जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

आतंकवाद में वृद्धि

  • सीमा पार से मादक पदार्थों के तस्करों के संबंध लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों से पाए गए हैं।  
  • अवैध धन का उपयोग ISIS द्वारा प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है।

संगठित अपराध 

  • संगठित गिरोह, जो मुख्य रूप से अपने स्थानीय क्षेत्रों में जबरन वसूली की गतिविधियों को अंजाम देते थे, नशीले पदार्थों के व्यापार नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, जिससे उनको हथियार की प्राप्ति हो सके। 
  • इस वजह से आतंकवादियों और संगठित गिरोहों/अंडरवर्ल्ड के बीच एक गठजोड़ बनाता है। 

डार्कनेट बाजारों के माध्यम से प्रसार 

  • अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग 62 प्रतिशत डार्कनेट का उपयोग अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जा रहा है। 

सीमा सुरक्षा

  • हेरोइन और मेथामफेटामाइन-उत्पादक क्षेत्रों में सीमाओं पर पर्याप्त निगरानी का अभाव है तथा कथित तौर पर विद्रोही समूहों के नियंत्रण में हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से खुफिया व्यवस्थाओं द्वारा समर्थित हैं।
  • यहां अवैध हथियारों का निर्माण किया जाता है और भारत में सक्रिय भूमिगत समूहों को इसकी आपूर्ति की जाती है।

नशीले पदार्थों की तस्करी एक गंभीर सुरक्षा मुद्दा क्यों है?

  • अवैध धन
    • नशीली दवाओं की तस्करी एक महत्वपूर्ण मात्रा में अवैध धन उत्पन्न करती है, जिसका उपयोग अन्य अवैध गतिविधियों जैसे आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के लिए किया जा सकता है।
    • सामाजिक और आर्थिक परिणाम
      • नशीली दवाओं की लत और दुरुपयोग के गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं, जिसमें अपराध दर में वृद्धि और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव शामिल है।
      • क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करता है
        • नशीले पदार्थों की तस्करी उन क्षेत्रों में अस्थिरता उत्पन्न कर सकती है जो पहले से ही संघर्ष और हिंसा की चपेट में हैं क्योंकि प्रतिद्वंद्वी समूह आकर्षक व्यापार पर नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।

        नशीले पदार्थों की तस्करी के मुद्दे को हल करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम

        • नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों पर राष्ट्रीय नीति 
          • भारत में मादक पदार्थों के व्यापार के मुद्दे को हल करने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा है। 
        • नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो(NCB)
          • NCB भारत में मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है। 
          • यह नशीली दवाओं की तस्करी को रोकने, नशीली दवाओं के शिपमेंट को रोकने और नशीली दवाओं के तस्करों पर मुकदमा चलाने के लिए अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है।
          • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
            • नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों पर सार्क कन्वेंशन (SAARC Convention)
            • नशीली दवाओं की जब्ती
              • वर्ष 2020 में, NCB ने 9,500 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त की और 5,000 से अधिक लोगों को ड्रग से संबंधित मामलों में गिरफ्तार किया।
              • भारत सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनजागरुकता अभियान को बढ़ावा दे रही हैं।
              • प्रौद्योगिकी का उपयोग 
                • उदाहरण के लिए, NCB मादक पदार्थों की तस्करी पर नज़र रखने के लिए सोशल मीडिया और अन्य तकनीकी माध्यम का उपयोग कर रहा है।
                • सीमा सुरक्षा को मजबूत करना
                  • भारत सरकार सीमाओं की निगरानी के लिए ड्रोन और सेंसर जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।

                  वित्तीय खुफिया जानकारी का उपयोग 

                  • कानून प्रवर्तन एजेंसियां मादक पदार्थों के तस्करों के पैसे के संदिग्ध लेनदेन को ट्रैक करने के लिए वित्तीय खुफिया जानकारी का उपयोग कर रही हैं।

                  आगे का रास्ता

                  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग 
                    • भारत को ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC)  जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
                  • कानून प्रवर्तन को मजबूत करना।
                  • नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को अधिक शक्ति दी जानी चाहिए, जिससे इसे मादक पदार्थों के तस्करों पर नज़र रखने और दवाओं को जब्त करने के लिए और अधिक सक्रिय बनाया जा सके। 
                  • जन जागरूकता
                    • भारत को नशीले पदार्थों के हानिकारक प्रभावों और नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के बीच संबंधों के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए एक सतत जन जागरूकता अभियान शुरू करने की आवश्यकता है।
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