स्ट्रोक के संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य सभा का ऐतिहासिक कदम

संदर्भ 

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की निर्णय लेने वाली संस्था विश्व स्वास्थ्य सभा ने स्ट्रोक को लेकर दुनिया का पहला वैश्विक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है। इस प्रस्ताव के जरिए दुनिया भर के देशों से अपील की गई है कि वे स्ट्रोक को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती मानें और इसके इलाज व देखभाल के पूरे सिस्टम को मजबूत करें।   

प्रस्ताव के मुख्य स्तंभ 

इस नए वैश्विक प्रस्ताव में स्ट्रोक से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति पर जोर दिया गया है:

  • शुरुआती रोकथाम और जागरूकता: बीमारी के खतरों को पहले ही पहचानना। 
  • त्वरित चिकित्सा और आपातकालीन सेवाएं: स्ट्रोक होने पर बिना समय गंवाए इलाज मिलना। 
  • पुनर्वास (Rehabilitation): बीमारी के बाद मरीजों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटने के लिए बेहतर सुविधाएं देना। 
  • जवाबदेही: वैश्विक स्तर पर इस दिशा में हो रहे कार्यों की रिपोर्टिंग और निगरानी तय करना।   

स्ट्रोक क्या है ? 

  • चिकित्सीय भाषा में स्ट्रोक एक बेहद गंभीर और आपातकालीन स्थिति है।
    • कारण: यह तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह (Blood Flow) बाधित हो जाता है। ऐसा किसी खून की नली में रुकावट (Blockage) आने या उसके फटने (Bleeding) के कारण हो सकता है।
    • प्रभाव: खून न मिलने से दिमाग की कोशिकाएं तेजी से मरने लगती हैं, जिससे शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं। 

वैश्विक आंकड़े 

  • दुनिया भर में हर वर्ष करीब 1.2 करोड़ लोग स्ट्रोक की चपेट में आते हैं। दुखद बात यह है कि इनमें से आधे से अधिक मरीजों की मौत हो जाती है, और जो जीवित बचते हैं, उनमें से हर तीन में से दो लोग हमेशा के लिए किसी न किसी शारीरिक या मानसिक विकलांगता के शिकार हो जाते हैं।  

भारत में स्ट्रोक की चिंताजनक स्थिति 

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ स्ट्रोक के आंकड़ों और भारतीय विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में स्थिति तेजी से गंभीर हो रही है:

विषय

भारतीय स्थिति और आंकड़े

सालाना मामले

प्रति 1 लाख की आबादी पर 108 से 172 नए मरीज।

एक महीने के भीतर मृत्यु दर

स्ट्रोक होने के एक महीने के अंदर 18% से 42% मरीजों की मौत।

डॉक्टरों की भारी कमी

इतनी बड़ी आबादी के इलाज के लिए देश में केवल लगभग 8,000 न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन हैं।

उम्र का प्रभाव

भारत में दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कम उम्र के लोग स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं।

भारत के लिए वेक-अप कॉल (जागने का संकेत) 

  • वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर के. गणपति और न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट डॉ. ई.एस. कृष्णमूर्ति के अनुसार, यह वैश्विक प्रस्ताव भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी और अवसर दोनों है। 

मुख्य जोखिम कारक 

जेनेटिक (आनुवंशिक) कारणों के अलावा हमारी खराब जीवनशैली इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है: 

  • हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और डायबिटीज (मधुमेह) 
  • तंबाकू, धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन 
  • मोटापा, अस्वस्थ खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता 
  • बढ़ता वायु प्रदूषण 

भारत के पास समाधान के विकल्प 

  • विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास आज एक मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन टेलीकॉम नेटवर्क है। इस डिजिटल ताकत का इस्तेमाल करके भारत बड़े पैमाने पर न्यूरो-रिहैबिलिटेशन (मस्तिष्क पुनर्वास) और जागरूकता अभियान चला सकता है। 
  • यह प्रस्ताव भारत को यह साबित करने का मौका देता है कि तकनीक के जरिए स्ट्रोक की रोकथाम और उसका प्रभावी प्रबंधन कैसे संभव है।

विश्व स्वास्थ्य सभा के बारे में 

  • विश्व स्वास्थ्य सभा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का निर्णय लेने वाला निकाय है। 
  • इसमें डब्ल्यूएचओ के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग लेते हैं और कार्यकारी बोर्ड द्वारा तैयार किए गए विशिष्ट स्वास्थ्य एजेंडा पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • स्वास्थ्य सभा का आयोजन प्रतिवर्ष जिनेवा, स्विट्जरलैंड में होता है।  

मुख्य कार्य

  • संगठन की नीतियों का निर्धारण करना,
  • महानिदेशक की नियुक्ति करना, 
  • वित्तीय नीतियों की निगरानी करना और 
  • प्रस्तावित कार्यक्रम बजट की समीक्षा और अनुमोदन करना है।  
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT