संदर्भ
भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का गौरव बढ़ाया है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशन में तैनात मेजर बराक को वैश्विक संस्था द्वारा प्रतिष्ठित 'सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' (2025) पुरस्कार के लिए चुना गया है।
सम्मान की वजह और मुख्य प्रयास
मेजर बराक को यह सम्मान पश्चिम एशियाई देश लेबनान में निम्नलिखित विशेष कार्यों के लिए दिया जा रहा है:
- सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय महिलाओं और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाना।
- जेंडर संवेदनशीलता: शांति अभियानों में शामिल सैनिकों के लिए जेंडर आधारित संवेदनशीलता ट्रेनिंग आयोजित करना।
- वर्तमान में वह संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (UNIFIL) में भारतीय बटालियन के तहत फीमेल एंगेजमेंट टीम (FET) का नेतृत्व कर रही हैं। इसके अलावा, मेजर बराक के नाम भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट होने का गौरव भी दर्ज है।
- यह सम्मान आगामी 29 मई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
यह गौरव हासिल करने वाली तीसरी भारतीय अधिकारी
मेजर अभिलाषा बराक से पहले भी दो भारतीय महिला अधिकारी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजी जा चुकी हैं:
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अधिकारी का नाम
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पुरस्कार का वर्ष
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तैनात मिशन (देश)
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विशेष उपलब्धि
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मेजर सुमन गवानी
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2019
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दक्षिण सूडान (UNMISS)
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ब्राजीलियाई नौसेना अधिकारी कमांडर कार्ला मॉन्टेइरो डी कास्त्रो अराउजो के साथ संयुक्त रूप से विजेता।
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मेजर राधिका सेन
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2023
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कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (MONUSCO)
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कांगो में सराहनीय शांति प्रयासों के लिए सम्मानित।
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मेजर अभिलाषा बराक
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2025
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लेबनान (UNIFIL)
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वर्तमान विजेता (भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट पायलट)।
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यूएन सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर पुरस्कार के बारे में
- शुरुआत: इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के विभाग (DPO) के सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा की गई थी।
- उद्देश्य: इसका मुख्य लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 (महिला, शांति और सुरक्षा) के सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने वाले सैनिकों को सम्मानित करना है।
- चयन प्रक्रिया: शांति अभियानों में जेंडर दृष्टिकोण को सबसे बेहतरीन तरीके से लागू करने वाले अधिकारियों को विभिन्न मिशनों के फोर्स कमांडरों और मिशन प्रमुखों द्वारा नामांकित किया जाता है, जिसके बाद विजेता का चुनाव होता है।
वैश्विक शांति मिशनों में भारत की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैनिकों और पुलिस बल का योगदान देने के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
यूएनआईएफआईएल में भारतीय हिस्सेदारी (फरवरी 2026 तक):
- लेबनान मिशन (यूएनआईएफआईएल) में कुल 48 देशों के 7,538 शांति सैनिक तैनात हैं।
- इनमें 642 जवानों के योगदान के साथ भारत चौथे स्थान पर है। इस सूची में शीर्ष तीन देश क्रमशः इटली (784), इंडोनेशिया (756) और स्पेन (660) हैं।
सुरक्षा को लेकर भारत का रुख:
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, मार्च (2026) में भारत ने लगभग 30 अन्य भागीदार देशों के साथ मिलकर लेबनान में जारी हिंसा पर गहरी चिंता जताई थी।
- भारत ने शांति सैनिकों (ब्लू हेलमेट्स) पर होने वाले हमलों का कड़ा विरोध करते हुए सभी पक्षों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी। साथ ही, इज़राइल के खिलाफ हिज्बुल्लाह की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई को भी गैर-जिम्मेदाराना करार दिया था।
संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) के बारे में
- संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) दक्षिणी लेबनान में एक शांतिरक्षा मिशन है। इसकी स्थापना सुरक्षा परिषद द्वारा 1978 में संकल्प 425 और 426 के माध्यम से की गई थी। 2006 में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अन्य कार्यों के साथ-साथ शत्रुता की समाप्ति की निगरानी करने के लिए यूएनआईएफआईएल के जनादेश को मजबूत किया।
- यूनिफिल में लगभग 50 सैन्य योगदान देने वाले देशों से आए लगभग 8,500 शांति सैनिक हैं।
- यह मिशन परिचालन और अन्य गतिविधियों के गहन स्तर को बनाए रखता है, जो परिचालन क्षेत्र में दिन-रात लगभग 14,500 गतिविधियों के बराबर है।
- सत्रह प्रतिशत गतिविधियाँ लेबनानी सशस्त्र बलों के साथ संयुक्त रूप से संचालित की जाती हैं। यूनिफिल को पाँच पोतों वाले समुद्री कार्य बल का सहयोग प्राप्त है।