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थियोबाल्डियस कोंकणेंसिस

भारत एवं यूनाइटेड किंगडम के शोधकर्ताओं की एक टीम ने महाराष्ट्र में स्थलीय घोंघे (Land Snail) की एक प्रजाति की खोज की है।  

स्थलीय घोंघे की नई प्रजाति के बारे में 

  • परिचय : ये घोंघे स्थलीय गैस्ट्रोपॉड मोलस्क होते हैं और समुद्री या मीठे जल के घोंघों के विपरीत भूमि पर रहते हैं। 
    • आवास के आधार पर आमतौर पर इन्हें स्थलीय घोंघे (Land Snails), मीठे जल के घोंघे (Freshwater Snails) और समुद्री घोंघे (Sea Snails) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। 
  • खोज स्थल : महाराष्ट्र का कोंकण क्षेत्र 
  • नामकरण : कोंकण क्षेत्र में खोजे जाने के कारण इसका नाम ‘थियोबाल्डियस कोंकणेंसिस’ (Theobaldius konkanensis) रखा गया है।
  • वंश (Genus): थियोबाल्डियस (Theobaldius)
  • स्थानिक :  शोधकर्ताओं के अनुसार घोंघा की यह प्रजाति उत्तरी पश्चिमी घाट के  कोंकण क्षेत्र में स्थानिक है। 
  • विशेषताएँ : 
    • यह प्रजाति मुख्यतः उष्णकटिबंधीय सदाबहार एवं अर्ध-सदाबहार वनों में पाई जाती है।
    • यह प्रजाति दिन एवं रात दोनों समय सक्रिय रहती है तथा दोपहर में छायादार स्थानों पर आसानी से मिल जाते हैं।
    • नई प्रजाति अन्य सभी भारतीय थियोबाल्डियस प्रजातियों से भिन्न है।
    • कोंकण क्षेत्र में प्रमुख जोखिम : इस क्षेत्र में मानवजनित गतिविधियों के बढ़ने के कारण स्थलीय घोंघा की अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो गई हैं जिससे इनका वितरण भी अनियमित हो गया है।

स्थलीय घोंघे की पारिस्थिकी भूमिका 

  • जलवायु के प्रति संवेदनशील होने के कारण उत्कृष्ट जैव-संकेतक के रूप में 
  • अपघटक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कार्बनिक पदार्थों के अपघटन से मृदा के पोषक चक्रण में योगदान
  • पक्षियों, सरीसृपों एवं स्तनधारियों सहित विभिन्न जानवरों के लिए भोजन के स्रोत के रूप में 

क्या आप जानते हैं?

वर्तमान में वैश्विक स्तर पर थियोबाल्डियस की 20 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो भारत, श्रीलंका एवं इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में वितरित हैं।

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