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जेब्राफिश एवं हड्डी पुनर्जनन

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने ज़ेब्राफ़िश में रीढ़ की हड्डी के पुनर्जनन (Regeneration) में शामिल सभी कोशिकाओं का मानचित्रण किया है।  

रीढ़ की हड्डी का पुनर्जनन

  • ज़ेब्राफ़िश में क्षतिग्रस्त रीढ़ की हड्डी पूर्णतया ठीक हो सकती है, जिससे मनुष्यों में रीढ़ की हड्डी में चोटों के उपचार की संभावना में वृद्धि होती है। 
  • इस अध्ययन के अनुसार, क्षतिग्रस्त न्यूरॉन्स का जीवित रहना एवं अनुकूलन क्षमता, रीढ़ की हड्डी के ठीक होने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्तनधारियों के विपरीत ज़ेब्राफ़िश न्यूरॉन्स में चोट के बाद अपने कार्यों को बदल देते हैं। ये उपचार प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। 
  • मनुष्यों एवं स्तनधारियों में रीढ़ की हड्डी की चोट न्यूरॉन्स को नष्ट कर देती हैं, जिससे इनके पुनर्जनन प्रयासों में बाधा आती है। 

जेब्राफिश के बारे में 

  • यह मछली के ‘मिनो कुल’ की प्रजाति है। यह मीठे पानी की एक छोटी मछली है। यह मुख्यत: भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल एवं म्यांमार सहित दक्षिण एशिया की मूल प्रजाति है। 
  • यह विभिन्न जल क्षेत्रों, उथले एवं स्थिर तालाबों, धीमी गति से प्रवाहित होने वाली धाराओं और चावल के खेतों में भी पाई जाती है। 
  • इसे IUCN की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में ‘संकटमुक्त’ (Least Concern) प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • ज़ेब्राफ़िश का भ्रूण पारदर्शी होता है। अंडे से लार्वा तक इसका विकास केवल तीन दिनों में होता है।
  • ये बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील नहीं हैं और इनकी प्रजनन क्षमता भी अधिक होती है। वर्तमान में ज़ेब्राफ़िश बीमारी एवं दवा की खोज में अनुसंधान के लिए एक मॉडल के रूप में लोकप्रियता हासिल कर रही है।
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