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जीरो डेब्रिस चार्टर

(प्रारम्भिक परीक्षा : अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: अंतरिक्ष विज्ञान)

संदर्भ 

बारह देशों ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) या यूरोपीय संघ अंतरिक्ष परिषद में ‘जीरो डेब्रिस चार्टर’ (Zero Debris Charter) पर हस्ताक्षर किए हैं। 

चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले देश 

  • इन 12 देशों में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, साइप्रस, एस्टोनिया, जर्मनी, लिथुआनिया, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्वीडन एवं यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। 
  • इनके अलावा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने भी एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में जीरो डेब्रिस चार्टर पर हस्ताक्षर किया है।
  • इस चार्टर के माध्यम से पृथ्वी की कक्षा में मानव गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।

क्या है जीरो डेब्रिस चार्टर

  • जीरो डेब्रिस चार्टर वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा तटस्थ बनाने के लिए एक वैश्विक अग्रणी प्रयास के साथ वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के लिए एक व्यापक समुदाय-संचालित व समुदाय-निर्माण पहल है।
  • इसका अनावरण नवंबर 2023 में सेविले बैठक (स्पेन) में ESA अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन में किया गया था।

DEBRIS

क्या है इसका उद्देश्य

  • वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा तटस्थ बनाना
  • सदस्य राज्यों को उनके मिशनों के लिए शून्य मलबा दृष्टिकोण लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना 
  • साझेदारों व अन्य हितधारकों को समान रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित करना 

क्यों पड़ी इस चार्टर की जरूरत

  • कक्षा में उपग्रह हमारे आधुनिक जीवन का आधार हैं। इनका उपयोग अंतरिक्ष विज्ञान, पृथ्वी अवलोकन, मौसम विज्ञान, जलवायु अनुसंधान, दूरसंचार, नेविगेशन एवं बहुत कुछ के लिए किया जाता है।
  • किंतु निष्क्रिय अंतरिक्ष उपकरणों एवं कृत्रिम उपग्रहों के घूमते टुकड़े पृथ्वी की कक्षा में फंस गए हैं और समय के साथ इन मलबे वाली वस्तुओं की संख्या एवं द्रव्यमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे सक्रिय उपग्रहों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।
  • पृथ्वी की कक्षा में एक मिलीमीटर से बड़े अंतरिक्ष मलबे के 130 मिलियन टुकड़े मौजूद हैं, जो वर्तमान एवं भविष्य के उपग्रहों के लिए खतरा हैं।
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