• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

सड़े-गले पेड़ों से होने वाला कार्बन उत्सर्जन 

  • 13th September, 2021

(प्रारंभिक परीक्षा- पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

पृष्ठभूमि

वैश्विक दृष्टिकोण से देखा जाए तो वन काफी मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसलिये ये पर्यावरण की सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं दूसरी ओर वैश्विक कार्बन चक्र में भी सड़े-गले या मृत पेड़  योगदान देते हैं, हालाँकि, कार्बन चक्र में इनकी भूमिका के बारे में अधिक जानकारी का आभाव है। 

संबंधित अध्ययन

  • लकड़ी का अपघटन या नष्ट होना और इसमें शामिल पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण (रीसायकल) वनों में होने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है।
  • दुनिया भर में सड़ने वाली लकड़ी से निकलने वाले कार्बन और इस प्रक्रिया में कीटों की भूमिका से संबंधित प्रश्नों के उत्तर के लिये बवेरियन फॉरेस्ट नेशनल पार्क द्वारा स्थापित एक वैश्विक शोध परियोजना में अध्ययन किया गया है।
  • यह अध्ययन जूलियस मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्जबर्ग और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख के सहयोग से किया गया है। यह अध्ययन नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन-विधि व परिणाम

  • छह महाद्वीपों के 55 जंगलों पर शोधकर्ताओं ने अपघटन या नष्ट होने की दर पर जलवायु के प्रभाव का आकलन करने के लिये 140 से अधिक वृक्ष प्रजातियों की लकड़ी को चुना। 
  • इनमें से आधी लकड़ी को जालीदार पिंजरों में रखा गया था। इन पिंजरों ने कीड़ों को अपघटन में शामिल होने से रोका और लकड़ी के अपघटन या नष्ट होने में उनके योगदान की मात्रा निर्धारित की।
  • एकत्र किये गए आंकड़ों से पता चलता है कि अपघटन या नष्ट होने की दर और कीड़ों का योगदान जलवायु पर अत्यधिक निर्भर करता है और यह तापमान बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। गर्म क्षेत्रों में अधिक वर्षा अपघटन की प्रक्रिया को तीव्र करती है, जबकि कम तापमान वाले क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
  • कठिन परिस्थितियों में दुनिया भर में 50 शोध समूहों ने तीन वर्षों में यह प्रयोग पूरा किया। कुछ क्षेत्रों को हाथियों से बचाने के लिये विस्तृत उपायों का भी उपयोग करना आवश्यक था। साथ ही, जंगल की आग और बाढ़ के कारण वहां पुनर्निर्माण कार्य भी गया था। 

वैश्विक कार्बन चक्र

  • अनुसंधानकर्ताओं एवं प्रयोगकर्ताओं के अनुसार, प्रयोग के आधार पर दुनिया भर के कार्बन चक्र में मृत पेड़ों की भूमिका के बारे में पता लगाया गया। अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में मृत पेड़ों (डेडवुड) द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 10.9 गीगा टन कार्बन छोड़ा जाता है। 
  • इस संदर्भ में, कार्बन का एक हिस्सा मिट्टी में अवशोषित हो जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा वायुमंडल में मिल जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मृत पेड़ों से होने वाला उत्सर्जन जीवाश्म ईंधन से होने वाले उत्सर्जन के लगभग 115 प्रतिशत के बराबर है।
  • 93 प्रतिशत उष्णकटिबंधीय वनों का इस परिणाम में असमान रूप से योगदान रहता हैं क्योंकि इन वनों की लकड़ियों का अधिक द्रव्यमान उनके तेज़ी से अपघटन या नष्ट होने की प्रक्रियाओं के साथ जुड़ा हुआ होता है।
  • समशीतोष्ण और बोरियल जंगलों में अपघटन काफी धीमा होता है, जो यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में सड़े-गले या मृत पेड़ों से कार्बन को लंबे समय तक संग्रहीत किया जाता है।
  • लगभग एक-तिहाई लकड़ी का अपघटन कीड़े उस लकड़ी को खाकर करते हैं। हालाँकि, यह प्रक्रिया ज़्यादातर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तक ही सीमित है। इस प्रकार, बोरियल और समशीतोष्ण जंगलों में कीड़ों द्वारा किया गया योगदान बहुत कम या सीमित है।
  • यह अध्ययन वैश्विक कार्बन चक्र में सड़े-गले या मृत पेड़ों द्वारा निभाई गई भूमिका और लकड़ी के अपघटन में कीड़ों के कार्यात्मक महत्त्व पर प्रकाश डालता है। जैव-विविधता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन के कारण कार्बन चक्रों के वैश्विक मॉडलिंग में अंतर देखा जा सकता है।
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