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राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (NMIS) 2021-22

प्रारम्भिक परीक्षा : राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (2021-22)
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र २ - सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

संदर्भ 

  • हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) ने मिलकर राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (NMIS) 2021-22 के आँकड़े जारी किए।

महत्त्वपूर्ण बिन्दु 

  • सर्वेक्षण के अनुसार, कर्नाटक सबसे "अभिनव(Innovative)" राज्य है, इसके बाद दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव (DNH&DD), तेलंगाना और तमिलनाडु हैं।
  • तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में क्रमशः 46.18%, 39.10% और 31.90% पर अभिनव फर्मों का उच्चतम हिस्सा था।
  • ओडिशा, बिहार और झारखंड ने क्रमशः 12.78%, 13.47% और 13.71% पर ऐसी फर्मों की सबसे कम हिस्सेदारी की सूचना दी।
  • वर्ष 2011 में पहला राष्ट्रीय नवाचार सर्वेक्षण जारी किया गया था
  • इस सर्वेक्षण का उद्देश्य भारतीय विनिर्माण फर्मों का नवोन्मेषी प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।
  • सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि सबसे अधिक "नवाचार के लिए बाधाएं" आंतरिक धन की कमी, उच्च नवाचार लागत और बाहरी स्रोतों से वित्तपोषण की कमी है।

सर्वेक्षण के घटक

(1) फर्म-स्तरीय सर्वेक्षण

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  • फर्म-स्तरीय सर्वेक्षण में , फर्मों द्वारा किए गए नवाचारों और अभिनव उपायों के प्रकार से संबंधित डेटा पर ध्यान दिया गया है।
  • इस सर्वेक्षण में एक फर्म में नवाचार गतिविधियों को प्रभावित करने वाले कारकों को रिकॉर्ड करने के अलावा, नवाचार की प्रक्रिया, वित्त तक पहुंच, संसाधनों और नवाचार के लिए जानकारी आदि को शामिल किया गया हैं।

(2) नवाचार सर्वेक्षण की क्षेत्रीय प्रणाली

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  • नवाचार सर्वेक्षण की क्षेत्रीय प्रणाली के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन सिस्टम और फर्मों में इनोवेशन हासिल करने में इसकी भूमिका को मापा गया।
  • यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनिंदा 5 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारकों, नवाचार की बाधाओं और नीतिगत उपकरणों के अभिसरण या विचलन को मापता है।

सर्वेक्षण का महत्व 

  • यह मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम, विशेष रूप से उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं में मदद करेगा।
  • यह इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद करेगा।


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