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कोहरे में रेलवे और एयरलाइंस का संचालन

चर्चा में क्यों ?

सर्दियों में कोहरा न केवल दृश्यता को प्रभावित करता है, बल्कि रेलवे और एयरलाइन परिचालन में भी बड़ी बाधाएँ उत्पन्न करता है। विशेष रूप से उत्तर भारत में, इस मौसम में यात्रियों को अक्सर देरी और उड़ानों या ट्रेनों के रद्द होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उत्तर भारत में कोहरा

  • उत्तर भारत में सर्दियों में बनने वाला मुख्य कोहरा विकिरण कोहरा है। यह कोहरा तब बनता है जब रात के समय जमीन तेजी से ठंडी हो जाती है और हवा स्थिर रहती है। इस प्रक्रिया में नमी संघनित होकर जमीनी सतह के पास कोहरे के रूप में जमा हो जाती है।
  • कोहरे की सतह के पास धुंध होने से दृश्यता और भी कम हो जाती है। दिल्ली और आसपास के शहरों में प्रदूषण के कारण कोहरा अधिक घना और लंबे समय तक बना रहता है।
  • दृश्यता कम होने से हवाई और रेल मार्गों पर संचालन बाधित होता है। कोहरे के दौरान ट्रेन और विमान दोनों की गति कम हो जाती है, जिससे देरी और रद्दीकरण की संभावना बढ़ जाती है।

हवाई अड्डों और एयरलाइंस का प्रबंधन

हवाई अड्डों और एयरलाइंस कोहरे या धुंध जैसी कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा और संचालन बनाए रखने के लिए कई विशेष उपाय करती हैं। इन उपायों में तकनीकी उपकरण, प्रशिक्षित क्रू और मौसम निगरानी शामिल हैं।  

1. कम दृश्यता प्रक्रियाएँ (Low Visibility Procedures - LVP)

  • जब कोहरा या धुंध के कारण दृश्यता बहुत कम हो जाती है, तो हवाई अड्डे विशेष परिचालन नियमों का पालन करते हैं। इन नियमों का उद्देश्य विमान को सुरक्षित तरीके से टेक-ऑफ और लैंड करने में मदद करना है।
  • मुख्य प्रक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
    • LVTOT (Low Visibility Take-Off)
    • कम दृश्यता में विमान के टेक-ऑफ को सुरक्षित बनाने के लिए इस्तेमाल होती है।
    • पायलट विशेष संकेतकों और उपकरणों की मदद से रनवे पर विमान को सही दिशा में संचालित करते हैं।
    • यह सुनिश्चित करता है कि कोहरे में भी विमान सुरक्षित उड़ान भर सके।
  • ILS CAT IIIB लैंडिंग (Instrument Landing System – Category IIIB)
    • अत्यंत कम दृश्यता (50 मीटर तक) में विमान को सुरक्षित और सटीक लैंडिंग करने की तकनीक।
    • इसमें जमीनी रेडियो नेविगेशन सिस्टम और विमान के उपकरणों का समन्वय होता है।
    • पायलट को सटीक ऊँचाई और दिशा की जानकारी मिलती है, जिससे रनवे पर सुरक्षित उतरना संभव होता है।
  • इन प्रक्रियाओं से हवाई अड्डे कम दृश्यता में भी परिचालन बनाए रख सकते हैं, लेकिन कभी-कभी देरी या वैकल्पिक हवाई अड्डे पर डायवर्जन आवश्यक हो जाता है।

2. एयरलाइन की तैयारी

  एयरलाइन कंपनियां कम दृश्यता के दौरान संचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए कई उपाय करती हैं:

  • प्रशिक्षित पायलट और क्रू
    • पायलट और क्रू को कम दृश्यता में उड़ान संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
    • प्रशिक्षित क्रू विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय ले सकता है।
  • CAT IIIB प्रमाणित विमान
    • ऐसे विमान जो अत्यंत कम दृश्यता में भी सुरक्षित लैंडिंग कर सकते हैं।
    • एयरलाइन इन विमानों का विशेष रूप से कोहरे वाले मौसम में उपयोग करती है।
  • वैकल्पिक हवाई अड्डे
    • यदि किसी हवाई अड्डे पर दृश्यता बेहद कम हो, तो विमान को अनुकूल मौसम वाले वैकल्पिक हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया जाता है।
    • उदाहरण: दिल्ली हवाई अड्डे से उड़ान को डायवर्ट करके अहमदाबाद हवाई अड्डे पर लैंड कराया जा सकता है।

3. मौसम निगरानी

  • अधिकारिक कोहरे की अवधि: DGCA ने 10 दिसंबर से 10 फरवरी तक कोहरे की अवधि घोषित की है।
  • एयरलाइंस वास्तविक समय के मौसम डेटा और पूर्वानुमान विश्लेषण का उपयोग करती हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरणों के माध्यम से कोहरे की भविष्यवाणी और मार्ग योजना बेहतर बनाई जाती है।

4. अपरिहार्य व्यवधान

 कम दृश्यता के कारण कुछ व्यवधानों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। इसके उदाहरण हैं:

  • विमानों के बीच सुरक्षित दूरी बढ़ जाती है- प्रस्थान और आगमन में देरी।
  • उदाहरण: दिल्ली हवाई अड्डे की क्षमता
    • सामान्य स्थिति: 100 विमान प्रति घंटे
    • कम दृश्यता में: 65 विमान प्रति घंटे
  • FDTL नियम (Flight Duty Time Limitation)
    • पायलट और क्रू की ड्यूटी समय सीमा के कारण अतिरिक्त क्रू उपलब्ध नहीं हो पाता।
    • इससे विमान परिचालन में और देरी हो सकती है।

5. नेटवर्क पर प्रभाव

  • दिल्ली जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर व्यवधान पूरे एयरलाइन नेटवर्क को प्रभावित कर सकते हैं।
  • एक विमान और उसके क्रू को दिन में कई मार्गों पर उड़ान भरनी होती है।
  • अगर एक उड़ान में देरी होती है, तो बाकी के मार्गों पर भी प्रभाव पड़ता है।
  • एयरलाइंस गतिशील क्रू प्रबंधन करती हैं और अतिरिक्त क्रू को स्टैंडबाय पर रखती हैं ताकि संचालन में देरी कम हो।

रेलवे का कोहरे में संचालन प्रबंधन

उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम में कोहरा रेलवे संचालन के लिए एक बड़ी चुनौती होता है। रेलवे ने इस समस्या से निपटने के लिए कई तकनीकी उपाय और सुरक्षा प्रणालियाँ लागू की हैं। इन उपायों का उद्देश्य ट्रेन संचालन को सुचारू बनाए रखना है।

1. कोहरे से सुरक्षा उपकरण (Fog Safety Device - FSD)

  • FSD क्या है: Fog Safety Device (FSD) एक GPS आधारित उपकरण है जो लोकोमोटिव चालक को कोहरे या कम दृश्यता की स्थिति में सचेत करता है।
  • कार्य प्रणाली:
    • यह उपकरण ऑडियो और विजुअल अलार्म के माध्यम से चालक को संकेत देता है।
    • साथ ही स्टेशन, चेतावनी बोर्ड, सिग्नल और लेवल क्रॉसिंग गेट की जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
  • उपलब्धता:
    • दिसंबर 2025 तक कुल 25,939 FSD उपकरण रेलवे को उपलब्ध कराए गए।
    • इनमें से लगभग 23% उपकरण अकेले उत्तरी रेलवे को दिए गए, क्योंकि यह क्षेत्र कोहरे से सबसे अधिक प्रभावित होता है।
  • इस उपकरण की मदद से लोकोमोटिव चालक को कोहरे में ट्रेन की गति और मार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलती है।

2. संशोधित स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली

  • मुख्य उद्देश्य: कोहरे के दौरान ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना और भीड़भाड़ को कम करना।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • दो स्टेशनों के बीच ट्रेनों की संख्या को सीमित किया गया है।
    • सिग्नलों पर चमकदार पट्टियाँ लगाई गई हैं, जिससे कम दृश्यता में भी चालक सिग्नल आसानी से देख सके।
  • इससे ट्रेनों के संचालन में देरी कम होती है और दुर्घटना की संभावना घटती है।

3. स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) सिस्टम – कवच

  • ATP क्या है: स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (Automatic Train Protection - ATP), जिसे कवच कहा जाता है, लोकोमोटिव चालक को सिग्नल देखने की आवश्यकता कम कर देती है।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • सिग्नल और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी डैशबोर्ड पर सीधे प्रदर्शित होती है।
    • यदि चालक ब्रेक लगाने में विफल रहता है, तो सिस्टम स्वतः ब्रेक लगा देता है।
  • कवच 4.0 प्रणाली:
    • इसे बड़े पैमाने पर रेलवे नेटवर्क पर लागू किया जा रहा है।
    • वर्तमान में यह 738 किलोमीटर मार्ग पर सक्रिय है:
      • दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर: पलवल–मथुरा–नागदा (633 किमी)
      • दिल्ली–हावड़ा कॉरिडोर: हावड़ा–बर्दवान (105 किमी)
    • ATP प्रणाली और कवच 4.0 ट्रेन संचालन को कोहरे में सुरक्षित, समयबद्ध और प्रभावी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इस तरह रेलवे ने तकनीकी उपायों, FSD उपकरणों, संशोधित सिग्नलिंग और ATP प्रणाली के माध्यम से कोहरे में ट्रेन संचालन की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित की है।

प्रश्न. उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान बनने वाला प्रमुख प्रकार का कोहरा कौन-सा है ?

(a) संवहन कोहरा

(b) विकिरण कोहरा

(c) पर्वतीय कोहरा

(d) समुद्री कोहरा

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