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पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास, विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश)

संदर्भ 

  • हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का पहला सफल उड़ान परीक्षण संपन्न किया। 
  • इसके अलावा रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में लगभग 79,000 करोड़ रुपए के प्रस्तावित रक्षा खरीद सौदों को स्वीकृति दी गई, जिनमें लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट-120 भी शामिल है। 

पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) के बारे में 

  • इस लंबी दूरी की निर्देशित रॉकेट प्रणाली का डिजाइन और विकास आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ARDE) द्वारा किया गया है जिसमें उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL) का सहयोग रहा। 
  • इसके अतिरिक्त रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) तथा अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI) ने भी महत्वपूर्ण तकनीकी योगदान दिया। 
  • परीक्षण के दौरान रॉकेट को इसकी अधिकतम 120 किलोमीटर की सीमा तक उड़ाया गया। इसने उड़ान के दौरान सभी निर्धारित युद्धाभ्यासों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया और लक्ष्य पर अत्यंत सटीक प्रहार किया। 

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) 

  • भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) को सर्वोच्च निर्णयकर्ता माना जाता है। 
  • DAC की स्थापना राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में मंत्रियों के समूह की सिफारिशों के बाद की गई। 
  • इसका मुख्य उद्देश्य तीनों सशस्त्र सेवाओं के लिए समयबद्ध और प्रभावी पूंजीगत अधिग्रहण सुनिश्चित करना है, ताकि प्रमुख प्लेटफॉर्म एवं प्रणालियाँ समय पर सशस्त्र बलों तक पहुँच सकें। 

संरचना एवं सदस्यता

DAC की संरचना में उच्च स्तरीय रक्षा नेतृत्व शामिल है-

  • अध्यक्ष : रक्षा मंत्री
  • सदस्य : रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना प्रमुख
  • अन्य सदस्य : रक्षा सचिव, रक्षा उत्पादन सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव, रक्षा वित्त सचिव
  • सदस्य सचिव : उप रक्षा प्रमुख 

प्रमुख कार्य

  • DAC 15 वर्षीय दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य योजना में पूंजीगत अधिग्रहणों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान करता है, जिसमें लंबी अवधि की परियोजनाओं की पहचान की जाती है।
  • पंचवर्षीय योजनाओं में शामिल होने के लिए प्रस्तावित पूंजी अधिग्रहण परियोजनाओं के लिए DAC आवश्यक मंजूरी प्रदान करता है। यह रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण होता है।
  • DAC यह तय करता है कि अधिग्रहण ‘खरीद’, ‘खरीद एवं निर्माण’ या ‘निर्माण’ के आधार पर होगा, जिससे घरेलू उत्पादन व स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलता है।
  • रक्षा खरीद बोर्ड से प्राप्त रिपोर्ट्स के आधार पर प्रमुख अधिग्रहण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा एवं आवश्यक समन्वय किया जाता है।
  • यह परिषद परिचालन आवश्यकताओं, वित्तीय विवेक एवं स्वदेशी रक्षा उत्पादन लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करती है। 

महत्व

  • DAC तीनों सशस्त्र सेवाओं के लिए आवश्यक प्लेटफार्म और प्रणालियों के समय पर अधिग्रहण को सक्षम बनाता है।
  • यह निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है और रक्षा खरीद में देरी को कम करता है।
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